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मराठा आरक्षण: सरकार-मनोज जरांगे पाटील के बीच बातचीत बेनतीजा, आमरण अनशन पर अड़े जरांगे

मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र को लेकर महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल और मनोज जरांगे पाटील के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही. 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स के बावजूद प्रमाणपत्र न मिलने और ढीली कानूनी प्रक्रिया से नाराज जरांगे पाटील ने सरकार पर समय काटने का आरोप लगाया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे शनिवार सुबह 10 बजे से भीषण गर्मी में खुले मैदान में आमरण अनशन शुरू करेंगे.

मराठा आरक्षण: सरकार-मनोज जरांगे पाटील के बीच बातचीत बेनतीजा, आमरण अनशन पर अड़े जरांगे
मराठा आरक्षण: सरकार के साथ बातचीत विफल, शनिवार से आमरण अनशन पर बैठेंगे मनोज जरांगे पाटील
  • सरकार और मनोज जरांगे पाटील के बीच हुई कई घंटों की बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी.
  • मनोज जरांगे पाटील शनिवार से खुले मैदान में आमरण अनशन शुरू करने पर अड़े हैं.
  • 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड मिलने के बावजूद अब तक सभी पात्र लोगों को प्रमाणपत्र क्यों नहीं दिए गए.

मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार और मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील के बीच हुई अहम बैठक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी. सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अंतरवाली सराटी पहुंचा था. लेकिन कई घंटों तक चली लंबी चर्चा के बाद भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई. इसके बाद मनोज जरांगे पाटील ने साफ कर दिया कि वह अपने फैसले पर पूरी तरह कायम हैं और शनिवार सुबह 10 बजे से अपना आमरण अनशन शुरू करेंगे.

बैठक के दौरान सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे की सभी मांगों को विस्तार से सुना और कहा कि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर दोबारा जवाब दिया जाएगा. हालांकि, जरांगे पाटील ने इसे सरकार द्वारा “समय निकालने की कोशिश” बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की.

बातचीत विफल होने की बड़ी वजह क्या रही?

बातचीत के दौरान मनोज जरांगे पाटील ने सरकार से सीधा सवाल किया कि आखिर अब तक जिन 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड मिलने का दावा किया गया, उनमें से सभी पात्र लोगों को प्रमाणपत्र क्यों नहीं दिए गए? इस पर मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके. सरकार की ओर से SOP तैयार होने, प्रक्रिया तेज करने और जिलावार अभियान चलाने की बात कही गई, लेकिन जरांगे ने तीखा सवाल पूछा कि आखिर तय समयसीमा क्या है और सरसकट प्रमाणपत्र कब तक मिलेंगे?

जरांगे पाटील ने यह भी सवाल उठाया कि मार्च तक प्रक्रिया में तेजी लाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम इतना धीमा क्यों रहा? इस पर विखे पाटील ने भी माना कि अपेक्षित गति से काम नहीं हो पाया और उन्होंने आगे तेजी लाने का आश्वासन दिया.  जरांगे पाटील सरकार के इन जवाबों से बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आए. उन्होंने कहा कि बार-बार सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस निर्णय नहीं दिख रहे. उनका सीधा आरोप है कि सरकार मराठा समाज को “अग्निपरीक्षा” देने पर मजबूर कर रही है.

इन प्रमुख मुद्दों पर भी हुई चर्चा

दस्तावेज और रिपोर्ट: बैठक में हैदराबाद गजट, सातारा संस्थान गजट, लंबित कुनबी नोंदियों और शिंदे समिति की रिपोर्ट पर चर्चा हुई.
मुकदमे वापसी: सरकार ने दावा किया कि आंदोलन से जुड़े 668 मामलों में से 568 मामले वापस लिए जा चुके हैं और बाकी गंभीर मामलों पर भी विचार चल रहा है.
मुआवजा और नौकरी: आंदोलन में जान गंवाने वाले परिवारों को अनुग्रह राशि देने और कुछ युवाओं को नौकरी देने की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी सरकार द्वारा दी गई.

अब पीछे हटने का सवाल नहीं

बैठक के बाद मनोज जरांगे पाटील ने मीडिया से कहा कि सरकार के पास पर्याप्त समय था, लेकिन अब तक मांगों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया. उन्होंने दोहराया कि मराठा समाज को सरसकट कुनबी प्रमाणपत्र और OBC आरक्षण का लाभ मिलना ही चाहिए. जरांगे ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक आंदोलन होगा.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस भीषण गर्मी में खुले मैदान में ही अनशन करेंगे और किसी भी प्रकार की विशेष या चिकित्सीय सुविधा स्वीकार नहीं करेंगे. भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने उनसे अनशन का फैसला वापस लेने की भावुक अपील की, लेकिन उन्होंने अपना रुख बदलने से साफ इनकार कर दिया.

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