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'एक गलती और ₹5 करोड़ गायब, 6 इंच के फोन में जिंदगी कैद'; NDTV युवा मंच पर महाराष्ट्र साइबर चीफ यशस्वी यादव

NDTV युवा 2026 में महाराष्ट्र साइबर के ADGP यशस्वी यादव ने डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड, डीपफेक और डार्क वेब के बढ़ते खतरे पर चेतावनी दी. उन्होंने बताया कि 58 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार हुआ एक दंपति 40 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के झांसे में रहा था.

58 करोड़ की ठगी, डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक का खतरा; ADGP यशस्वी यादव की चेतावनी
NDTV
  • महाराष्ट्र साइबर चीफ की चेतावनी, एक क्लिक आपकी जिंदगी तबाह कर सकता है
  • 30 करोड़ भारतीयों का डेटा डार्क वेब पर! साइबर चीफ का बड़ा दावा
  • पासवर्ड लंबा नहीं, जटिल होना चाहिए; जानिए साइबर एक्सपर्ट की सलाह
मुंबई:

आज एक स्मार्टफोन के भीतर हमारी पहचान, बैंकिंग, निजी तस्वीरें, सामाजिक संबंध और जिंदगी भर की कमाई मौजूद है. अपराधी 6G की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में एक गलत क्लिक, एक फर्जी लिंक या एक साइबर ठग का फोन सब कुछ तबाह कर सकता है. NDTV युवा 2026 मुंबई चैप्टर में महाराष्ट्र साइबर विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यशस्वी यादव ने साइबर अपराधों के तेजी से बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि आम लोग अभी भी डिजिटल सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहे. उन्होंने युवाओं, अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बताया.

साइबर क्राइम अब हर व्यक्ति की जिंदगी को छू रहा

यशस्वी यादव ने कहा कि आज भारत में करीब 70 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं. हर स्मार्टफोन एक सुपर कंप्यूटर की तरह है, जिसमें लगभग 1100 फीचर्स होते हैं. लेकिन अधिकांश लोग उनमें से महज 50 से 60 फीचर्स का ही इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा कि जब लोगों को अपने ही डिवाइस की पूरी जानकारी नहीं होती, तो साइबर अपराधी उसी अज्ञानता का फायदा उठाते हैं. यही कारण है कि साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और उनका दायरा युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक फैल चुका है.

युवाओं को सबसे ज्यादा निशाना बना रहे ये तीन तरह के अपराध

यशस्वी यादव के मुताबिक साइबर अपराधों को प्रमुख रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है. पहली श्रेणी उन अपराधों की है जो लोगों की शर्म, डर और सामाजिक प्रतिष्ठा को निशाना बनाते हैं. इनमें साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे अपराध शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि कई किशोर और युवा इन अपराधों के कारण मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं. कुछ मामलों में आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है. महाराष्ट्र साइबर ने पिछले वर्ष 236 युवतियों की जान बचाई, जिन्होंने इंटरनेट पर आत्महत्या करने के संकेत दिए थे.

दूसरी श्रेणी में निवेश घोटाले, क्विक मनी स्कीम, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और पिरामिड स्कीम जैसे अपराध आते हैं, जो लोगों के लालच और फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) का फायदा उठाते हैं. तीसरी और सबसे गंभीर श्रेणी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साइबर अपराधों की है. उन्होंने कहा कि अब साइबर क्राइम साइबर टेररिज्म का रूप ले चुका है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पर हुए 10 लाख साइबर हमले

यशस्वी यादव ने बताया कि भारत के कई महत्वपूर्ण संस्थान साइबर हमलों का शिकार हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पर 10 लाख से ज्यादा साइबर अटैक हुए थे, जिनमें लगभग एक प्रतिशत हमले सफल भी रहे. यह स्थिति बताती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय बन चुकी है.

मुंबई में रोजाना 8 से 10 हजार साइबर शिकायतें

उन्होंने बताया कि मुंबई में प्रतिदिन 8 हजार से 10 हजार साइबर शिकायतें दर्ज हो रही हैं. यशस्वी यादव के अनुसार यह संख्या दुनिया में सबसे अधिक है. उन्होंने बताया कि समय रहते कार्रवाई करके महाराष्ट्र साइबर ने करीब 1600 करोड़ रुपये फ्रीज कराए, जो साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच चुके थे. इनमें से बड़ी रकम पीड़ितों को वापस कराई जा रही है.

