- नासिक TCS में काम करने वाली महिलाओं ने टीम लीडर्स पर धर्म परिवर्तन की कोशिश, यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं
- आरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पाई ने इस मामले में टीसीएस के प्रबंधन की चुप्पी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है
- जांच में पचा चला है कि कंपनी में महिलाओं के साथ यह उत्पीड़न करीब चार वर्षों से चल रहा था
महाराष्ट्र के नासिक की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को लेकर बड़े खुलासे ने देश को हिला दिया है. कंपनी के बीपीओ में काम करने वाली महिला वर्कर्स ने अपने टीम लीडर्स पर धर्म परिवर्तन की कोशिश, यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. एक गवाह ने दावा किया है कि आरोपी अन्य आरोपियों को हिंदू महिलाओं से शादी करने के लिए कहते थे.राज्य के कई थानों में इसे लेकर शिकायत भी दर्ज करवाई गई है. बड़ी IT कंपनी पर लगे इन आरोपों से कॉर्पोरेट जगत की एक प्रमुख हस्ती को बड़ा झटका लगा है.
आरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पाई इस पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि एक बड़ी कंपनी में खुलेआम ये सब कैसे चलता रहा. वहां का मैनेजमेंट तमाशबीन बना ये सब कैसे देखता रहा. उन्होंने इसके खिलाफ सख्त एक्शन लिए जाने की मांग की है. उन्होंने मंगलवार को एनडीटीवी से कहा कि इस इस तरह के आरोपों से वह सदमे में हैं. टीसीएस एक बड़ी कंपनी है. उम्मीद है कि उनके पास इस तरह के उत्पीड़न को रोकने के लिए अच्छा सिस्टम होगा."
सांप्रदायिक तत्व कर रहे कंपनी HR का दुरुपयोग
मोहनदास पाई ने कहा कि यह व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं का उल्लंघन और सांप्रदायिक तत्वों द्वारा एचआर का दुरुपयोग है. उन्होंने पढ़ा है कि यह शख्स सबके सामने एक महिला को पकड़ता था और लोग चुप रहते थे. यह तो डर भरी एक ऐसी बात है जिस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है कि किसी भी कॉर्पोरेट ऑर्गनाइजेशन में ऐसा भी हो सकता है. टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में इस तरह की चीजें हो रही हैं, जिस पर विश्वास करना मुश्किल है.
बता दें कि इस मामले को सबसे पहले एनडीटीवी ने ही उजागर किया था. जांचकर्ताओं के मुताबिक, उत्पीड़न का यह सिलसिला करीब चार सालों से चल रहा है. साल 2022 से ये सब शुरू हुआ था. इसमें यौन शोषण और धार्मिक रूप से प्रेरित व्यवहार दोनों शामिल थे. जिसके बाद पुलिस ने सीक्रेटल इस पर एक्शन लिया.
TCS का सीनियर मैनेजमेंट क्या कर रहा है?
आरिन कैपिटल के चेयरमैन ने पूछा कि TCS का सीनियर मैनेजमेंट क्या कर रहा है? वह शख्स क्या कर रहा था, जिसे यह एचआर पर्सन रिपोर्ट करता है. उन्होंने कानाफूसी और लोगों की बातें तो सुनी ही होंगी. एचआर से इस व्यवहार की शिकायत की गई और वह चुप रहा. इसके लिए एचआर विभाग के साथ इन सभी लोगों पर भी आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
मोहनदास पाई ने सुझाव दिया कि ऐसे अपराधों के खिलाफ जांच में एचआर विभाग के बजाय किसी स्वतंत्र शिकायतकर्ता चैनल और बाहरी सदस्यों वाली समितियों और ऑडिट कमेटी को रिपोर्ट करने वाले सिस्टम को शामिल करना चाहिए. अगर आप मैनेजमेंट के खिलाफ शिकायत करते हैं तो वह इन बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकता. एक अच्छे वर्कप्लस पर धार्मिक आधार पर महिलाओं को निशाना बनाना कॉर्पोरेट जगत के लिए काले धब्बे की तरह है.
कॉर्पोरेट जगत की अंतरात्मा को झकझोरने वाला
मोहनदास ने कहा कि हम 'लव जिहाद' के बारे में सुनते हैं. हर जगह इस तरह की बातें सुनने को मिलती हैं. अब देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक के भीतर चार-पांच लोग ये सब कर रहे हैं. ये तो कॉर्पोरेट जगत की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है.
उन्होंने बताया कि अपने करियर में पर्सनली फेथ बेस्ड वर्कप्लस के अन्य फोर्म देखे हैं. जैसे कि कैंपस प्रचार और ऑनलाइन ग्रुप्स, जो अलग-अलग समुदायों के सहकर्मियों को टारगेट करते हैं. लेकिन इन सबके खिलाफ एक्शन लिया गया था. लेकिन एचआर का इन गतिविधियों में शामिल होना और मैनेजमैंट का चुप रहना हैरान करने वाला है. ये उन्होंने पहले नहीं देखा था.
कर्मचारियों को सुरक्षित महसूस करवाना जरूरी
उन्होंने कहा कि देशभर में बड़े स्तर पर इसको खत्म किए जाने की जरूरत है. कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वहां काम करने वालों को सुरक्षित वातावरण मिले. इसके लिए कंपनियों को स्वतंत्र व्हिसलब्लोअर हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए और हर कर्मचारी को पत्र लिखकर सुरक्षा का आश्वासन देना चाहिए. साथ ही अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं का ऑडिट भी करना चाहिए.
बता दें कि इस मामले में पुलिस 9 शिकायतों की जांच कर रही है. छह पुरुषों और एक महिला समेत 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. एक अन्य महिला कर्मचारी फिलहाल फरार है.
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