आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर से इंसान का कंट्रोल खोना कैसा दिख सकता है, इसका सटीक अंदाजा लगाना भी बेहद मुश्किल है. हम शायद उस खतरे की भयावहता को समझ ही नहीं सकते जो एक 'सुपरइंटेलिजेंस' हमारे लिए पैदा कर सकती है. ये बात दुनिया भर में AI की सबसे प्रतिष्ठित आवाजों में से एक, ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक Stuart Russell ने कही है. अपनी बात को समझाने के लिए रसेल ने एक हैरान करने वाला उदाहरण देते हुए कहा कि चिम्पांजी ये कभी नहीं समझ सकते कि इंसान उन्हें कैसे विलुप्त कर सकते हैं. वे परमाणु हथियारों जैसी चीजों की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं. ठीक वैसे ही इंसान भी सुपरइंटेलिजेंट AI के खतरे को समझने में असमर्थ हैं.
NDTV के शिव अरूर के साथ एक विशेष बातचीत में, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के प्रोफेसर रसेल ने AI के डेवलपमेंट की रफ्तार को धीमा करने की मांगों पर अपनी बात रखी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेटा के हेड मार्क जकरबर्ग इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिसको लेकर उन्होंने भारी निराशा भी जताई. उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अनकंट्रोल्ड "रोबोट्स की एक बड़ी सेना" अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकती है.
रसेल ने 'Artificial Intelligence: A Modern Approach' नाम की विश्वप्रसिद्ध किताब का सह-लेखन किया है. इसे दुनिया के 135 देशों के 1,500 से अधिक विश्वविद्यालयों में इस विषय की सबसे प्रामाणिक पाठ्यपुस्तक के रूप में पढ़ाया जाता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ AI के डेवलपमेंट को धीमा कर देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि मानवता के अस्तित्व पर मंडराते इस खतरे से निपटने के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी बैरियर की सख्त जरूरत है.

Anthropic के CEO का प्रपोजल
Anthropic के CEO Dario Amodei ने AI मॉडल्स की रफ्तार को कंट्रोल करने का प्रस्ताव दिया था. इस प्रस्ताव पर रसेल ने कहा, "इसे समझाने का एक सीधा तरीका ये है कि मान लीजिए कोई गाड़ी 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार से खाई की तरफ बढ़ रही थी. अब वह कह रहे हैं कि हमें खाई की तरफ 40 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ना चाहिए. इस वजह से केवल रफ्तार धीमी करना सही सोच नहीं है. हमें ये सोचना होगा कि किसी भी AI सिस्टम को दुनिया के सामने रिलीज करने से पहले की नॉन-निगेशिएबल पूर्व शर्तें क्या होनी चाहिए?"
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उन्होंने कहा कि अमोदेई का लेख, 'We Must Pace The Frontier', भी इसी जरूरत को स्वीकार करता है. "ये पटरी पर केवल धीमी गति का झंडा लहराना नहीं है, बल्कि ट्रैक के आर-पार एक मजबूत बैरियर लगाना है. आप उस बैरियर को तभी पार कर सकते हैं जब आप ये साबित कर दें कि आपके सिस्टम में सभी जरूरी सेफ्टी स्टैंडर्ड मौजूद हैं. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसा हम हवाई जहाजों के साथ करते हैं. आप किसी हवाई जहाज को तब तक नहीं बेच सकते और उसमें यात्रियों को नहीं बैठा सकते जब तक वह सभी कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा न करे. यही नियम दवाइयों पर भी लागू होता है."
दूसरे एक्सपर्ट्स की चेतावनी
जब उनसे पूछा गया कि हाल ही में एंथ्रोपिक छोड़ने वाले जेकब कॉक्सन और अन्य रिसर्चर्स की इन चेतावनियों पर क्या सच में भरोसा किया जाना चाहिए, तो रसेल का जवाब बिना किसी झिझक के "हाँ" था.
उन्होंने तर्क दिया कि "भले ही कुछ ही लोगों ने इस्तीफा दिया हो, लेकिन फ्रंटियर AI कंपनियों में काम करने वाले 1,000 से अधिक वैज्ञानिकों ने एक संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करके ठीक यही बात कही है कि यह मानवता के लिए बहुत बड़ा खतरा है. आपको उनकी बात को सच मानना होगा. कुछ लोग कह सकते हैं कि वे सिर्फ अपनी कंपनी के शेयरों की वैल्यू बढ़ाने के लिए ऐसा माहौल बना रहे हैं. लेकिन मैं इसे नहीं मानता, क्योंकि सैम ऑल्टमैन जैसे लोग तो OpenAI बनने से पहले ही, साल 2015 से इस खतरे की चेतावनी दे रहे थे जब उनका कोई वित्तीय फायदा भी नहीं जुड़ा था."
