- सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है
- विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को बिहार के डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ राज्यपाल ने दिलाई है
- सम्राट चौधरी ने आरजेडी से राजनीति की शुरुआत की और बाद में जेडीयू छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे
Samrat Chaudhary Sworn Bihar CM: सम्राट चौधरी ने बिहार के CM पद की शपथ ले ली है. इसके साथ ही वह बिहार के 24वें मुख्यमंत्री हो गई है. इसके साथ ही विजय चौधरी के साथ विजेंद्र यादव ने डिप्टी CM पद की शपथ ली है. राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सीएम और डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई है.
सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद बिहार में नीतीश और लालू युग की राजनीति का अंत माना जा रहा है. इसके साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री भी होगी. अब तक बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं बन सका था.
कौन हैं सम्राट चौधरी?
सम्राट चौधरी सीएम बनने से पहले बिहार के डिप्टी सीएम थे. बीते दिन नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुना था. गौरतलब है कि सम्राट आरएसएस की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं.
सम्राट के पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेता माने जाते थे. सम्राट की राजनीति में एंट्री 1990 में हुई. साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे. 2005 में इस सीट से चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2010 में फिर से शानदार वापसी की.
फिर साल 2014 में आरजेडी का साथ छोड़कर सम्राट जेडीयू में शामिल हो गए. हालांकि जेडीयू के साथ उनका साथ ज्यादा नहीं चला फिर 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए.
वर्ष 2023 में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए. जनवरी 2024 में नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए और वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला. फिर 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर से जीत दर्ज की. सिर्फ आठ से नौ साल में भाजपा में उनकी तेज तरक्की को पार्टी की ओबीसी आउटरीच रणनीति का नतीजा माना जा रहा है.
आपराधिक मामलों की वजह से विवादों में रहे हैं
सम्राट चौधरी विवादों से भी घिरे रहे हैं. 2025 के चुनावी हलफनामे में सम्राट चौधरी ने जानकारी दी थी कि उन पर दो आपराधिक मामले लंबित हैं. एक केस पटना में दर्ज है. तो दूसरा उनके गृह जिले मुंगेर में दर्ज है. लोकसभा चुनाव के दौरान आचार सहिंता के उल्लंघन का मामला भी उन पर केस दर्ज किया गया था. उन्होंने हलफनामे में 10 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति घोषित की थी.
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