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आरक्षण मुद्दे के समाधान के लिए संविधान संशोधन जरूरी, केंद्र फैसला करे: शरद पवार

शरद पवार ने एक कार्यक्रम में कहा कि आरक्षण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उचित समय पर संविधान में संशोधन करके सुलझाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर समाज में दरार पैदा हो रही है, जिससे समाज में कटुता पैदा हो रही है.

आरक्षण मुद्दे के समाधान के लिए संविधान संशोधन जरूरी, केंद्र फैसला करे: शरद पवार
शरद पवार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर संविधान में संशोधन करके सुलझाना चाहिए. (फाइल)
  • शरद पवार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उचित समय पर संविधान में संशोधन करके सुलझाना चाहिए.
  • उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए आरक्षण पर फैसले संसद के माध्यम से लेने की बात कही.
  • शरद पवार ने कहा कि आरक्षण पर बहस छिड़ गई है. इस बात की चिंता है कि इस बहस से समुदाय में कटुता पैदा होगी.
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मुंबई :

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है. पवार ने कहा कि देशभर में आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने में केंद्र सरकार की भूमिका को महत्‍वपूर्ण बताते हुए कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को फैसले लेने होंगे. साथ ही उन्‍होंने संविधान संशोधन को जरूरी बताया और कहा कि सरकार को संसद के जरिए संविधान में संशोधन कर आरक्षण पर फैसला लेना चाहिए. साथ ही कहा कि आरक्षण पर छिड़ी बहस को लेकर कहा कि इससे समुदाय में कटुता पैदा होगी.

एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने एक कार्यक्रम में कहा, "आरक्षण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उचित समय पर संविधान में संशोधन करके सुलझाना चाहिए." 

चिंता है कि समुदाय में कटुता बढ़ेगी: पवार

शरद पवार ने कहा कि आरक्षण पर बहस छिड़ गई है. इस बात की चिंता है कि इस बहस से समुदाय में कटुता पैदा होगी. उन्‍होंने कहा कि फिलहाल मराठा बनाम ओबीसी पर बहस छिड़ गई है. इन दोनों समुदायों में कई कठिनाइयां और पिछड़ापन है. उन्‍होंने कहा कि एक बड़ा वर्ग पीड़ित है और अगर उसे तरक्की करनी है, तो उसे आरक्षण की जरूरत है. 

पवार ने कहा कि मराठा समुदाय का एक बड़ा वर्ग किसान है, चूंकि खेती के जरिए भी तरक्की नहीं हो रही है, इसलिए उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण एक विकल्प है. हालांकि ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि दोनों समुदायों के बीच कटुता न बढ़े. 

उन्‍होंने कहा कि इसमें केंद्र सरकार को फैसले लेने होंगे. समय-समय पर संविधान में संशोधन करके ऐसे फैसले लेने होगे.  

आरक्षण पर केंद्र को फैसला लेना होगा: पवार

तमिलनाडु में 72 प्रतिशत आरक्षण का उदाहरण देते हुए पवार ने कहा, "अगर आरक्षण के मुद्दों को सुलझाना है, तो राष्ट्रीय स्तर पर ही निर्णय लिए जाने चाहिए. केंद्र सरकार को इस पर फैसला लेना होगा. अगर तमिलनाडु में 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो उचित समय पर संविधान में संशोधन करके आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने के लिए संसद में निर्णय लिया जाना चाहिए."

पवार ने कहा, "हम संसद के कुछ सदस्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं. पार्टी सांसद नीलेश लंके और कुछ अन्य सहयोगियों ने भी एक बैठक की। अगर हम देश और अन्य राज्यों को इस बारे में समझा दें, तो यह मुद्दा सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं रह जाएगा. हर राज्य में छोटे-छोटे लोग होते हैं. किसान समूह भी हैं. इसलिए अगर हम संविधान में संशोधन का रुख अपनाएं, तो आरक्षण का मुद्दा हल हो सकता है."

महाराष्‍ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन

शरद पवार की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन चल रहा है और अपने कार्यकर्ताओं के साथ मनोज जरांगे शुक्रवार से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं. इससे पहले, जरांगे-पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए मराठा आरक्षण को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया.

जरांगे ने कहा, "मुख्यमंत्री के लिए ये जरूरी है कि वे हमारी सभी मांगें पूरी करें. शनिवार को भूख हड़ताल का दूसरा दिन है और हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि मराठा समुदाय की मांगें पूरी करें. हमें सम्मान दें, अपमान न करें."
 

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