भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सीबीआई के मुताबिक 34 साल की पूर्व मिस पुणे ट्विशा की मौत हत्या नहीं बल्कि खुदकुशी थी. सीबीआई ने साफ किया है कि लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ही उसने यह खौफनाक कदम उठाया. सीबीआई की 30 पन्नों की यह चार्जशीट उस आखिरी रात का मिनट-दर-मिनट ब्योरा पेश करती है, जिसमें सबसे दिल दहला देने वाला सच सामने आया है. मौत से ठीक पहले ट्विशा ने अपनी भाभी को एक खौफनाक मैसेज भेजा— "उससे कहना कि अपनी पत्नी की डेड बॉडी ले जाए, लेकिन कल. मुझे अभी शांति से मरने दो." चार्जशीट में मिनट-दर-मिनट की सीसीटीवी टाइमलाइन, दर्दनाक व्हाट्सएप मैसेजेस, कॉल रिकॉर्डिंग्स, काउंसलिंग रिपोर्ट्स, 20 लाख रुपये के वित्तीय विवाद और गर्भावस्था समाप्त करने को लेकर हुए गंभीर प्रताड़ना के वो सारे पहलू दर्ज हैं, जिन्होंने एक हंसती-खेलती लड़की को ऐसा खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर किया. फिलहाल एजेंसी ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ प्रताड़ना और खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है.
आखिरी 90 मिनट की खौफनाक टाइमलाइन
सीबीआई की जांच उस रात 9:20 बजे से शुरू होती है, जब ट्विशा ने अपनी भाभी राशि को फोन किया. वह फूट-फूटकर रो रही थी. उसने बताया कि पीठ में दर्द के कारण उसने पति समर्थ को दूसरे कमरे में सोने को कहा, तो वह बेहद हिंसक और आक्रामक हो गया. 9:29 बजे दोबारा फोन आया लेकिन ट्विशा की हिचकियों की वजह से आगे बात नहीं हो सकी.

इसके ठीक सात मिनट बाद, यानी रात 9:36 बजे उसने वह आखिरी मैसेज भेजा कि "मुझे शांति से मरने दो." सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक रात 9:40 बजे ट्विशा अकेली सीढ़ियां चढ़कर छत की तरफ जाती दिखी. 9:41 बजे उसने अपने पिता को रोते हुए कॉल किया और कहा कि समर्थ बहुत आक्रामक हो गया है, आप लोग तुरंत आ जाइए. 10:05 बजे उसने यही बात मां से दोहराई और फोन कट गया.
छत पर सुगबुगाहट, एम्स में मौत की पुष्टि और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
बेटी के रोने से घबराई मां ने समर्थ और ट्विशा को लगातार फोन मिलाए, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. रात 10:10 बजे मां ने सास गिरिबाला को फोन कर ट्विशा को देखने को कहा. रात 10:16 बजे गिरिबाला अपने कमरे से निकलकर नीचे ट्विशा के कमरे में गईं और 10:18 बजे उसे कॉल किया. 10:21 बजे गिरिबाला ने समर्थ को फोन किया और 10:23 बजे दोनों सीसीटीवी में छत की तरफ जाते दिखे. इसके बाद ट्विशा को नीचे लाकर एम्स भोपाल ले जाया गया. जहां 10:55 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. बता दें कि एम्स भोपाल के पहले पोस्टमार्टम पर परिवार ने सवाल उठाए थे, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को दोबारा पोस्टमार्टम किया. इस रिपोर्ट ने साफ किया कि मौत फांसी लगाने से दम घुटने के कारण हुई है और शरीर पर किसी तरह के मारपीट या हाथापाई के निशान नहीं हैं.

ऑनलाइन मुलाकात, शादी और प्रताड़ना की शुरुआत
चार्जशीट के ही मुताबिक फरवरी 2025 में एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए ट्विशा और समर्थ की मुलाकात हुई थी और 9 दिसंबर 2025 को दोनों ने शादी कर ली. सीबीआई का आरोप है कि शादी के बाद से ही समर्थ ट्विशा के पुराने रिश्तों को लेकर उस पर अनैतिक और अपमानजनक टिप्पणियां करने लगा था. जब भी ट्विशा इसकी शिकायत अपनी सास से करती, तो गिरिबाला सिंह हमेशा अपने बेटे का ही पक्ष लेती थीं. मार्च 2026 में जब त्विशा अपने पिता के हार्ट अटैक के बाद उनके इलाज के लिए उनके पास रुकी थी, तब भी दोनों आरोपियों ने उस पर भोपाल लौटने का भारी दबाव बनाया, जिसके बाद वह 24 मार्च को वापस लौट आई थी.

