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'न ही समय मांगा, न ही सुनवाई को आगे बढ़ाने की अपील हुई'; OBC आरक्षण मामले में मोहन सरकार ने SC में ये कहा

OBC Reservation: मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार द्वारा पूरी तैयारी के साथ सशक्त पक्ष रखा जा रहा है. वहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कुछ तथ्यहीन और गलत रिपोर्टिंग को न्यायालय के समक्ष रखा.

'न ही समय मांगा, न ही सुनवाई को आगे बढ़ाने की अपील हुई'; OBC आरक्षण मामले में मोहन सरकार ने SC में ये कहा
OBC Reservation in MP: 'न ही समय मांगा, न ही सुनवाई को आगे बढ़ाने की अपील हुई'; OBC आरक्षण मामले में मोहन सरकार ने SC में ये कहा

OBC Reservation in MP: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) से जुड़े मामले में मोहन सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में प्रभावी और पूरी तैयारी के साथ पक्ष रखा. मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बताया कि 29 जनवरी 2026 को राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टैंडिंग कॉउंसल मृगांक एलकर, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेंद्र सिंह परमार, स्टैंडिंग कॉउंसल हरमीत सिंह रूपराह एवं शासकीय अधिवक्ता राजन चौरसिया सम्पूर्ण तैयारी के साथ न्यायालय में उपस्थित रहे. वहीं इस सुनवाई को लेकर प्रिंट और सोशल मीडिया में प्रसारित कुछ भ्रामक और तथ्यहीन रिपोर्ट्स की बात न्यायालय के संज्ञान में लायी गई.

कांग्रेस ने लगाया था ये आरोप

इस मामले में कांग्रेस ने कहा कि वह 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए प्रतिबद्ध थी और भाजपा सरकार उस फैसले को लागू नहीं करना चाहती. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि “भाजपा सरकार की नीयत ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने की है ही नहीं. आज सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर हुई सुनवाई में मोहन सरकार ने अपने वकील ही नहीं भेजे. मंशा साफ है कि प्रदेश के ओबीसी समाज को जो 27% आरक्षण कांग्रेस पार्टी ने दिया था, उसे भाजपा सरकार लागू नहीं करना चाहती. बीते 7-8 सालों में भाजपा ने ओबीसी आरक्षण रोकने के लिए जनता के कई करोड़ रुपये वकीलों पर खर्च किए, उनके आने जाने के लिए चार्टर प्लेन मुहैया करवाए, फिर भी उनके वकील आज सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंचे. डॉ मोहन यादव जी, पूरा मध्य प्रदेश आज देख रहा है कि आप किस तरह ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय कर उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं. आपको और शिवराज सिंह चौहान जी को ओबीसी वर्ग के साथ हुए अन्याय के लिए आज हाथ जोड़कर पूरे प्रदेश से माफी मांगनी चाहिए और जो 27% आरक्षण कमलनाथ जी के मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस सरकार ने दिया था, उसे तत्काल लागू करना चाहिए.”

मप्र सरकार ने कहा- उच्चस्तरीय कानूनी टीम ने पेश किया पक्ष

राज्य सरकार की ओर से 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज, स्टैंडिंग काउंसल मृगांक एलकर, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेंद्र सिंह परमार, स्टैंडिंग काउंसल हरमीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता राजन चौरसिया पूरी तैयारी के साथ उपस्थित रहे. सरकार ने न तो समय मांगा और न ही सुनवाई आगे बढ़ाने का कोई अनुरोध किया, जिससे स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार इस मामले को शीघ्र और प्रभावी रूप से आगे बढ़ाना चाहती है.

अब 4 फरवरी को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की बेंच सिर्फ इसी सप्ताह के लिए गठित की गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की विस्तृत सुनवाई 4 फरवरी 2026 को की जाएगी. राज्य सरकार ने बताया कि वह इस सुनवाई के लिए सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं के साथ तैयार है.

भ्रामक रिपोर्टिंग पर ASG ने जताई आपत्ति

शुक्रवार 30 जनवरी को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने मीडिया में आई कुछ तथ्यहीन और गलत रिपोर्टिंग को न्यायालय के संज्ञान में लाया. उन्होंने कहा कि विचाराधीन मामलों पर मीडिया के सामने पार्टी प्रवक्ता की तरह प्रस्तुतियां देना न्यायालय की गरिमा के खिलाफ है. ASG नटराज ने विशेष रूप से आपत्ति जताई कि "मीडिया में संबंधित एडवोकेट द्वारा सरकारी अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति बताई गई और माननीय न्यायाधीशों के नामों का उल्लेख भी अनुचित तरीके से किया गया. उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि ऐसी स्थिति में समग्र निर्देश जारी किए जाएं ताकि कोर्ट की गरिमा और प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके."

सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते लेगा मुद्दे पर निर्णय

न्यायालय ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि 4 फरवरी 2026 की सुनवाई के दौरान इस विषय पर विस्तृत रूप से विचार किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उचित निर्देश जारी किए जाएंगे.

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