- मुंबई के वर्ली इलाके में प्रसिद्ध NSCI डोम कॉन्सर्ट में 28 साल के लड़के की मौत हो गई
- मामले में केवल नशे का ही एंगल नहीं बल्कि आयोजकों की एक ऐसी आपराधिक लापरवाही भी सामने आई है
- म्यूज़िक कॉन्सर्ट आयोजित करने वाली कंपनी 'स्पेस बाउंड', उसके सीईओ और सीनियर मैनेजर के खिलाफ FIR दर्ज
मुंबई की चकाचौंध भरी नाइटलाइफ और लाइव म्यूजिक कंसर्ट्स आज के युवाओं को एक जादुई दुनिया की तरह अपनी ओर खींच रहे हैं. हर वीकेंड पर हज़ारों की भीड़ इन इवेंट्स का हिस्सा बनने के लिए बेताब रहती है, लेकिन इन चमकते हुए आलीशान मंचों और कानों को सुन्न कर देने वाले 'बेस' के पीछे एक जानलेवा खेल भी चल रहा है. बीते शनिवार, 6 जून की ही बात है जब वर्ली के NSCI Dome में 'क्लांगकुएन्स्टलर' ऑल नाइट लॉन्ग टेक्नो कॉन्सर्ट चल रहा था. हर कोई संगीत की धुनों पर झूम रहा था, लेकिन इसी बीच माहिम के रहने वाले 28 साल के एक होनहार लॉ स्टूडेंट, वृषभ महेंद्र गांगुर्डे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी.
देखते ही देखते उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. दिल दहला देने वाली बात यह भी है कि उसके साथ आई उसकी 31 साल की महिला मित्र की हालत भी बेहद नाज़ुक हो गई, उसको बचाने के लिए जसलोक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. हमारी टीम ने जब इस पूरी घटना की ज़मीनी हकीकत जानी, तो पता चला कि ताड़देव पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है और शुरुआती शक अत्यधिक शराब और कुछ संदिग्ध प्रतिबंधित पदार्थों के घातक कॉकटेल की तरफ जा रहा है, जिसकी पुष्टि फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद होगी.
आयोजकों की वो लापरवाही जो जान पर बन आई
मामले में केवल नशे का ही एंगल नहीं बल्कि आयोजकों की एक ऐसी आपराधिक लापरवाही भी सामने आई जिसने किसी के घर का चिराग बुझा दिया. मुंबई की ताड़देव पुलिस ने अब इस मामले में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए इस पूरे म्यूज़िक कॉन्सर्ट को आयोजित करने वाली कंपनी 'स्पेस बाउंड', उसके सीईओ करण सिंह और सीनियर मैनेजर पराग ओके के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है.
पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) यानी लापरवाही से मौत, 289 और 3(5) के तहत दर्ज किया है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर आयोजकों ने ऐसा क्या किया? तफ्तीश में जो बात सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है. इतने बड़े पैमाने पर हुए इस पब्लिक इवेंट में किसी भी तरह की इमरजेंसी मेडिकल सुविधा या प्राथमिक उपचार का कोई इंतज़ाम ही नहीं था. नियमों के मुताबिक जहां हज़ारों लोग जुट रहे हों, वहां एम्बुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा किट और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ का होना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं मिला. जांच से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि अगर समय रहते वृषभ को कार्यक्रम स्थल पर ही सही मेडिकल असिस्टेंस मिल जाती, तो शायद आज वह हमारे बीच ज़िंदा होता.
गोरेगांव से पुणे तक फैला जाल
यह वर्ली की कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों के पन्ने पलटें तो समझ आएगा कि यह एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी की तरह बढ़ता जा रहा है. इसी साल अप्रैल 2026 में गोरेगांव के प्रसिद्ध नेस्को (NESCO) एक्जीबिशन सेंटर में भी एक ऐसा ही लाइव कंसर्ट हुआ था. वहां देश के एक नामी मैनेजमेंट कॉलेज के करीब 20 छात्रों का ग्रुप पार्टी करने पहुंचा था. संगीत की आड़ में वहां 'एक्स्टसी' और MDMA जैसी खतरनाक ड्रग्स का ऐसा दौर चला कि एक छात्रा और एक छात्र ने ओवरडोज के कारण दम तोड़ दिया.
उस वक्त वनराई पुलिस की जांच में यह खौफनाक सच सामने आया था कि इन कॉन्सर्ट्स के सुरक्षा गार्ड्स और बाउंसरों के साथ मिलकर ड्रग्स पैडलर अंदर तक अपना जाल फैलाते हैं. केवल मुंबई ही नहीं, इसी रविवार, 7 जून की तड़के पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लोनीकंद के तुलापुर गांव में चल रही एक बेहद सीक्रेट लेट-नाइट रेव पार्टी पर धावा बोला. वहां से पुलिस ने 156 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया. इस छापे में पुलिस ने 85 लाख रुपये से अधिक की अवैध विदेशी शराब, प्रतिबंधित हुक्का फ्लेवर और गांजा बरामद किया. ये सारी कड़ियां चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि वीकेंड कल्चर और संगीत के नाम पर हमारे बच्चों को किस गर्त में धकेला जा रहा है.
जेब खाली करने वाले टिकट्स
इन कंसर्ट्स के टिकट्स कोई सस्ते नहीं आते. टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक आम टिकट की शुरुआत ही 4,999 रुपये से होती है और वीआईपी (VIP) लाउंज या स्पेशल एक्सेस के लिए यह कीमत 10,000 रुपये से भी ऊपर चली जाती है. बच्चे अपनी पॉकेट मनी या ज़िद करके इतनी मोटी रकम इन टिकट्स पर खर्च करते हैं. प्रशासन इस समय पूरे महाराष्ट्र में ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाए हुए है और हर संदिग्ध ठिकाने पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कानून और पुलिस हर बच्चे के पीछे नहीं खड़ी हो सकती.
बच्चा कहां जा रहा है, नजर रखना माता-पिता की जिम्मेदारी
एक अभिभावक के तौर पर अब ये माता पिता की ज़िम्मेदारी है कि बच्चे वीकेंड पर कहां जा रहे हैं, किन दोस्तों के साथ उठ-बैठ रहे हैं और किस माहौल का हिस्सा बन रहे हैं, इसकी ये जानकारी रखें. अगर आपका बच्चा भी किसी 'इमर्सिव टेक्नो' या 'ऑल नाइट लॉन्गे' वेयरहाउस पार्टी में जाने की ज़िद कर रहा है, तो ठहरिए और सोचिए; क्योंकि इन रंग-बिरंगी लाइट्स के पीछे छिपा मौत का यह कॉकटेल और आयोजकों की जानलेवा लापरवाही किसी भी हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का मातम दे सकती है.
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