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सुशांत केस में रिया चक्रवर्ती को बड़ी राहत! कोर्ट ने अभिनेत्री और मां-भाई के फ्रीज बैंक खाते खोलने के दिए आदेश

मुंबई की एक विशेष NDPS अदालत ने रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के चार बैंक खातों को फ्रीज हुए खाते दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है. बता दें कि रिया सभी मामलों में बरी तो पहले ही हो चुकी हैं.Major Relief for Rhea Chakraborty brother and mother Court Order to Unfreez Bank Accounts in Sushant Case

सुशांत केस में रिया चक्रवर्ती को बड़ी राहत! कोर्ट ने अभिनेत्री और मां-भाई के फ्रीज बैंक खाते खोलने के दिए आदेश
रिया चक्रवर्ती और परिवार के फ्रीज अकाउंट होंगे अनफ्रीज.

Sushant Singh Rajput Case: बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) को सुशांत सिंह राजपूत मामले में बड़ी राहत मिल गई है. मुंबई के स्पेशल NDPS कोर्ट ने अभिनेत्री और उनके परिवार के बैंक खाते अनफ्रीज करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने एनसीबी (NCB) की कार्य प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने पाया कि NCB ने इन खातों को फ्रीज करते समय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया था.

दरअसल, ये बैंक खाते साल 2020 में सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले (Sushant Singh Rajput Death Case) से जुड़े ड्रग्स केस (Drugs Case) की जांच के दौरान फ्रीज किए गए थे. NDPS अधिनियम के अनुसार, किसी खाते को फ्रीज करने के बाद 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य है, जिसे लेने में NCB विफल रही.

भाई और मां के भी अकाउंट थे फ्रीज

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कानूनी रूप से आवश्यक मंजूरी नहीं ली जाती है तो फ्रीज करने का आदेश अमान्य हो जाता है. अभियोजन पक्ष ने भी स्वीकार किया कि उनके पास आवश्यक मंजूरी नहीं थी. अदालत ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और उनकी मां संध्या चक्रवर्ती द्वारा दायर आवेदनों को स्वीकार कर लिया है.

राहत पहले ही गई थी, लेकिन खाते थे फ्रीज

अदालत ने आदेश दिया है कि इन खातों को RBI के नियमों के अनुसार फिर से शुरू किया जाए. यह निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर लिया गया है. कोर्ट ने उन्हें सभी मामलों से राहत दे दी थी, लेकिन उनके बैंक अकाउंट पर अबतक फ्रीज थे. इसकी वजह से वह बैंक से ट्रांजेक्शन नहीं कर सकती थीं.

कोर्ट ने बताया क्यों अनफ्रीज किए खाते

कोर्ट का फैसला एक अहम प्रक्रिया संबंधी मुद्दे पर केंद्रित था. कोर्ट ने देखा कि एजेंसी ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत कानूनी आवश्यकताओं का पालन नहीं किया. अपने आदेश में कोर्ट ने NDPS एक्ट के सेक्शन 68F के सब-सेक्शन (2) का हवाला देते हुए साफ किया कि किसी भी प्रॉपर्टी को फ्रीज या सीज करने के आदेश का तब तक कोई कानूनी असर नहीं होता, जब तक कि उसे 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी द्वारा कन्फर्म न किया जाए. इस मामले में ऐसा कोई आदेश पास नहीं किया गया था, इसलिए बैंक अकाउंट्स को डीफ्रीज करने का आदेश दिया गया.

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