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10वीं के नतीजे पर मिले ताने, लोगों ने कहा नहीं बनेगा भविष्य, फिर UPSC क्रैक कर IAS बने कुलदीप शर्मा, जानिए इंस्पायरिंग जर्नी

कुलदीप शर्मा की पहली पोस्टिंग दंतेवाड़ा में हुई, वहां शानदार काम कर कमाल दिखाया है. इसके बाद अलग अलग जिलों में पोस्टिंग हुई. इस दौरान उन्होंने कई नवाचार किए...

10वीं के नतीजे पर मिले ताने, लोगों ने कहा नहीं बनेगा भविष्य, फिर UPSC क्रैक कर IAS बने कुलदीप शर्मा, जानिए इंस्पायरिंग जर्नी
IAS Kuldeep Sharma: सेकंड डिवीजन पर उड़ाया गया मजाक, फिर बने IAS अधिकारी

IAS Kuldeep Sharma: छत्तीसगढ़ में IAS अधिकारी (IAS Officer) कुलदीप शर्मा अपनी कार्यशैली और नवाचारों के लिए लगातार सुर्खियों में रहते हैं. दंतेवाड़ा से लेकर बलौदा बाजार तक... जहां भी पोस्टिंग मिली वहां उन्होंने नई मिशाल पेश की. दरअसल, कुलदीप शर्मा को IAS बनने की प्रेरणा 10वीं में सेकंड डिवीजन से पास होने के बाद मिली. लोगों के तानों को उन्होंने चुनौती के रूप में स्वीकार किया और उसी जज़्बे के साथ UPSC जैसी कठिन परीक्षा की राह चुन ली.

2014 में बने IAS अधिकारी

साल 2010 में उनका चयन इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस (IDAS) के पद पर हुई... फिर साल 2012 में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के पद पर चयन हुआ. वहीं तीसरे प्रयास में 2014 में यूपीएससी परीक्षा में कुलदीप शर्मा IAS अधिकारी बने.

कुलदीप शर्मा की जहां भी पोस्टिंग हुई, वहां शानदार काम कर कमाल दिखाया है. पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई नवाचार किए और उनके द्वारा आज भी किया जा रहा है... स्वास्थ्य, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कुपोषण, आंगनवाड़ी, पर्यटन आदि पर उनका फोकस है. 

2014 बैच के IAS अधिकारी हैं कुलदीप शर्मा

आईएएस कुलदीप शर्मा का जन्म 15 अप्रैल 1988 को हुआ और मूलतः उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं. उनके पिता मोहनश्याम शर्मा टीचर थे, जबकि मां गीता देवी गृहिणी हैं. बता दें कि कुलदीप शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2014 बैच के अधिकारी हैं. प्रशिक्षण के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ. फरवरी 2026 से वह बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले वह शिक्षा विभाग में प्रबंध संचालक (MD), नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food & Drug Controller) और रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. आइए जानते हैं उनके जीवन, शिक्षा और प्रशासनिक सफर के बारे में... 

10वीं के नतीजे पर मिले ताने

कुलदीप शर्मा ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से पूरी की. 10वीं में उन्हें सेकंड डिवीजन मिला, जिसके बाद लोगों ने उनके भविष्य को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां कीं. हालांकि, उन्होंने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा बना लिया. इसके बाद उन्होंने हरियाणा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा दी और शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया. फिर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक्स) में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहे.

तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद कुलदीप शर्मा ने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2010 में उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस (IDAS) जॉइन की. हालांकि उनका लक्ष्य IAS बनना था, इसलिए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी. इसके बाद वर्ष 2012 में वह दोबारा UPSC परीक्षा में शामिल हुए और इस बार इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के लिए चयनित हुए, लेकिन उनका सपना अभी भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाने का था इसी संकल्प के साथ उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया और वर्ष 2014 में UPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर आखिरकार IAS बनने का अपना सपना पूरा कर लिया.

यहां हुई थी पहली पोस्टिंग

अकादमी की ट्रेनिंग पूरी करने बाद कुलदीप शर्मा ने छत्तीसगढ़ कैडर चुना. इस उनकी पहली पोस्टिंग 2015-16 के दौरान दंतेवाड़ा में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई. यहां हुए स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के ऑफिशियल इंचार्ज के रूप में काम किया. इस दौरान 2016 में उन्होंने उस समय के सुविधाओं से वंचित कुआकोंडा ब्लॉक के अंदरूनी गांव में 4 दिवसीय हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसमें मुंबई, रायपुर और अन्य शहरों से डॉक्टर को शामिल कर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य की जांच कराई. कैंप खत्म होने के बाद कोंडागांव के उसी उस मार्ग पर ही माओवादियों ने विस्फोट कर सीआरपीएफ की गाड़ी उड़ा दी थी, जिसमें सात जवानों की शहादत हो गई थी.

