- महाराष्ट्र सरकार ने वरिष्ठ IPS अधिकारी सदानंद दाते को नया डीजीपी नियुक्त किया है, वे आज पदभार संभालेंगे.
- दाते 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त थे और मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
- दाते ने NIA महानिदेशक के रूप में काम किया है और उन्होंने CBI तथा महाराष्ट्र एटीएस में भी सेवाएं दी हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सदानंद दाते को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है. रश्मि शुक्ला के सेवानिवृत्त होने के बाद आज शाम 4 बजे दाते औपचारिक रूप से महाराष्ट्र के नए डीजीपी के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे. पदभार संभालने के साथ ही राज्य की पूरी पुलिस व्यवस्था की कमान उनके हाथों में आ जाएगी. सदानंद दाते को देश 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के नायक के तौर पर जानता है. उधर, महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी रहीं रश्मि शुक्ला आज सेवानिवृत्त हो गईं.
सदानंद दाते 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान वर्ष 2008 में मुंबई पुलिस में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रीजन) के पद पर तैनात थे. कामा अस्पताल के पास आतंकियों के साथ मुठभेड़ में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे. बावजूद इसके उन्होंने ऑपरेशन का नेतृत्व किया था. उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था.
NIA प्रमुख से महाराष्ट्र डीजीपी तक
डीजीपी बनने से पहले सदानंद दाते देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी एजेंसी एनआईए के महानिदेशक रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने सीबीआई, सीआरपीएफ और महाराष्ट्र एटीएस में भी महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं.
दाते ने CM फडणवीस से की मुलाकात
सदानंद दाते ने पदभार ग्रहण करने से पहले आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की. यह मुलाकात मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर हुई, जिसे एक गुडविल विजिट के रूप में देखा जा रहा है. महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है.
महाराष्ट्र की पहली महिला DGP रश्मि शुक्ला
उधर, महाराष्ट्र पुलिस की पहली महिला डीजीपी रहीं रश्मि शुक्ला को आज पुलिस परंपराओं के साथ सम्मानपूर्वक विदाई दी गई. मुंबई के नायगांव पुलिस ग्राउंड में आयोजित समारोह में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके साथ ही वे आज औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त हो गईं.
रश्मि शुक्ला के कार्यकाल को लेकर जहां एक ओर कई अहम प्रशासनिक फैसले और पुलिस सुधार जुड़े रहे, वहीं फोन टैपिंग मामले और चुनावी दौर में लगे पक्षपात के आरोपों को लेकर उनका कार्यकाल राजनीतिक बहस का विषय भी बना. इसके बावजूद महाराष्ट्र पुलिस के इतिहास में पहली महिला डीजीपी के रूप में उनका नाम दर्ज हो चुका है.
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