डिजिटल अरेस्ट सबसे बड़ा साइबर जाल

उन्होंने डिजिटल अरेस्ट को वर्तमान समय का सबसे खतरनाक साइबर फ्रॉड बताया. उन्होंने 72 वर्षीय दंपति का उदाहरण देते हुए बताया कि उनसे 58.3 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी. साइबर ठगों ने उन्हें 40 दिनों तक यह विश्वास दिलाया कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट' में हैं. दोनों आत्महत्या करने वाले थे, लेकिन उनके एक मित्र ने 1930 हेल्पलाइन पर फोन कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने समय पर हस्तक्षेप कर उनकी जान बचाई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है.

1930 नंबर याद रखना बेहद जरूरी

यशस्वी यादव ने कहा कि 1930 एक ऐसा हेल्पलाइन नंबर है जो आपकी जिंदगी, आपकी जमा पूंजी और आपकी प्रतिष्ठा बचा सकता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अदालत का अधिकारी बताकर पैसा मांगता है तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें.

डीपफेक बन रहा नई चुनौती

कार्यक्रम में डीपफेक के बारे में भी बताया गया. यशस्वी यादव ने बताया कि एआई तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है. उन्होंने एक लोकप्रिय गेमिंग इन्फ्लुएंसर का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका डीपफेक अश्लील वीडियो वायरल किया गया था. हालांकि महाराष्ट्र साइबर के विशेष सॉफ्टवेयर ने कुछ ही सेकंड में उसे डीपफेक साबित कर दिया, जिससे उसकी प्रतिष्ठा बचाई जा सकी.

डार्क वेब पर मौजूद है करोड़ों भारतीयों का डेटा

यशस्वी यादव ने कहा कि डार्क वेब सबसे खतरनाक डिजिटल दुनिया है. उनके अनुसार करीब 30 करोड़ भारतीयों का डेटा डार्क वेब पर उपलब्ध है. इसमें ईमेल आईडी, पासवर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य निजी जानकारी शामिल हो सकती है.

उन्होंने कहा कि डार्क वेब पर ड्रग्स तस्करी, हथियारों का कारोबार, बाल तस्करी, सुपारी हत्या और अन्य अवैध गतिविधियां संचालित होती हैं. फेसबुक और इंस्टाग्राम आपकी उम्मीद से ज्यादा जानकारी जानते हैं

यशस्वी यादव ने कहा कि अधिकांश लोग बिना पढ़े ही मोबाइल एप्लिकेशनों को विभिन्न अनुमतियां दे देते हैं. उनके अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं की लोकेशन, रुचियां, खरीदारी की आदतें और अन्य कई प्रकार की जानकारियां एकत्र करते हैं. इसलिए किसी भी ऐप को अनुमति देने से पहले उसकी शर्तें और प्राइवेसी सेटिंग्स समझना बेहद जरूरी है.

लंबा नहीं, जटिल पासवर्ड बनाइए

पासवर्ड सुरक्षा को लेकर उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि उनके एक परिचित ने बहुत लंबा डिक्शनरी शब्द पासवर्ड के रूप में रखा था, फिर भी उसकी करीब 5 करोड़ रुपये की क्रिप्टो संपत्ति चोरी हो गई. यशस्वी यादव के अनुसार केवल लंबा पासवर्ड पर्याप्त नहीं होता. पासवर्ड में बड़े अक्षर, छोटे अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल होने चाहिए. जटिल पासवर्ड को तोड़ने में साइबर अपराधियों को वर्षों लग सकते हैं.

पब्लिक वाई-फाई सबसे बड़ा जोखिम

उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क साइबर अपराधियों का पसंदीदा हथियार हैं. रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद फर्जी वाई-फाई नेटवर्क उपयोगकर्ताओं की तस्वीरें, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी और संपर्क सूची तक हासिल कर सकते हैं. उन्होंने सलाह दी कि केवल विश्वसनीय संस्थानों के नेटवर्क का ही उपयोग करें और संवेदनशील वित्तीय लेनदेन सार्वजनिक वाई-फाई पर कभी न करें.

साइबर जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

कार्यक्रम के अंत में यशस्वी यादव ने कहा कि साइबर अपराधों से लड़ाई केवल पुलिस या सरकार नहीं जीत सकती. उन्होंने युवाओं से साइबर वॉरियर बनने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज में साइबर सुरक्षा की जानकारी फैलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से तकनीक बदल रही है, उतनी ही तेजी से जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है. क्योंकि आज के दौर में साइबर अवेयरनेस ही साइबर क्राइम के खिलाफ सबसे मजबूत रक्षा कवच है.

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