महाराष्ट्र के बीड स्थित जिला अस्पताल में डॉक्टरों की घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. डॉक्टरों ने प्रसव के दौरान ऑपरेशन करते हुए 19 वर्षीय प्रसूता के पेट में सर्जिकल ग्लव्स और पेपर टिशू वाइप्स छोड़ दिए, जिससे महिला की जान जोखिम में पड़ गई. घटना का खुलासा कई दिनों बाद तब हुआ, जब पीड़िता को असहनीय पेट दर्द की शिकायत हुई.
जानकारी के अनुसार, 19 वर्षीय संध्या सूरज गायकवाड़ को प्रसव के लिए बीड जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 1 अगस्त 2026 को डॉक्टरों ने उनकी सर्जरी की. सर्जरी के चार दिनों बाद स्थिति सामान्य बताकर मरीज को छुट्टी दे दी गई. परिजन जब संध्या को घर ले गए, तो उनके पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हो गया. हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए पुणे स्थित ससून अस्पताल ले गए. वहां आपातकालीन सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने प्रसूता के शरीर के भीतर रह गए सर्जिकल ग्लव्स और पेपर टिशू वाइप्स बाहर निकाले.
परिजनों में आक्रोश, कड़ी कार्रवाई की मांग
इस घटना से पीड़िता का परिवार गहरे सदमे में है. पीड़िता के पति ने पूरी मेडिकल टीम पर सीधे तौर पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है. महिला की मां ने रुंधे गले से बताया कि डॉक्टरों की इस बड़ी चूक के कारण उनकी बेटी की शारीरिक स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उसमें अपने नवजात बच्चे को गोद में लेने तक की हिम्मत नहीं बची थी.
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को पीड़ित परिवार ने जिला अस्पताल प्रशासन के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई. बीड के जिला सर्जन डॉ. सतीश कुमार सोलंके ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रसूता की सर्जरी में शामिल संबंधित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है. उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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