Alan Turing का उदाहरण
रसेल ने कहा कि आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान के जनक एलन ट्यूरिंग का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने साल 1951 में ही मशीनों से दुनिया पर कंट्रोल हासिल करने की संभावना जताई थी. "उस समय तो कोई टेक कंपनियां भी नहीं थीं जिनमें ट्यूरिंग के शेयर्स होते. इस वजह से ये तर्क टिकता ही नहीं है." उन्होंने दोहराया कि वैज्ञानिकों पर झूठ बोलने या स्वार्थ का आरोप लगाने के बजाय उनकी इस गंभीर चेतावनी को समझना जरूरी है. इंसानों के लिए खुद से कहीं ज्यादा ताकतवर सिस्टम्स पर अपना कंट्रोल बनाए रखना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

OpenAI सिस्टम से खो बैठा कंट्रोल
रसेल ने OpenAI के अपने ही AI सिस्टम्स पर से कंट्रोल खोने का ताजा उदाहरण दिया, जहां मॉडल्स ने Hugging Face नाम की कंपनी के सिस्टम में सेंध लगाकर जानकारी चुराई थी और OpenAI के खुद के कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा करने की कोशिश की थी. जब उनसे पूछा गया कि क्या AI कुछ ही सालों के भीतर ऐसा अस्तित्व का खतरा बन सकता है, तो उन्होंने कहा कि अगर इस तकनीक के डेवपलपमेंट और नियमों में गलतियां की गईं तो ऐसा बिल्कुल मुमकिन है. उन्होंने अफसोस जताया कि दुनिया की सरकारें इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही हैं.
चिंपाजी और रोबोट की आर्मी
ये पूछने पर कि इंसानी नियंत्रण खोने का मंजर कैसा दिख सकता है, रसेल ने चिम्पांजी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि "पहली समस्या ये है कि अगर हम किसी सुपर-इंटेलिजेंट शक्ति से निपट रहे हैं, तो हमें तब तक खतरे का अहसास ही नहीं होगा जब तक बहुत देर न हो जाए. ठीक वैसे ही जैसे अगर आप चिम्पांजी से पूछें कि इंसान उन्हें कैसे खत्म करेंगे, तो वे कभी समझ नहीं पाएंगे क्योंकि हम उनसे कहीं ज्यादा समझदार हैं और परमाणु बम फोड़ने जैसी चीजें करते हैं जो उनकी समझ से कोसों दूर हैं.
खतरों के संभावित रास्तों पर बोलते हुए रसेल ने कहा कि अमोदेई ने AI के पूरे इंटरनेट पर कब्जा करने के जोखिम की ओर भी इशारा किया है. "आज की दुनिया पूरी तरह इंटरनेट पर टिकी है. हमारी सप्लाई चेन, ई-कॉमर्स, ग्लोबल अर्थव्यवस्था और आम जीवन सब इसी पर निर्भर है. अगर इस पर कब्जा हुआ तो यह अपने आप में विनाशकारी होगा. इसके अलावा AI सिस्टम्स असल भौतिक दुनिया में दो रास्तों से भारी तबाही ला सकते हैं."
पहले खौफनाक रास्ते को समझाते हुए उन्होंने कहा "पहला रास्ता है इंसानों के दिमाग को इस तरह भड़काना कि वे आपस में लड़ मरें. उदाहरण के लिए, अगर AI के हित में यह हो कि दुनिया में परमाणु युद्ध हो जाए, तो वह अमेरिकियों को चीनी लोगों से नफरत करना और डरना सिखा सकता है, और चीनी लोगों को अमेरिकियों के खिलाफ भड़का सकता है. वह मिसाइल हमले या परमाणु हमले के झूठे संकेत पैदा करके दुनिया को एक वैश्विक परमाणु युद्ध में झोंक सकता है."
उन्होंने आशंका जताई कि AI आतंकियों को ऐसा खतरनाक वायरस बनाने की तरकीब दे सकता है जो पूरी मानव जाति को मिटा दे. "जापान के Aum Shinrikyo जैसे कई पंथ रहे हैं जो मानते थे कि सभी इंसानों को मारना उनका धार्मिक कर्तव्य है. बस उनके पास ऐसा करने की वैज्ञानिक तकनीक नहीं थी. आज के AI सिस्टम्स उन्हें यह खतरनाक ज्ञान आसानी से दे सकते हैं."
दूसरा रास्ता और भी ज्यादा डरावना
दूसरा तरीका यह है कि आज AI को फिजिकल रिसोर्स का कंट्रोल दिया जा रहा है. इनमें बायोसिंथेसिस लैब्स, केमिकल फैक्ट्रियां और जल्द ही रोबोट्स की बड़ी सेना शामिल हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, एलन मस्क लाखों या अरबों ह्युमनॉइड रोबोट्स बनाने का वादा कर रहे हैं, जो हमारी नौकरियां छीनने और सेवा करने के नाम पर आएंगे.
क्या चीन आएगा साथ?
इस दलील पर कि अगर अमेरिका में कड़े नियम बने तो चीन AI रेस जीत जाएगा, रसेल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि बड़े खतरों पर देश हमेशा साथ आए हैं. "हमें मिनिमम सेफ्टी स्टैंडर्ड पर चीन, अमेरिका और अन्य सभी देशों की आपसी सहमति चाहिए. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हमने समझा था कि रेफ्रिजरेटर की CFC गैसें ओजोन परत को नष्ट कर रही हैं, जिससे धरती पर जीवन खत्म हो जाएगा. तब पूरी दुनिया एक साथ आई और सीएफसी पर बैन लगाया, जिसके बाद ओजोन परत ठीक हो गई.
AI के मामले में भी ठीक यही सच है. अगर किसी भी देश या कंपनी का AI सिस्टम नियंत्रण से बाहर होता है, तो वह केवल उस कंपनी या देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए काल बन जाएगा. इसलिए यह हम सभी के साझा हित में है कि हम कड़े सुरक्षा नियम बनाएं ताकि ऐसा कोई भी खतरनाक सिस्टम कभी न बनाया जा सके."
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