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एसी फर्स्ट क्लास में ‘जंगली कारोबार’! यूपी से एमपी तक कछुओं की तस्करी, विदेशों तक जुड़े हैं तार 

एसी फर्स्ट क्लास में ‘जंगली कारोबार’ का खुलासा. मध्य प्रदेश STSF, RPF और भोपाल वन मंडल ने 19322 पटना–इंदौर एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास बोगी से 311 दुर्लभ कछुए बरामद किए.

एसी फर्स्ट क्लास में ‘जंगली कारोबार’! यूपी से एमपी तक कछुओं की तस्करी, विदेशों तक जुड़े हैं तार 

Turtle Trafficking in Train 2026: भारत की नदियों से निकाले गए दुर्लभ और संकटग्रस्त कछुए, ट्रेन की एसी फर्स्ट क्लास की आलीशान बोगियों में छिपाकर मध्य प्रदेश के रास्ते गुजरात-महाराष्ट्र होते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाए जा रहे हैं. ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह तस्करी नेटवर्क सिर्फ अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कड़ियों से भी जुड़ा हो सकता है. जांच एजेंसियों को पहले की कार्रवाईयों में चीन, हांगकांग, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया और बांग्लादेश तक के लिंक मिले थे. अब ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर इस संगठित सिंडिकेट की परतें उधेड़ दी हैं.

मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और भोपाल वन मंडल की संयुक्त कार्रवाई में 19322 पटना-इंदौर एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास बोगी से 311 दुर्लभ और संकटग्रस्त कछुए बरामद किए. यह कार्रवाई भोपाल के संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पर की गई.

एसी फर्स्ट क्लास कोच अटेंडेंट की भूमिका 

चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे रैकेट में एसी फर्स्ट क्लास के कोच अटेंडेंट की भूमिका सामने आई है. कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत को मौके से पकड़ा गया, जो कथित रूप से इस तस्करी नेटवर्क के लिए ‘कूरियर' का काम कर रहा था. जब्त कछुओं में क्राउन रिवर टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल जैसी संरक्षित प्रजातियां शामिल हैं.

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के गंगा और गोमती नदी के किनारे सक्रिय था. लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, सुल्तानपुर और अमेठी के नदीय क्षेत्रों से कछुओं को पकड़कर ट्रेनों के जरिए मध्यप्रदेश भेजा जाता था. यहां से इन्हें आगे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता जिनमें एमपी, गुजरात और महाराष्ट्र के खरीदार शामिल थे.

17 साल का किशोर गिरफ्तार

जांच टीम ने लखनऊ से 17 साल छह महीने के एक किशोर को हिरासत में लिया है. सूत्रों के मुताबिक यह किशोर अपने चाचा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर नदी किनारे से कछुओं की सप्लाई करता था.

पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड पश्चिमी मध्यप्रदेश के देवास जिले का आसिफ खान बताया गया है. कुछ दिनों तक गिरफ्तारी से बचने के बाद उसे 10 फरवरी को देवास से पकड़ लिया गया. अदालत में पेश करने के बाद उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का दावा है कि उससे पूछताछ के बाद इस नेटवर्क के अन्य खिलाड़ियों तक भी पहुंच बनाई जाएगी.

ट्रेन से वन्यजीवों की तस्करी का इतिहास

  • यह पहली बार नहीं है जब ट्रेनें वन्यजीव तस्करी का माध्यम बनी हों. अक्टूबर 2023 में ‘ऑपरेशन कच्छप' के तहत डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने नागपुर, भोपाल और चेन्नई में एक साथ कार्रवाई कर 955 जिंदा गैंगेटिक कछुए बरामद किए थे. उस समय छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था.
  • दो साल पहले भी यशवंतपुर एक्सप्रेस से दुर्लभ कछुओं की तस्करी करते एक गिरोह को पकड़ा गया था. तभी से एजेंसियों को एक बड़े सिंडिकेट की आशंका थी, जो अब लगभग सच साबित होती दिख रही है.
  • 2021 में सागर की विशेष अदालत ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े 13 शिकारियों को कछुओं और पैंगोलिन की तस्करी के मामले में सात साल की सजा सुनाई थी. इसके बावजूद अवैध व्यापार का यह काला कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा.

कछुओं का शिकार, तस्करी और व्यापार गैरकानूनी 

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित कछुओं का शिकार, तस्करी और व्यापार गैरकानूनी है. दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा और न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है.

चंबल के इकोसिस्टम के लिए जरूरी हैं कछुए

विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा और चंबल बेसिन में पाए जाने वाले ये कछुए नदी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद अहम हैं. इनका अवैध शिकार न सिर्फ जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि नदियों के प्राकृतिक संतुलन को भी बिगाड़ रहा है. 

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