NDTV Ground Report: छत्तीसगढ़ के एमसीबी (MCB) जिले की ग्राम पंचायत मंगोरा का पहाड़पारा गांव विकास के सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता नजर आ रहा है. यहां की हकीकत किसी पिछड़े दौर की नहीं, बल्कि आज के समय की है, जहां साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रही. NDTV के कैमरे में कैद तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि खेतों के बीच पत्थरों से घिरा गड्ढेनुमा कुंड, जिसे स्थानीय लोग ढोढ़ी कहते हैं, ही पूरे पहाड़पारा के लिए पेयजल का एकमात्र सहारा बना हुआ है.
ढोढ़ी का गंदा पानी ही पीने की मजबूरी
यह ढोढ़ी कोई सुरक्षित जलस्रोत नहीं, बल्कि कीचड़, गंदगी और बदबू से भरा हुआ है. बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर किसी तरह इसमें पानी जमा किया गया है. न यहां कोई फिल्टर है और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था. बावजूद इसके, ग्रामीण इसी पानी को पीने, खाना बनाने और बच्चों की प्यास बुझाने के लिए मजबूर हैं.
महिलाओं के शब्दों में छलकता दर्द
ग्राउंड पर मौजूद महिलाओं से बात करें तो उनकी पीड़ा खुद-ब-खुद सामने आ जाती है. स्थानीय महिला हिमातिया बताती हैं कि मजबूरी में यही पानी पीना पड़ता है, कई बार इससे बदबू आती है, लेकिन दूसरा कोई विकल्प नहीं है. बच्चों को भी यही पानी देना पड़ता है. वहीं सरस्वती का कहना है कि गांव का हैंडपंप खराब पड़ा है और नल-जल योजना का कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला. बरसात खत्म होते ही पानी की स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे बीमारी फैलने का डर हर वक्त बना रहता है.
चुनावी वादे, हकीकत में गुम
लीलावती प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि चुनाव के समय नेता पानी की समस्या दूर करने के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में कोई गांव की सुध लेने नहीं आता. कई बार ग्रामीणों को दो से तीन किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है और मजबूरी में इसी दूषित ढोढ़ी के पानी से काम चलाना पड़ता है.
सालों पुरानी समस्या, नहीं मिला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि यह संकट आज का नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा है. कई बार शिकायतें की गईं, आवेदन दिए गए, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण हालात जस के तस बने हुए हैं. सरकारी योजनाएं यहां केवल कागजों और फाइलों तक सीमित नजर आ रही हैं.
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
NDTV की यह ग्राउंड रिपोर्ट सवाल उठाती है कि जब देश डिजिटल इंडिया और विकसित भारत की बात करता है, तब पहाड़पारा के ग्रामीण आज भी ढोढ़ी का गंदा पानी पीने को क्यों मजबूर हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल स्थायी और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की जाए, ताकि महिलाओं और बच्चों को इस नारकीय स्थिति से राहत मिल सके और साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए रोजाना संघर्ष न करना पड़े.
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