- महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है
- सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा को रद्द करने का फैसला मराठी भाषा विभाग ने लिया है
- हिंदी परीक्षा अनिवार्य इसलिए थी क्योंकि महाराष्ट्र स्थापना से पहले हिंदी सरकारी कामकाज की प्रमुख भाषा थी
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य 'हिंदी भाषा परीक्षा' को रद्द करने का आधिकारिक फैसला लिया है. यह अहम फैसला मराठी भाषा विभाग ने लिया है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों से विपक्ष इस मुद्दे पर काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए था.महाराष्ट्र की महायुति गठबंधन की सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सालों से चली आ रही हिंदी परीक्षा रद्द कर दी है. मतलब अब सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी एग्जाम नहीं देना होगा.
क्यों अनिवार्य थी यह परीक्षा?
महाराष्ट्र राज्य की स्थापना से पहले, तत्कालीन सरकार ने सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग के मद्देनजर सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया था. महाराष्ट्र राज्य के गठन के बाद से, सभी सरकारी कार्यों के लिए मुख्य रूप से 'मराठी भाषा' का ही उपयोग किया जा रहा है.
महाराष्ट्र सरकार ने क्यों रद्द किया एग्जाम
महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम के प्रावधानों और वर्तमान में सरकारी कामकाज के स्वरूप को देखते हुए, हिंदी भाषा परीक्षा को अनिवार्य बनाए रखना तार्किक नहीं रह गया था. राज्य सरकार के रोजमर्रा के कामकाज में हिंदी भाषा का उपयोग लगभग न के बराबर है. इसके अलावा, केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के साथ होने वाला पत्राचार भी मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में किया जाता है.
हिंदी परीक्षा को रद्द करने का आदेश
इन सभी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भाषा निदेशालय द्वारा आयोजित की जाने वाली इस हिंदी परीक्षा को रद्द करने का शासनादेश जारी कर दिया है. इसके साथ ही, इस परीक्षा से जुड़े पूर्व के सभी सरकारी आदेश, परिपत्रक और शासनादेश अब अमान्य कर दिए गए हैं.
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