अनचाही प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन का दबाव और 'कातिल' का ताना
16 अप्रैल को ट्विशा को अपनी गर्भावस्था के बारे में पता चला. लेकिन वैवाहिक रिश्तों में तनाव के कारण वह इस बच्चे को जन्म देने को लेकर असमंजस में थी. 17 अप्रैल को इस बात पर विवाद बढ़ा और समर्थ के बुरे व्यवहार से तंग आकर ट्विशा मायके चली गई. बाद में भोपाल लौटने पर 30 अप्रैल को उसे पैनिक अटैक आया और उसे मनोरोग चिकित्सक के पास ले जाया गया. 6 मई को उसने अपनी पुरानी नौकरी फिर से जॉइन करने का ऑफर स्वीकार किया और उसी दिन प्रेग्नेंसी खत्म करने की पहली दवा ली.
9 मई को समर्थ ने यह तक कह दिया कि यह बच्चा उसका है भी या नहीं, जिसके बाद ट्विशा ने अपनी मां को मैसेज लिखा— "मेरा अब दम घुट रहा है यहां."
20 लाख की शेयर पूंजी और जासूसी का खौफ
चार्जशीट के मुताबिक पति-पत्नी के इस विवाद के बीच पैसों का एंगल भी बेहद अहम था. ट्विशा के डिमैट अकाउंट में करीब 20 लाख रुपये के शेयर थे. आरोप है कि समर्थ और उसकी मां लगातार ट्विशा पर दबाव बना रहे थे कि वह यह पैसा 7 अप्रैल को खोले गए उनके ज्वाइंट अकाउंट में ट्रांसफर कर दे ताकि समर्थ इसे चीनी शेयर बाजार में लगा सके. ट्विशा ने यह कहते हुए मना कर दिया था कि यह पैसा उसके पिता का है. मौत वाले दिन यानी 12 मई की शाम 7:51 बजे भी ट्विशा ने अपनी भाभी को फोन कर इस वित्तीय दबाव के बारे में भी बताया था. इसके अलावा ट्विशा के पूर्व बॉस अमित दास ने सीबीआई को बताया कि ट्विशा अक्सर पार्क में टहलते हुए उनसे बात करती थी क्योंकि उसे लगता था कि घर पर उस पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसके फोन ट्रैक हो रहे हैं.
ट्रेन टिकट, काउंसलिंग और आखिरी उम्मीद की टूटती डोर
चार्जशीट के मुताबिक 12 मई की सुबह ट्विशा ने इस नर्क से निकलने का फैसला कर लिया था. उसने अपनी मां से 3,000 रुपये मांगे ताकि वह राजस्थान के नासिराबाद जाने के लिए ट्रेन टिकट बुक करा सके. पिता ने पैसे भेजे और उसने टिकट बुक भी करा लिया. लेकिन जब समर्थ को पता चला कि वह जा रही है, तो वह मैरिज काउंसलिंग के लिए तैयार हो गया. सुबह 11:30 बजे दोनों डॉक्टर काकोली रॉय के पास गए. वहां समर्थ ने उल्टा ट्विशा के व्यवहार की शिकायत की और कबूला कि दोनों गांजा (मैरिजुआना) का सेवन करते हैं. डॉक्टर ने समर्थ को अपनी पत्नी की बात ध्यान से सुनने और उसे वक्त देने की सलाह दी. दोपहर 1 बजे घर लौटने के बाद ट्विशा 3:11 बजे पार्लर गई और 6:11 बजे लौटी. शाम को जब समर्थ और उसकी मां बाहर टहल रहे थे, तो ट्विशा ने उनके साथ चलने की कोशिश की लेकिन दोनों ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. इसके बाद ट्विशा ने अपनी मां को फोन करके कह दिया कि अब इस शादी में कुछ नहीं सुधर सकता और उसने भोपाल हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना लिया, लेकिन रात होते-होते मानसिक दबाव इस कदर बढ़ा कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया.
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जांच अभी जारी: आईफोन, सीसीटीवी और दहेज का एंगल
बता दें कि सीबीआई ने भले ही 30 पन्नों की प्राथमिक चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी हो, लेकिन जांच के कई दरवाजे अभी खुले हैं. ट्विशा के प्राइमरी आईफोन से फॉरेंसिक डेटा का विश्लेषण होना अभी बाकी है, जिससे कई नए सबूत और व्हाट्सएप चैट सामने आने की उम्मीद है. घर के सीसीटीवी के डीवीआर को दिल्ली सीएफएसएल भेजा गया है ताकि यह जांचा जा सके कि फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं हुई. समर्थ और उसकी मां के वॉयस सैंपल भी मिलान के लिए भेजे गए हैं. इसके अलावा सीबीआई ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193(9) के तहत मामले में दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के एंगल से आगे की जांच जारी रखने की अनुमति अदालत से मांगी है.
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