दंतेवाड़ा में दिखाया कमाल

कुलदीप शर्मा ने NDTV को बताया कि जिस अस्पताल में कैंप लगाए थे, उसी अस्पताल में जब घटना के बाद वे पहुंचे थे तो घटना की भयावता इतनी अधिक थी कि शहीद जवानों को पहचानना मुश्किल था. दंतेवाड़ा में उन्होंने विकास के साथ अपेक्षाएं और विरोध भी देखा. सही काम करने पर विश्वास बनते देखा. दंतेवाड़ा के मुख्यमार्ग जो संकरी गली थी उसपर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया और सड़क चौड़ीकरण किया साथ ही तालाब सौंदर्यीकरण कराया. शर्मा बताते हैं कि चुनौतीपूर्ण जगह पर काम करने की ललक उन्हें दंतेवाड़ा से मिली. यहां के अरनपुर गांव में उन्होंने पहली बार गंभीर कुपोषित बच्चा देखा, जिसे सिर्फ किताबों में पढ़े थे. स्वास्थ्य से ही सही जीवन शुरू होता है इसलिए उनका ध्यान स्वास्थ्य पर गया. दौरान उनकी प्रमुख पर स्वास्थ्य विभाग रहा.

पहली बार हुई एसडीएम की पोस्टिंग

इसके बाद साल 2026 में कुलदीप शर्मा की पोस्टिंग जशपुर जिले के बगीचा में एसडीएम के रूप में हुई. शर्मा बताते हैं कि यह बहुत ही सुंदर और खुशहाल जगह है, जहां टाऊ की खेती होती है. टाऊ से बनने वाले विभिन्न व्यंजन अब भी उन्हें याद हैं... खासकर हलवा और पराठा. राजपुरी वॉटरफॉल, पंडरापाठ जैसे जगह पर्यटन के लिए यहां बहुत खूबसूरत हैं. उन्होंने NDTV को बताया कि बगीचा में पहाड़ी कोरवा जनजाति बाहुल्य वाले क्षेत्र में लोगों की समस्या आवास, स्वास्थ्य और प्रमाण पत्र का नहीं होना था. इसे ध्यान में रखते हुए यहां की पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों के लिए आवास, स्वास्थ्य शिविर और जातिनिवास प्रमाण पत्र का वितरण करवाया. इसके बाद जिला पंचायत जशपुर के सीईओ का प्रभार मिला. 

इसलिए मिला राष्ट्रीय अवॉर्ड

सितंबर 2017 में जिला पंचायत जशपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में उनकी पोस्टिंग हुई. कुलदीप शर्मा कहते हैं कि जिस तरीके से घर में उत्तर पूर्व का कोना महत्वपूर्ण है, उसी तरह छत्तीसगढ़ का उत्तर पूर्व में जशपुर बहुत ही बेहतर जिला है. यहां लगभग 35000 प्रधानमंत्री आवास बनवाए. इस दौरान उन्होंने मनरेगा में विशेष फोकस कर कार्य कराया, जिसके लिए राष्ट्रीय अवॉर्ड 2018 से सम्मानित किया गया. यहां रहते हुए 2018 का चुनाव कराया.

कुलदीप शर्मा ने NDTV से बातचीत में बताया कि जशपुर जिले में उनकी तैनाती के दौरान वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उस समय केंद्र सरकार में राज्य मंत्री थे. वह जिले से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लेते थे तथा समय-समय पर प्रशासन को मार्गदर्शन भी देते थे. कुलदीप शर्मा ने कहा कि उस दौरान विशेष रूप से विशेष संरक्षित जनजातीय समूहों के विकास और जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया. इसी दिशा में कई विकासात्मक पहल शुरू की गईं. इसी दौरान जशपुर जिले में काजू की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम शुरू कराया गया, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला.

सरगुजा में SDM बनकर आए... फिर सीईओ का प्रभार संभाला 

2019 में कुलदीप शर्मा को सरगुजा एडीएम बनाया गया. हालांकि बाद में सीईओ जिला पंचायत का कार्यभार सौंपा गया. इस दौरान स्वच्छ भारत मिशन, पीएम आवास और गौठान योजना पर काम किया. साथ ही जब कोरोना भारत में शुरू हुआ और लोग संक्रमित होने लगे, इस दौरान मैनपाट में हथकरघा उद्योग और महिला समूहों के माध्यम से सैनिटाइजर के निर्माण का काम शुरू कराया गया.

