मुंबई में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने निर्माण परियोजनाओं के लिए 28 बिंदुओं वाली नई गाइडलाइन लागू की है. इन नियमों का उद्देश्य निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण करना है. अब सभी निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों को इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा.
खुले में कूड़ा जलाने पर पूरी तरह रोक
सर्दियों के मौसम में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए "विंटर एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026" लागू किया गया है. इसके तहत शहर में कहीं भी खुले में कूड़ा जलाने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा निर्माण स्थलों पर मजदूरों या सुरक्षा कर्मियों को खाना पकाने अथवा तापने के लिए लकड़ी या अन्य ईंधन जलाने की भी अनुमति नहीं होगी.
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मजदूरों के लिए इलेक्ट्रिक हीटर जरूरी
बीएमसी ने बिल्डरों और ठेकेदारों को निर्देश दिया है कि वे श्रमिकों के लिए इलेक्ट्रिक हीटर की व्यवस्था करें. इससे खुले में आग जलाने की जरूरत कम होगी और प्रदूषण पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी. नियमों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाओं को सीधे "स्टॉप-वर्क नोटिस" जारी किया जाएगा. गंभीर मामलों में निर्माण कार्य रोकने के साथ साइट सील भी की जा सकती है. प्रशासन का कहना है कि नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
76 टीमें कर रहीं निगरानी
नियमों के पालन की निगरानी के लिए 76 विशेष वार्ड-स्तरीय टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें रोजाना औचक निरीक्षण कर रही हैं और निर्माण स्थलों की स्थिति पर नजर रख रही हैं. शहर की 3,166 निर्माण साइटों पर सेंसर आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटर लगाए गए हैं. इन उपकरणों से मिलने वाले आंकड़ों की निगरानी बीएमसी के केंद्रीय डैशबोर्ड के जरिए की जा रही है. साथ ही मलबा ढोने वाले ट्रकों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना ढके या ओवरलोड वाहनों को जब्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
प्रदूषण नियंत्रण के सकारात्मक नतीजे
बीएमसी के अनुसार इन प्रयासों का असर भी दिखने लगा है. वर्ष 2025-26 के दौरान मुंबई में पीएम10 स्तर में करीब 48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. वहीं 22 अक्टूबर 2026 तक शहर में 231 दिन हवा की गुणवत्ता "अच्छी" या "संतोषजनक" श्रेणी में दर्ज की गई.
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