महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव
- महाराष्ट्र के 29 महानगरपालिका में 15 जनवरी को वोटिंग होना है
- देश के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी में भी कल मतदान होना है
- बीजेपी, शिवसेना से लेकर उद्धव और कांग्रेस ने इन चुनावों के लिए पूरी ताकत झोंक दी है
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मुंबई:
महाराष्ट्र के महानगरों में चुनावी शोर थम चुका है. 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान होगा. इस बार का चुनाव काफी अहम रहने वाला है. खास तौर पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए. देखना दिलचस्प होगा कि मुंबई की जनता इस बार BMC में किसे सत्ता सौंपती है. बीजेपी, शिवसेना से लेकर कांग्रेस और उद्धव की शिवसेना ने पूरी ताकत झोंकी है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महानगरों में प्रचार थम चुका है, 29 नगर निगमों की 2,869 सीटों के लिए कल मतदान है. यह स्थानीय निकाय संस्थाओं का अब तक का सबसे बड़ा चुनावी चरण है.
इस बार चुनावी रण में कुल 15,931 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यानी हर सीट पर औसतन 5 से 6 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है.
एशिया की सबसे अमीर नगर पालिका BMC मुंबई पर सबकी निगाहें हैं. इसके अलावा पुणे, ठाणे, नागपुर और संभाजीनगर जैसे बड़े शहरों का भविष्य भी कल तय होगा. राज्य की अधिकांश प्रमुख महानगरपालिकाओं (जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर) के आखिरी चुनाव फरवरी 2017 में हुए थे. इनका 5 साल का कार्यकाल 2022 में खत्म हो गया था, लेकिन ओबीसी आरक्षण विवाद, वार्डों के परिसीमन और कोरोना महामारी के कारण चुनाव टलते रहे. पिछले लगभग 4 सालों से इन शहरों में कोई निर्वाचित पार्षद नहीं था और नगर निगमों का कामकाज सरकारी प्रशासकों द्वारा चलाया जा रहा था.
मुकाबला मुख्य रूप से महायुति बीजेपी, शिवसेना-शिंदे, NCP-अजित पवार और महाविकास अघाड़ी, शिवसेना (उद्धव), कांग्रेस, NCP-शरद पवार के बीच है. राज ठाकरे की MNS कई सीटों पर भाई उद्धव के साथ लड़ते हुए 'किंगमेकर' की भूमिका में है. 2017 के मुकाबले राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है. शिवसेना और NCP दो-दो फाड़ हो चुकी हैं. पहली बार असली पार्टी और सिंबल की लड़ाई स्थानीय स्तर पर जनता के बीच है जैसे शिंदे बनाम ठाकरे और अजित पवार बनाम शरद पवार.
नगर पालिका चुनाव में प्रचार के दौरान घुसपैठ, मराठी अस्मिता, हिंदुत्व सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं!
सभी 29 शहरों में स्ट्रॉन्ग रूम्स तैयार हैं. EVM मशीनों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और CCTV से निगरानी रखी जा रही है. मुंबई सहित सभी महानगरों में हजारों पुलिसकर्मियों के साथ SRPF की टुकड़ियां तैनात की गई हैं. फर्जी मतदान रोकने के लिए सीमाओं पर नाकाबंदी की गई है. इस बार महा एसईसी पोर्टल और वोटर हेल्पलाइन ऐप के जरिए नाम ढूंढना और डिजिटल जानकारी प्राप्त करना पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाया गया है.
15 जनवरी को होने वाले मतदान और 16 जनवरी को होने वाली मतगणना के लिए मुंबई की सड़कों और मतदान केंद्रों पर 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती की गई है. इस विशाल सुरक्षा बल का नेतृत्व 10 एडिशनल सीपी और 33 डीसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं. स्ट्रॉन्ग रूम्स और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी (CCTV) और ड्रोन के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके.
हां, संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग वोट डाल सकें. मुंबई सहित सभी चुनावी शहरों में 13 जनवरी से लेकर 16 जनवरी (मतगणना की समाप्ति) तक चार दिनों के लिए 'ड्राई डे' लागू कर दिया गया है. अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित करने के लिए 15 जनवरी को सभी चुनावी शहरों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। मुंबई में मतदान के कारण शेयर बाजार BSE और NSE भी गुरुवार को बंद रहेंगे.
प्रचार के आखिरी घंटों में भी मुफ्त तोहफे और पैसे बांटने के आरोपों ने माहौल गरम रखा. कई जगह पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लाठी डंडे चले, BJP और शिंदे गुट में कई जगह भिड़ंत चर्चा में बनी रही. चुनाव आयोग इन शिकायतों पर पैनी नजर रख रहा है.
15 जनवरी मतदान संपन्न होने के बाद, वोटों की गिनती की अगले दिन 16 जनवरी को होगी. 16 जनवरी को तय होगा कि शहरों का 'असली किंग' कौन है. मतदान से पहले ही राज्य भर में लगभग 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिनमें महायुति (BJP-शिंदे-अजित पवार) का पलड़ा भारी दिख रहा है.
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