कोविड-19 महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने गृह जिलों में लौटे और बेरोजगारी की समस्या का सामना करने लगे, तब कुलदीप शर्मा ने मनरेगा के तहत सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराते हुए उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का काम किया. इस पहल से लौटे हुए श्रमिकों को आर्थिक संबल मिला और संकट के दौर में उनकी आजीविका सुनिश्चित हो सकी. उनके कार्यों को देखते हुए नवंबर 2020 में उन्हें रायपुर नगर व ग्राम निवेश क्षेत्र विकास प्राधिकरण (NRDA) और रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) का अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (Additional CEO) नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने शहरी विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी संभाली.

कोरबा में प्लास्टिक वेस्ट से बनवाया सड़क 

2021 में वे कोरबा नगर निगम आयुक्त बनाकर पहुंचे. इस दौरान कोरबा के विभिन्न चौक चौराहा में गार्डनिंग का काम करने के साथ ही सड़कों पर तिरंगा लाइट लगवाने का काम करवाया. साथ ही दर्री रोड के काम को पूरा करवाया. कुलदीप शर्मा ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (Plastic Waste Management) के क्षेत्र में नवाचार करते हुए प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग कर सड़कों का निर्माण कराया. उनकी इस पहल ने न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया, बल्कि कचरे के प्रभावी निस्तारण का भी समाधान प्रस्तुत किया.

इस दौरान कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे थे और वैक्सीनेशन अभियान भी शुरू हो चुका था. ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने एक ओर विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखी ताकि लोगों को रोजगार मिलता रहे, वहीं दूसरी ओर टीकाकरण अभियान को गति देने और कोरोना मामलों की लगातार निगरानी करने पर भी विशेष ध्यान दिया. 

अविभाजित कोरिया जिले के अंतिम कलेक्टर रहे IAS कुलदीप शर्मा 

16 जनवरी 2022 को कुलदीप शर्मा को कोरिया जिले के कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई. वह अविभाजित कोरिया जिले के अंतिम कलेक्टर रहे. दरअसल, बाद में कोरिया जिले से अलग कर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) को स्वतंत्र जिला बनाया गया. कुलदीप शर्मा के अनुसार, कोरिया जिला भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से काफी विविधताओं वाला क्षेत्र है.  भरतपुर और सोनहत जैसे दूरस्थ इलाकों की जिला मुख्यालय से अधिक दूरी होने के कारण उन्होंने इन क्षेत्रों की विशेष निगरानी और नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया, ताकि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके.

कुपोषित बच्चे के लिए शुरू की ये पहल

कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने एक पहल शुरू की. इसके तहत प्रत्येक कुपोषित बच्चे के घर सहजन और पपीते के पांच-पांच पौधे लगाए गए. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें प्राकृतिक रूप से कैल्शियम, आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें. इस कदम ने पोषण सुधार के साथ-साथ परिवारों को पौष्टिक खाद्य संसाधन उपलब्ध कराने में भी मदद की.

बता दें कि इन पौधों के नाम भी रखे गए थे और कार्ड भी बनाए गए थे. साथ ही इन पौधों के देखरेख के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए थे जो हर तीन माह में जाकर पौधों को की जांच करते थे कि पौधों का कितना ग्रोथ हुआ है.  यह अभियान बच्चों की ग्रोथ को लेकर था, ताकि बच्चों का सही विकास हो सके और वह कुपोषण से दूर हो सकें. 

पर्यटकों के लिए बनाया गया आकर्षण का केंद्र

कोरिया जिले के कलेक्टर रहते हुए कुलदीप शर्मा ने पर्यटन विकास को नई दिशा देने का काम किया. उनके कार्यकाल में झुमका जलाशय में पहली बार जेट स्की और मोटर बोट की सुविधा शुरू की गई, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला. इसके साथ ही झुमका में एक आइलैंड भी विकसित किया गया, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पहल की.  जिले में महिलाओं में व्याप्त एनीमिया की समस्या को देखते हुए ‘एनीमिया मुक्त कोरिया अभियान' चलाया गया. इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम, जागरूकता बढ़ाने तथा उनके स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाना था.

बालोद में पोषण सुधार के लिए कुलदीप शर्मा की अनूठी पहल 

अक्टूबर 2022 में कुलदीप शर्मा को बालोद जिले के कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई. यहां उन्होंने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए ‘सुपोषित बचपन अभियान' की शुरुआत की. इस अभियान के माध्यम से कुपोषण की समस्या को कम करने और बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष प्रयास किए गए. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तांदुला क्षेत्र के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया. वहीं, स्थानीय किसानों और लोगों के बीच मोटे अनाज (मिलेट) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बालोद मिलेट कैफे' की शुरुआत की गई.

