Thewa Art: राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध थेवा कला आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की पहचान बन चुकी है. इस पारंपरिक और दुर्लभ शिल्पकला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश के मंदसौर निवासी शिल्पकार राकेश सोनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. करीब 25 वर्षों से थेवा कला को जीवित रखने वाले राकेश सोनी ने अपनी बारीक कारीगरी के दम पर देशभर में पहचान बनाई है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेश यात्रा के दौरान थेवा कला से निर्मित उपहार भेंट किए जाने के बाद यह कला फिर चर्चा में आई. इससे प्रेरित होकर राकेश सोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए विशेष थेवा आर्ट ब्रोच तैयार किया है, जिसे वह अपनी कला और सम्मान के प्रतीक के रूप में उन्हें भेंट करना चाहते हैं.
400 साल पुरानी कला को संवार रहे हैं राकेश सोनी
मंदसौर निवासी राकेश सोनी पिछले लगभग 25 वर्षों से थेवा कला से जुड़े हुए हैं. उन्होंने इस कला की शिक्षा राजस्थान के प्रतापगढ़ में रहने वाले अपने मामा से प्राप्त की. कड़ी मेहनत, निरंतर अभ्यास और बारीक शिल्पकौशल के बल पर उन्होंने इस परंपरागत कला में विशेष महारत हासिल की. आज उनके बनाए आभूषण और कलाकृतियां देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंच रही हैं.

Thewa Art: पीएम मोदी के लिए तैयार किया गया खास ब्रोच
क्या है थेवा कला की खासियत?
थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ की करीब 400 वर्ष पुरानी पारंपरिक हस्तकला है. इस अनूठी कला में रंगीन कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने की बेहद महीन नक्काशी की जाती है. सोने की जटिल डिजाइन और रंगीन कांच का संयोजन इसे दुनिया की अन्य हस्तकलाओं से अलग पहचान देता है. इसी विशेषता के कारण थेवा कला को भारत की महत्वपूर्ण पारंपरिक कलाओं में गिना जाता है.
Mandsaur, Madhya Pradesh: Mandsaur-based Thewa Art artisan Rakesh Soni has created a special handcrafted brooch for Prime Minister Narendra Modi. Practicing the traditional Pratapgarh art form for nearly 25 years, Soni prepared the artwork following the growing recognition of… pic.twitter.com/HjmkUJw3OC
— IANS (@ians_india) June 23, 2026
ग्लोबल मंच पर पहुंची थेवा कला
हाल ही में थेवा कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब बड़ी पहचान मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्लोवाकिया यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को थेवा कला से बने विशेष कफलिंक्स भेंट किए. इन कफलिंक्स में रंगीन कांच पर सोने की बारीक नक्काशी की गई थी, जिसने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया. इसके बाद थेवा कला को लेकर देशभर में चर्चा और रुचि बढ़ी है.
पीएम मोदी के लिए बनाया विशेष ब्रोच
प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल' अभियान से प्रेरित होकर राकेश सोनी ने भी एक विशेष थेवा आर्ट ब्रोच तैयार किया है. इस ब्रोच में पारंपरिक थेवा कला की बारीक नक्काशी, भारतीय संस्कृति की झलक और वर्षों के अनुभव का समावेश किया गया है. राकेश सोनी की इच्छा है कि यह विशेष उपहार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचे, ताकि वे मंदसौर के इस कलाकार की कला और समर्पण को भी देख सकें.
एक सेट तैयार करने में लगते हैं तीन दिन
राकेश सोनी बताते हैं कि थेवा कला में अत्यधिक धैर्य और कौशल की आवश्यकता होती है. एक उत्कृष्ट थेवा सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लग जाता है. सोने की महीन डिजाइन को कांच पर उकेरने का कार्य पूरी तरह हाथ से किया जाता है, जिसमें छोटी सी चूक भी पूरी कलाकृति को प्रभावित कर सकती है. यही कारण है कि थेवा कला को बेहद जटिल और विशिष्ट शिल्प माना जाता है.
युवाओं को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती
राकेश सोनी का मानना है कि पारंपरिक कलाओं को संरक्षित रखने के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी जरूरी है. वे चाहते हैं कि युवा इस कला को सीखें और इसे आगे बढ़ाएं, ताकि आने वाले समय में भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत की यह अनमोल धरोहर जीवित रह सके.
'वोकल फॉर लोकल' से बढ़ा उत्साह
राकेश सोनी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिए जाने से देशभर के कलाकारों में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है. उनके अनुसार पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने से कलाकारों को सम्मान और नए अवसर दोनों प्राप्त हो रहे हैं.
भारतीय विरासत की जीवंत पहचान
थेवा कला केवल एक हस्तकला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत स्वरूप है. मंदसौर के राकेश सोनी जैसे शिल्पकारों के प्रयासों से यह कला आज स्थानीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक पहचान बना रही है. परंपरा और आधुनिकता के इस संगम ने थेवा कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
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