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MP सरकार किसानों को कृषि यंत्रों पर दे रही है सब्सिडी; अन्नदाता को स्वरोजगार, क्या है कस्टम हायरिंग योजना?

Custom Hiring Center: कस्टम हायरिंग केन्द्र से न केवल प्रतीक को आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी इसका बड़ा फायदा हुआ है. अब छोटे और सीमांत किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. वे उचित किराये पर समय पर यंत्र उपलब्ध होने से अपनी फसलों की बुवाई और कटाई समय पर कर पा रहे हैं.

MP सरकार किसानों को कृषि यंत्रों पर दे रही है सब्सिडी; अन्नदाता को स्वरोजगार, क्या है कस्टम हायरिंग योजना?
MP सरकार किसानों को कृषि यंत्रों पर दे रही है सब्सिडी; अन्नदाता को स्वरोजगार, क्या है कस्टम हायरिंग योजना?

Custom Hiring Scheme: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. वहीं कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगांवकलां के युवा किसान प्रतीक पाटील की है, जिन्होंने कड़ी मेहनत और सरकारी योजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल पेश की है. आइए जानते हैं उन्हें कैसे और किस योजना का लाभ मिला?

Custom Hiring Scheme: प्रतीक पाटिल

Custom Hiring Scheme: प्रतीक पाटिल

कैसे बदली प्रतीक की खेती?

प्रतीक पाटील एक किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता किसान हैं और प्रतीक कई वर्षों से उनके साथ खेती का काम कर रहे हैं. वे केला, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूं, प्याज जैसी विविध फसलों की खेती करते हैं. खेती करते समय प्रतीक ने महसूस किया कि गांवों में समय पर ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है. इस कारण किसानों को खेती में देरी होती है और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. इसी समस्या ने प्रतीक को कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने विचार किया कि अगर आधुनिक कृषि यंत्रों को किराये पर उपलब्ध कराया जाए, तो किसानों की परेशानी कम होगी और उन्हें समय पर खेती करने में मदद मिलेगी. यहीं से उनके मन में आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार शुरू करने का विचार आया.

कंप्यूटराइज्ड लॉटरी से मिला मौका

प्रतीक को कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित निजी कस्टम हायरिंग स्कीम की जानकारी सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से मिली. यह योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण साबित हुई. प्रतीक ने योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से उनका चयन हो गया. चयन होने के बाद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया.

कस्टम हायरिंग योजना से मिला स्वरोजगार Custom Hiring Scheme 

प्रतीक पाटील ने बताया कि इस योजना के तहत करीब 20.5 लाख रुपये की परियोजना लागत पर उन्हें बैंक ऋण स्वीकृत हुआ. इस राशि से उन्होंने अक्टूबर 2025 में “गुरुकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र” की स्थापना की. इस केन्द्र के माध्यम से उन्होंने ट्रैक्टर सहित आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीदी की और किसानों को किराये पर उपलब्ध कराना शुरू किया.

आज प्रतीक अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के करीब 40 किसानों को कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध करा रहे हैं. उनके केन्द्र से ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, चापकटर, सीड कम फर्टिलाइजर जैसे आधुनिक यंत्र मिलते हैं. बीते दो महीनों में ही प्रतीक ने करीब 2.6 लाख रुपये से अधिक का कार्य कर लिया है.

प्रतीक पाटील की सफलता यह साबित करती है कि यदि सही समय पर सही योजना का लाभ लिया जाए, तो ग्रामीण युवा भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं.

किसानों को भी हुआ सीधा फायदा Custom Hiring Scheme Benefits

कस्टम हायरिंग केन्द्र से न केवल प्रतीक को आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी इसका बड़ा फायदा हुआ है. अब छोटे और सीमांत किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. वे उचित किराये पर समय पर यंत्र उपलब्ध होने से अपनी फसलों की बुवाई और कटाई समय पर कर पा रहे हैं. इससे उनकी उपज बढ़ी है और खेती की लागत भी कम हुई है. प्रतीक बताते हैं कि शासन की इस योजना ने उन्हें स्वरोजगार दिया और गांव के अन्य किसानों को भी सशक्त बनाया है. उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं ग्रामीण युवाओं को खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती हैं. प्रतीक ने योजना का लाभ मिलने पर शासन और प्रशासन का आभार व्यक्त किया है.

क्या है कस्टम हायरिंग स्कीम? Custom Hiring Scheme Details

मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग स्कीम वर्ष 2012-13 से संचालनालय कृषि अभियांत्रिकी, मध्यप्रदेश के तहत संचालित की जा रही है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को किराये पर ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराना है, ताकि खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा मिले. यह योजना खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी है, जो महंगे कृषि उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं होते.

क्या लाभ मिलता है?

योजना के तहत ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्रों की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये तक निर्धारित है. सभी श्रेणियों के आवेदकों को लगभग 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है. चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और आवेदकों का चयन ऑनलाइन आवेदन के बाद कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से किया जाता है.

योजना के लिए जरूरी पात्रता क्या है? Custom Hiring Yojana Eligibility

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होना जरूरी है और कम से कम 12वीं पास होना अनिवार्य है. आवेदक के पास जमीन का कागज बी-1 या मूल निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और आरक्षित वर्ग के लिए जाति प्रमाण-पत्र होना चाहिए. इसके अलावा आवेदन के समय आवेदक को अपने नाम से 10,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी जमा करना होता है.

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