बालोद में कलेक्टर रहते हुए कुलदीप शर्मा ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन भी किया. इसके अलावा ‘एनीमिया मुक्त बालोद' अभियान चलाकर महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की समस्या को कम करने का प्रयास किया गया. साथ ही कुपोषण उन्मूलन के लिए विभिन्न जनहितकारी योजनाओं और नवाचारों पर प्रभावी ढंग से काम किया गया.

जनवरी 2024 में उन्हें शिक्षा विभाग में एमडी के साथ फूड एंड ड्रग का कंट्रोलर बनाया गया. साथ ही कोऑपरेटिव सोसाइटी के रजिस्टर भी बने. कंट्रोलर फूड ड्रग रहते हुए उन्होंने लोगों को अच्छा खाना मिले इसके लिए रायपुर में संचालित होने वाले कई बड़े ब्रांड के कैफे में टीम भेजी और छापा मरवाया, इस दौरान वे तब सुर्खियों में आ गए... जब लोकल पनीर, कई बार उपयोग होने वाले तेल से बनने वाले खाद्य पदार्थों को बंद कराया. साथ ही ड्रग और दवाइयों पर कार्रवाई की गई. राज्य में नई सरकार बनने के बाद सहकार से समृद्धि के तहत नई समितियों का गठन किया गया. इस दौरान 525 नई समितियों का गठन करने के साथ ही नवीन गोदाम का निर्माण करवाया गया साथ ही 2058 समितियां को कंप्यूटराइजेशन किया गया. अब तक समितियां पारंपरिक काम करती थी, इसलिए उन्हें सीएचसी, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, माइक्रो एटीएम जैसे काम भी दिए गए. माइक्रो एटीएम का काम सोसाइटियों को मिलने के बाद अगस्त 2024 से मार्च 2025 तक 100 करोड रुपए से अधिक का ट्रांजैक्शन हुआ.

बलौदा बाजार कलेक्टर के रूप में संभाला पदभार 

28 फरवरी 2026 को IAS कुलदीप शर्मा ने बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया. यहां पदस्थापना के बाद उन्होंने गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के लिए ‘सुपोषित बचपन अभियान' को गति दी. अभियान का उद्देश्य जिले में कुपोषण की समस्या को कम करना और बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना है. कुपोषण से गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया जा रहा है, ताकि उन्हें विशेष देखभाल और संतुलित पोषण मिल सके. 

इसके लिए एवं बाल विकास के साथ ही हेल्थ विभाग आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका की ड्यूटी लगाई गई है. कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जा रहा है, वहीं माताओं को बच्चों के उचित खान-पान, पोषण और देखभाल के बारे में जागरूक करने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसके अलावा सुपोषित लड्डू भी दिया जा रहा है और हर तीन माह में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर उनके स्वास्थ्य पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है.

पानी संरक्षण के लिए किए ये कार्य

कलेक्टर बलौदा बाजार रहते हुए शर्मा ने मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत 250000 संरचनाओं का निर्माण कराया है. जिससे वर्तमान में बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में बारिश का पानी संरक्षित हो रहा है. मिशन उत्कर्ष अभियान चलाकर शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय स्कूलों में डीएमएफ मद से 450 शिक्षक रखे गए हैं, जिस पर 3 करोड़ से अधिक राशि का खर्च किया जा रहा है. साथ ही विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की जिन स्कूलों में कमी है उन स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए वर्चुअल क्लासेस की व्यवस्था की गई है. दसवीं और बारहवीं बोर्ड के छात्रों के लिए हर महीने टेस्ट की व्यवस्था की गई है ताकि जिले के परिणाम को सुधारा जा सके. IAS कुलदीप शर्मा कहते हैं कि शासन की सभी में बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचाना ही अंतिम लक्ष्य है.

बलौदाबाजार में इन कार्यों पर फोकस

कलेक्टर शर्मा ने आगे बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन कर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ साथ उसका लाभ सभी को मिले, यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है. शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता पर रखना, किसानों के समग्र विकास पर फोकस रखना, औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण बलौदा बाजार जिले के उद्योग का विकास और स्थानीय रोजगार, आधारभूत संरचना को मजबूत करना ही उनका लक्ष्य है. स्थानिक बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए 'हम होंगे कामयाब 2.0' प्लेटफार्म की शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के माध्यम से की गई है, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा दीगर राज्यों की कंपनियों को भी जोड़कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की पहल की जा रही है.

‘हौसलों की उड़ान' नामक पहल की शुरुआत

इसके अलावा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और पुनर्वास के लिए ‘हौसलों की उड़ान' नामक पहल शुरू करने की योजना बनाई गई है. इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके लिए आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में उन्हें रोजगार और पुनर्वास संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े.

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