- नासिक के टीसीएस कार्यालय में आठ महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए हैं
- जांच के मुताबिक, आरोपियों ने देर तक कंपनी में रुककर महिला कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाया था
- संदिग्धों ने व्हाट्सएप पर रणनीति बनाकर हिंदू महिलाओं से शादी करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला था
महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को लेकर बड़े खुलासे ने देश को हिलाकर रख दिया है. एक बड़ी कंपनी की 8 महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया है. जिसने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर पर सवालिया निशान लगा दिया है. महिला कर्मचारियों पर किस तरह से दबाव बनाया जाता था, इस बात का खुलासा हो गया है. पुलिस जांच में अब वह तरीका सामने आया है, जिसके जरिए आरोपी युवक-युवतियों को अपने जाल में फंसाते थे.
टाइम पूरा होने के बाद भी ऑफिस में रुकते थे आरोपी
आरोपियों की मोडस ऑपरेंडी सामने आ गई है. जानकारी के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को अपने नियंत्रण में रखने और उन्हें दबाने के लिए आरोपी अलग-अलग तरह के मानसिक दबाव के हथकंडे अपनाते थे. जांच में खुलासा हुआ है कि अपनी साजिशों को अंजाम देने के लिए संदिग्ध आरोपी ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी काफी देर तक कंपनी में रुकते थे.
सबके सामने वे ऐसा जताते थे कि जैसे कंपनी का काम कर रहे हों, लेकिन असल में वे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहते थे. सूत्रों के अनुसार, इन हरकतों के लिए उन्होंने कंपनी की संपत्ति और संसाधनों का भी इस्तेमाल किया. किसी भी गतिविधि को अंजाम देने से पहले आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के जरिए पूरी रणनीति तैयार की जाती थी. आरोपी व्हाट्सएप पर रणनीति बनाकर और देर रात तक कंपनी में रुककर महिला कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाने का काम करते थे.

हिंदू महिलाओं से शादी करने को कहा जाता था
दफ्तर में आरोपियों से हिंदू महिलाओं से शादी करने के लिए कहा जाता था, ये दावा एक प्रत्यक्षदर्शी ने किया है. इस मामले में 9 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं. पुलिस अब तक 6 पुरुषों और एक महिला समेत सात कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है. एक अन्य महिला कर्मचारी फिलहाल फरार है.
टीसीएस के नासिक ऑफिस में एक कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर ने एनडीटीवी को बताया, "वे कहते थे, 'हिंदू लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बनाओ और उनसे शादी करो.' वे लोग धर्म बदलने के लिए कहते थे और अपने धर्म के बारे में बातें करते थे. इसके लिए उनको पैसे भी दिए जाते थे. यह सिलसिला 2021 से चल रहा था. इसके लिए एचआर मैडम को भी पैसा दिया जाता था.
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सीनियर्स ने किया मानसिक और यौन उत्पीड़न
पुलिस ने पिछले हफ्ते आठ महिला कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है. महिलाओं का दावा है कि उनके सीनियर्स ने उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया. एचआर विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया. ये घटनाएँ फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच घटीं.

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों में से एक ने एक महिला कर्मचारी से शादी का झूठा वादा करके बार-बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. वहीं एक कर्मचारी को अनुचित तरीके से छुआ गया. उसके निजी और वैवाहिक जीवन के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की गईं.
छेड़छाड़ हुई, नमाज पढ़ने को मजबूर किया गया
पुलिस के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के बारे में कंपनी के हेड से मौखिक शिकायतें कीं, तो उन्होंने छेड़छाड़ की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया. बल्कि, उन्होंने उनके कृत्यों को बढ़ावा दिया. महिला के शारीरिक रूप-रंग के बारे में भी अश्लील टिप्पणियां की गईं. आरोपियों ने एक पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और उसके धर्म का अपमान किया.
शिकायत करने पर नौकरी से निकालने की धमकी
पीड़त महिलाओं ने जब कंपनी की महिला एचआर एग्जीक्यूटिव से इसकी शिकायत की, तो उन्हें कथित तौर पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई. बता दें कि गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. उनकी पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और एचआर एग्जीक्यूटिव निदा खान के रूप में हुई है.
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