केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था. इसके साथ ही सरकार ने जम्मू कश्मीर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के सात साल पूरे हो चुके हैं. इस अवसर पर आइए देखते हैं कि सरकार के इस कदम से वहां क्या-क्या बदलाव आए हैं.
राज्य में सबसे बड़ा बदलाव आतंकवाद की घटनाओं को लेकर आया है. राज्य में आतंकवादी घटनाओं, पत्थरबाजी, घुसपैठ के प्रयासों और नागरिक और सुरक्षा बलों की मौतों में गिरावट दर्ज की गई है. बीते सात साल पिछले दो दशक में राज्य में सबसे अधिक शांतिपूर्ण समय के रूप में रहे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आतंकी घटनाओं में करीब 83 फीसद की गिरावट देखी गई है. वहीं पत्थरबाजी की घटनाएं भी करीब 99 फीसद कम हुई हैं.साल 2025 में जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में होने वाली मौतों का आंकड़ा दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर दर्ज हुआ.
सिमटता आतंकवाद
जम्मू कश्मीर में 2022 में 151 आतंकी घटनाएं हुई थीं, जो 2025 में घटकर केवल 35 रह गई. इस तरह आतंकी घटनाओं में करीब 77 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसी अवधि में मारे गए आतंकवादियों की संख्या भी 193 से घटकर 46 हो गई. वहीं मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत की संख्या भी 30 से घटकर 17 हो गई. बीता साल जम्मू कश्मीर में सबसे कम हिंसक साल के रूप में रहा. इस दौरान आतंकवादी घटनाओं में मरने वाले नागरिकों की संख्या सबसे कम 28 रही. इनमें ले 26 मौतें तो 22 अप्रैल को पहलाम में हुए आतंकी हमले में हुई थीं. इससे पहले 2024 में 127, 2023 में 134, 2022 में 253 मौतें दर्ज की गई थीं. वहीं 2026 में अब तक 12 आतंकी घटनाओं में दो नागरिकों, दो अज्ञात, दो सुरक्षाकर्मियों की मौत दर्ज की गई थी. इन घटनाओं में 11 आतंकी भी मारे गए हैं.
पर्यटकों की बढ़ती संख्या क्या कहती है
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस साल फरवरी में विधानसभा में बताया था कि 2016-18 के दौरान 59 लाख से अधिक पर्यटक आए थे. यह संख्या 2023-2025 के बीच बढ़कर 2.42 करोड़ हो गई. ये आंकड़े 2019 के बाद घाटी में पर्यटन क्षेत्र में आए बदलाव की गवाही देते हैं. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले की वजह से 2025 में कश्मीर मंडल में पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई. साल 2024 में यह 98 लाख से अधिक थी, जो 2025 में घटकर 47 लाख से अधिक रह गई. कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर पर्यटकों की पहली पसंद बना रहा. साल 2024 में 95 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने वहां की यात्रा की. इस साल फरवरी के शुरुआती हफ्ते तक 69 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके थे.
वहीं जम्मू कश्मीर सरकार के पर्यटन विभाग की बेवसाइट के मुताबिक 2019 और 2023 के बीच राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में एक करोड़ 62 लाख 21 हजार 250 पर्यटकों ने राज्य की यात्रा की थी. इनमें से एक करोड़ 56 लाख 55 हजार 718 पर्यटकों ने जम्मू संभाग और पांच लाख 65 हजार 532 पर्यटकों ने कश्मीर संभाग की यात्रा की थी. जम्मू संभाग की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों में 24 हजार 141 विदेशी थे. वहीं 33 हजार 779 विदेशी पर्यटकों ने कश्मीर संभाग की यात्रा की थी. लेकिन 2023 में जम्मू कश्मीर की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़कर दो करोड़ 11 लाख 80 हजार 11 हो गई. इनमें से एक करोड़ 80 लाख 24 हजार 176 पर्यटकों ने जम्मू संभाग और 27 लाख 10 हजार 497 पर्यटकों ने कश्मीर संभाग की यात्रा की थी. साल 2023 में जम्मू संभाग की यात्रा करने वालों में 17 हजार 650 विदेशी नागरिक थे. वहीं 37 हजार 678 विदेशी पर्यटकों ने कश्मीर संभाग की यात्रा की. इस बेवसाइट पर केवल 2023 तक के ही आंकड़े उपलब्ध हैं.
कश्मीर घाटी तक पहुंची रेल
सरकार के प्रयासों ने जम्मू कश्मीर ने रेल नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है. रेल नेटवर्क अब श्रीनगर तक पहुंच चुका है. रेलवे का उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पर यातायात शुरू हो चुका है. यह 272 किमी लंबी रेल लाइन कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ती है. इसी रेल खंड पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चिनाब नदी पर बनाया गया है.

उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पर चिनाब नदी के ऊपर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया है. यह भारत की इंजिनियरिंग क्षमता का बेमिसाल नमूना है.
Photo Credit: PIB
प्रति व्यक्ति आय में हुआ इजाफा
वित्त वर्ष 2026-2026 के लिए जम्मू कश्मीर के आर्थिक सर्वे के मुताबिक 2019 के बाद से राज्य के निवासियों की आय में हर साल 8.81 फीसद का इजाफा हुआ है. साल 2025-26 में इसके एक लाख 68 हजार 234 होने का अनुमान है. हालांकि यह राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय दो लाख 19 हजार 575 से अभी पीछे ही है. यह दिखाता है कि 2019 के बाद से राज्य की अर्थव्यवस्था में तेजी आई है. इसके बाद भी राष्ट्रीय औसत से अंतर बना हुआ है. जम्मू-कश्मीर की प्रति व्यक्ति आय अभी भी भारत के औसत से काफी कम है. इसका मतलब विकास तो हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए अभी और तेजी की जरूरत है. लेकिन जम्मू कश्मीर ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे राज्यों और केंद्र शासित राज्यों की तुलना में अच्छी प्रगति की है.
क्या हैं बड़ी चुनौतियां
पिछले सात सालों में पर्यटन में आई तेजी, रेल, सड़क और सुरंग जैसी आधारभूत परियोजनाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी, सेवा सेक्टर के विस्तार और निवेश बढ़ने से जम्मू कश्मीर में आर्थिक गतिविधियां मजबूत को हुई हैं. लेकिन कृषि पर बड़ी आबादी की निर्भरता, सीमित औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन की धीमी रफ्तार अभी भी इस केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं. सरकार को इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है.
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