मुंबई पुलिस विभाग में 6.5 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है. बिना पुलिस में भर्ती हुए 10 लोग सैलरी लेते रहे. वेतन प्रणाली बदलते ही मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद समता नगर पुलिस स्टेशन में 5 तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है.
यह मामला मुंबई पुलिस के 'नॉर्थ रीजनल डिवीजन' उत्तरी क्षेत्रीय प्रभाग का है. एक इंटरनल ऑडिट में यह बात सामने आई कि पुलिस विभाग के पेरोल सिस्टम में हेराफेरी की गई है. सिस्टम में ऐसे "घोस्ट एम्प्लॉईज" फर्जी/अदृश्य कर्मचारियों के नाम जोड़े गए, जिनका पुलिस विभाग से कोई संबंध ही नहीं था. इन फर्जी रिकॉर्ड्स के आधार पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का वेतन भुगतान किया गया.
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
नॉर्थ रीजन के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कार्यालय (समता नगर, कांदिवली पूर्व) से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने समता नगर पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है. अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि सिस्टम में ये फर्जी नाम कैसे डाले गए और यह 6.41 करोड़ रुपये की बड़ी रकम असल में किसके खातों में गई है.
ऐसे हुआ खुलासा
घोटाले से जुड़ी संदिग्ध वित्तीय अनियमितताएं मुख्य रूप से दिसंबर 2019, जनवरी और फरवरी 2020, और उसके बाद जून से सितंबर 2020 के बीच की हैं. इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हाल ही में तब हुआ, जब पुलिस कर्मचारियों का डेटा पुरानी 'सेवार्थ' वेतन प्रणाली Sevaarth payroll system से नए सिस्टम में ट्रांसफर किया जा रहा था. फिलहाल, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ये 10 लोग असल में कौन हैं और इनके नाम पर खोले गए बैंक खातों का संचालन किसके हाथ में था. आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(B) और 34 के तहत कानूनी शिकायत दर्ज कर ली गई है.
इन 10 फर्जी नामों पर उठाया जा रहा था वेतन
रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भगवत भोसले, गुणाजी खावकर, महादेव हलदणकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोरात, सूर्यकांत पाटिल और पांडुरंग कदम।
इन 5 तत्कालीन अधिकारियों/कर्मचारियों पर FIR दर्ज
सरकारी धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने और साजिश रचने के आरोप में रामकिशन गोस्वामी (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी), नागेश तलवडेकर (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी), विजया चव्हाण (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी), अजय राठौड़ (मुख्य लिपिक), अमोल मेश्राम (वरिष्ठ लिपिक) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
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