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अजित पवार और शरद पवार साथ आएंगे? सुप्रिया सुले, नवाब मलिक और प्रफुल्ल पटेल ने दिए अहम संकेत

महाराष्ट्र की 12 जिला परिषदों में शरद और अजित पवार की एनसीपी एक साथ चुनाव लड़ रही है, लेकिन दोनों गुटों के एक होने का कोई प्रस्ताव फिलहाल नहीं है. एनसीपी के भविष्य को लेकर परिवार में मतभेद हैं, लेकिन कुछ नेताओं का कहना है कि जल्द ही दोनों गुट एक हो सकते हैं, जिसके लिए राजनीतिक माहौल महत्वपूर्ण रहेगा.

अजित पवार और शरद पवार साथ आएंगे? सुप्रिया सुले, नवाब मलिक और प्रफुल्ल पटेल ने दिए अहम संकेत
  • महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे और पवार परिवार की पार्टियों के बीच दूरी और समीकरण में बदलाव देखने को मिला है
  • एनसीपी के दो गुट 12 जिला परिषदों में एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन अभी पार्टी के एक होने का कोई प्रस्ताव नहीं
  • शरद पवार सक्रिय राजनीति से दूर होने की इच्छुक हैं और उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव में कोई बैठक संबोधित नहीं की
मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले दिनों काफी उठापटक देखने को मिली. कुछ दलों के बीच दूरी बढ़ीं, तो कुछ पुराने फिर करीब आ गए. उद्धव और राज ठाकरे इकट्ठा हुए. लेकिन अब स्थानीय निकायों के चुनाव के नतीजों के बाद लगता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में काफी कुछ बदलने वाला है. जब दो ठाकरे एक हो गए, तो क्या दो पवार भी एक होंगे..! मौजूदा स्थिति में 12 जिला परिषदों में दोनों एनसीपी एक साथ लड़ रही हैं. यही नहीं कई जिला परिषदों में तो शरद पवार की पार्टी अजित पवार के सिंबल घड़ी पर लड़ रही है.1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई थी, तब उनका चुनाव चिह्न घड़ी था. मगर पार्टी 2023 में टूट गई. अजित पवार अलग हो गए और पार्टी का सिंबल घड़ी उनके पास चली गई. शरद पवार को तुरही बजाते हुए आदमी का सिंबल मिला था.

एक होने का कोई प्रस्ताव नहीं : सुप्रिया सुले

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब आप 12 जिला परिषद में साथ लड़ रहे हैं, तो दोनों एनसीपी एक क्यों नहीं हो सकती? इस सवाल पर जब NDTV ने सुप्रिया सुले, प्रफुल्ल पटेल और नबाब मलिक से बात की. सुप्रिया सुले का कहना है कि हमारी पहली प्राथमिकता इन 12 जिला परिषदों में अच्छा करना है. हम अभी इसमें व्यस्त हैं अभी तक दोनों पार्टी के एक होने का कोई प्रस्ताव नहीं है. आगे क्या होगा, उस पर उन्होंने फिलहाल कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. 

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 मतलब कुछ और नहीं निकालना चाहिए : प्रफुल्ल पटेल

एनसीपी अजित पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल ने भी दोनों पवार के फिर एक होने के सवाल पर सीधे-सीधे कोई जवाब नहीं दिया. ज्यादा बोलने से परहेज करते हुए उन्‍होंने केवल इतना कहा कि यह स्थानीय निकाय का चुनाव है. इसमें एक साथ चुनाव लड़ने का मतलब कुछ और नहीं निकालना चाहिए. 

बस थोड़ा इंतजार कीजिए... नवाब मलिक

वहीं, जब एनसीपी अजित पवार के नेता नवाब मलिक से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि दोनों परिवार को एक जुट होना चाहिए. बहुत सारे सांसद, विधायक और लाखों कार्यकर्ता यही चाहते हैं और आने वाले दिनों में यही होगा आप इंतजार कीजिए.

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क्‍या सक्रिय राजनीति से दूर होना चाहते हैं शरद पवार? 

महाराष्ट्र की राजनीति के स्थानीय निकाय के चुनाव में इस बार हुआ क्या? पवार साहब एक भी मीटिंग को संबोधित करने नहीं गए. हालांकि, कहा गया कि वो पहले भी स्थानीय चुनावों में मीटिंग नहीं करते थे. यदि आप एनसीपी और शरद पवार की राजनीति को समझते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए कि शरद पवार जो 38 साल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे, वे अपने जीवन में कोई भी चुनाव नहीं हारे. मगर मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उन्होंने इच्छा जाहिर की है कि वो इस बार राज्य सभा में भी नहीं आना चाहते हैं. आगे क्या होगा कहना मुश्किल है. पवार 85 साल के हो चुके हैं और शायद सक्रिय राजनीति से दूर होना चाहते हैं. यदि ऐसा हुआ, तो उनके पचास दशक की राजनीति का अंत होगा. लोकसभा में शरद पवार के 8 सांसद हैं जबकि अजित पवार की पार्टी का एक ही सांसद है. वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में अजित पवार के 41 विधायक हैं, तो शरद पवार के 10 यानि महाराष्ट्र के स्थानीय राजनीति में अजित पवार की पकड़ है, जबकि महाराष्ट्र के लोग हमेशा शरद पवार को प्रधानमंत्री देखना चाहते रहे हैं.

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पवार परिवार की अगली पीढ़ी भी तैयार  

पवार परिवार की राजनीति हमेशा से साफ रही है कि सुप्रिया सुले दिल्ली की राजनीति देखेंगी और अजित पवार महाराष्ट्र की. मगर पिछले कई सालों से शरद पवार रोहित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए तैयार कर रहे थे. हाल के दिनों में रोहित ही उनके साथ चुनाव प्रचार में साथ रहते थे. अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में रोहित पवार की क्या भूमिका होगी? एनसीपी में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार और रोहित एक ही पीढ़ी के हैं, मगर रोहित पवार जिला परिषद से चुनाव जीतते हुए अभी विधायक हैं. वहीं, पार्थ पवार लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं. दूसरी दिक्कत ये है कि शरद पवार इंडिया गठबंधन के साथ हैं, जबकि अजित पवार एनडीए के साथ और अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री के साथ साथ वित्त मंत्री भी हैं.

ऐसे में दोनों एनसीपी एक होगी या नहीं, ये फैसला शरद पवार को करना है और वो जो फैसला लेंगे वो सबको मंजूर होगा. इसलिए एनसीपी की राजनीति में आने वाला महीना महत्वपूर्ण है, इस दौरान कई चौंकाने वाले फैसले हो सकते हैं.

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