Anti-Naxal Operation Chhattisgarh: नक्सल विरोधी अभियान (Chhattisgarh Naxal Operation) के अंतिम चरण में सुरक्षा बलों को बड़ी उपलब्धि मिली है. बुधवार को छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 108 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण (Naxalite Surrender) कर दिया. सरकार द्वारा इन पर कुल 3.95 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था, जिसे देखते हुए यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सामूहिक नक्सली सरेंडर माना जा रहा है. इसके साथ ही समर्पित माओवादियों की निशानदेही में अब तक के सबसे बड़े माओवादी डंप की रिकवरी की गई है, इस डंप को भी आज समर्पण के दौरान पेश किया जाएगा.

Naxalite Surrender News: ऐसे हैं आंकड़ें
कई जिलों में एक साथ आत्मसमर्पण
अधिकारियों के अनुसार, सरेंडर करने वालों के आंकड़े जिलों के अनुसार इस तरह हैं.
- बीजापुर से 37,
- नारायणपुर से 4,
- बस्तर से 16,
- कांकेर से 3,
- सुकमा से 18,
- दंतेवाड़ा से 30 नक्सली शामिल हैं.
कितने का था इनाम?
इनमें से 22 नक्सलियों पर 8-8 लाख, 31 पर 5 लाख, 1 पर 3 लाख, 9 पर 2-2 लाख और 43 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था. अधिकारियों के मुताबिक, यह संख्या किसी भी अभियान में एक दिन में हुए सबसे बड़े आत्मसमर्पण में से एक है.
'नक्सल मुक्त भारत' मिशन को मिला बल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान' में यह सरेंडर अहम मील का पत्थर माना जा रहा है. भारत सरकार ने मिशन को पूरा करने की समयसीमा 31 मार्च 2026 तय की है. अंतिम डेडलाइन के पहले इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
इससे पहले महासमुंद में 15 माओवादी हुए थे सरेंडर
कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 15 माओवादी, जिनमें 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल थे, हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इन माओवादियों ने पुलिस को ये मिला.
- 3 एके-47 राइफल,
- 2 एसएलआर,
- 2 इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम (INSAS) राइफल सौंपी थीं.
यह समूह ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद समिति से जुड़ा था.
डीजी CRPF ने की थी FOB का दौरा
पिछले सप्ताह सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने छत्तीसगढ़ में कई फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) का दौरा किया था. उन्होंने जवानों को अभियान के अंतिम चरण के लिए तैयार रहने और ‘जीरो कैजुअल्टी' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी सावधानी बरतने के निर्देश दिए थे. उनका कहना था कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए छिपे हुए IED सबसे बड़ा खतरा हैं, इसलिए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन अनिवार्य है.
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