- बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारी तेज हो गई है और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार चुनाव लड़ेंगी
- लक्ष्मण हाके ने बारामती से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं और वे कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेंगे
- लक्ष्मण हाके महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य, OBC समुदाय के मुद्दों के लिए सक्रिय भूमिका निभाते हैं
महाराष्ट्र का बारामती एनसीपी के दिग्गज नेता और पू्र्व डिप्टी सीएम अजित पवार का गढ़ रहा है पर नियति देखिए कि 28 जनवरी की सुबह उसी बारामती के पास अजित पवार का प्लेन क्रैश हुआ और दादा सदा के लिए प्रदेश की जनता से रुखसत हो गए. बारामती में अब उपचुनाव है, अजित पवार की जगह उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार उस सीट पर अपनी दावेदारी ठोकेंगी,लेकिन राह उतनी भी आसान नहीं है. उनके सामने निर्दलीय उम्मीदवार लक्ष्मण हाके होंगे. हाके ने कहा कि निर्विरोध चुनाव लोकतंत्र के लिए घातक है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श करने के बाद बारामती से चुनाव लड़ सकते हैं. आइए जानते हैं लक्ष्मण हाके हैं कौन जो डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को कड़ी टक्कर दे सकते हैं.
लक्ष्मण हाके जल्द ले सकते हैं फैसला
अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव की हलचल तेज हो गई है. मीडिया से बात करते हुए लक्ष्मण हाके ने कहा कि चुनाव का निर्विरोध होना लोकतंत्र के लिए घातक है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चुनाव निर्विरोध होते हैं, तो ओबीसी समाज के नेता और कार्यकर्ता अपने मुद्दे किसके सामने रखेंगे? हाके के अनुसार, उनके समर्थकों का उन पर चुनाव लड़ने के लिए भारी दबाव है, जिस पर वे जल्द ही अंतिम निर्णय लेंगे. लक्ष्मण हाके ने कहा की वो बारामती जाकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ एक अहम बैठक करेंगे. इस बैठक के बाद ही वे आधिकारिक तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा करेंगे.
कौन हैं लक्ष्मण हाके?
लक्ष्मण हाके महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य रहे हैं और वर्तमान में खुद को OBC रक्षक के तौर पर पेश कर रहे हैं, मराठा आरक्षण के खिलाफ और OBC कोटे को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने जालना में आमरण अनशन किया था, जिससे उन्हें पूरे महाराष्ट्र में पहचान मिली. वे पहले शिवसेना (UBT) से जुड़े थे, लेकिन फिलहाल वे निर्दलीय या अपने सामाजिक संगठन के माध्यम से सक्रिय रहते हैं. लक्ष्मण हाके ने बहुत बड़े स्तर पर चुनाव नहीं जीते हैं, लेकिन वे सांगोला और अन्य क्षेत्रों से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. उनकी ताकत वोट जीतने से ज्यादा वोट काटने और एक खास वर्ग OBC को एकजुट करने की है.
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सुनेत्रा के लिए आसान नहीं है राह
बारामती में बड़ी संख्या में धनगर और अन्य OBC समुदाय हैं. हाके की उम्मीदवारी से परंपरागत रूप से NCP को मिलने वाला OBC वोट बैंक बंट सकता है, अगर सुनेत्रा पवार निर्विरोध चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रही थीं, तो हाके की एंट्री इस योजना को थोड़ा कमजोर करेगी, उन्हें एक आक्रामक प्रतिद्वंद्वी का सामना करना होगा, जो बारामती जैसे हाई-प्रोफाइल चुनाव के समीकरण बिगाड़ सकते हैं.
अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर सहानुभूति की लहर को देखते हुए महायुति की ओर से सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जिताने की कोशिशें तेज हैं. चर्चा है कि परिवार में हुए इस बड़े दुख के बाद शरद पवार भी उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, ताकि चुनाव निर्विरोध हो सके, हालांकि लक्ष्मण हाके की दावेदारी इस योजना में बाधा डाल सकती है.
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