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El Nino Effect: मुंबई की प्यास बुझाने वाली सूख रही झीलें, संकट के बीच 7 फीसदी बचा जलभंडार; अब सिर्फ बारिश से उम्मीद

मुंबई पर जल संकट के बादल, मानसून न आने और अल नीनो से 7 प्रमुख झीलों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है और BMC के अनुसार शहर के पास सिर्फ 40-50 दिन का उपयोगी पेयजल बचा है.

El Nino Effect: मुंबई की प्यास बुझाने वाली सूख रही झीलें, संकट के बीच 7 फीसदी बचा जलभंडार; अब सिर्फ बारिश से उम्मीद
मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले बांधों में जलस्तर महज 7% रह गया.
  • पिछले 24 घंटों में जल भंडार 0.22% घटकर सिर्फ 7.31% यानी 1,05,755 मिलियन लीटर रह गया.
  • फिलहाल, पानी की सप्लाई अभी की जा रही 10 प्रतिशत की कटौती.
  • BMC के अनुसार शहर के पास सिर्फ 40-50 दिन का उपयोगी पेयजल बचा.

Mumbai Water Crisis: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर जल संकट के बादल मंडरा रहे हैं. मानसून न आने और अल नीनो (EL Nino) की वजह से यह स्थिति बन रही है. भीषण गर्मी और लंबे समय से बारिश नहीं होने की वजह से मुंबई में पानी का संकट गंभीर हालातों में बदल सकता है. इससे भी बड़ी चिंता यह है कि जो झीलें मुंबई की प्यास बुझाती हैं, वह खुद पानी के लिए तरह रही हैं. बारिश न होने के कारण 7 प्रमुख झीलों का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है.

मायानगरी पर छाए जल संकट के बादलों को हाटने के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) कुछ और कड़े कदम उठा सकती है. मानसून के सीजन में बारिश होने के चलते मुंबईकरों की दैनिक पानी की मांग और वर्तमान जल भंडार के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है.

7.31 फीसदी बचा जल भंडार, मुंबई के पास इतने दिनों पानी

पिछले 24 घंटों में जल भंडार 0.22% घटकर महज 7.31% लगभग 1,05,755 मिलियन लीटर उपयोगी पानी रह गया है, जबकि पिछले साल मानसून जल्दी शुरू होने के कारण इसी समय जलाशयों में 28% लगभग 5,37,788 मिलियन लीटर पानी मौजूद था.

अगर जरूरत की बात करें तो पूरी मुंबई को हर दिन लगभग 3,900 MLD मिलियन लीटर जलापूर्ति की आवश्यकता होती है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है कि मुंबई के पास अब केवल 40 से 50 दिनों का ही उपयोगी पेयजल बचा है.

आपातकालीन स्थिति को नियंत्रित करने और पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए बीएमसी पहले ही कई सख्त फैसले ले चुकी है. इनमें पहला जल कटती है यानी पूरे शहर में फिलहाल 10 पानी की कटौती की जा रही है.

  • गैर-जरूरी उपयोग पर रोक: निर्माण स्थलों निर्माणाधीन स्थलों और स्विमिंग पूलों की पानी की आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी गई है ताकि बेशकीमती पेयजल को बचाया जा सके.
  • यदि आने वाले दिनों में झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों यानी कैचमेंट इलाकों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जल कटौती का यह प्रतिशत और भी बढ़ाया जा सकता है.
  • मुंबई को मुख्य रूप से सात जलाशयों ऊपरी वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी से पानी मिलता है. जलाशय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का इंतजार अभी भी जारी है.

पिछले 24 घंटों में इतनी बारिश हुई

  • तुलसी- 17 मिमी
  • मोडक सागर- 10 मिमी
  • तानसा- 3 मिमी
  • विहार- 2 मिमी

मौसम की शुरुआत से अब तक तुलसी में सर्वाधिक 306 मिमी, जबकि अपर वैतरणा क्षेत्र में सबसे कम 8 मिमी बारिश दर्ज की गई है. हालांकि, मध्य वैतरणा का जलस्तर 0.06 मीटर बढ़कर 11.31% 21,890 मिलियन लीटर हो गया है.

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विहार झील क्षेत्र में कुल 180 मिमी वर्षा होने के कारण, इसका उपयोगी जल भंडार बढ़कर 45.13% (12,499 मिलियन लीटर) हो गया है, जो वर्तमान में सातों झीलों में सबसे अधिक है.

संकट से उबार सकती है सिर्फ बारिश

मुंबई की नज़रें अब पूरी तरह से मौसम विभाग के पूर्वानुमान और आसमान पर टिकी हैं. झीलों को फिर से भरने और शहर को इस संकट से उबारने के लिए लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश की सख्त आवश्यकता है.

बीएमसी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और उसने सभी मुंबईकरों से अपील की है कि वे पानी का उपयोग बेहद सोच-समझकर और सावधानी से करें. पानी की हर एक बूंद कीमती है और जब तक मानसून पूरी तरह से रफ्तार नहीं पकड़ लेता, तब तक पानी बचाना ही इस संकट का एकमात्र तात्कालिक समाधान है.

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