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करोड़ों की खरीद, गंभीर धाराएं, दस्तावेज जब्त... फिर भी पद पर DEO, क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

सिंगरौली में शिक्षा विभाग से जुड़ा करोड़ों रुपये का कथित घोटाला सामने आया है. लोकायुक्त रीवा ने जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई अफसरों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दस्तावेज जब्त किए हैं. इसके बावजूद आरोपी अधिकारी अब भी पद पर बने हैं.

करोड़ों की खरीद, गंभीर धाराएं, दस्तावेज जब्त... फिर भी पद पर DEO, क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

Singrauli DEO Corruption Case: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा और गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. लोकायुक्त संगठन, रीवा संभाग ने करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रभारी शिक्षा अधिकारी (DEO) सहित कई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर प्रकरण दर्ज होने, दस्तावेज जब्त होने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कठोर धाराएं लगने के बावजूद अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है. आरोपी अधिकारी आज भी अपने-अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह पूरा मामला चितरंगी निवासी संतोष कुमार की शिकायत से शुरू हुआ. उन्होंने लोकायुक्त कार्यालय में आवेदन देकर आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को दरकिनार कर बड़ी रकम की खरीदारी करवाई. शिकायत में कहा गया कि न तो तय प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही सही तरीके से निविदाएं आमंत्रित की गईं. प्रारंभिक जांच में शिकायत को गंभीर पाते हुए लोकायुक्त ने अपराध क्रमांक 43/2026 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया.

करोड़ों रुपये की संदिग्ध खरीदारी

जांच के दौरान शिक्षा विभाग की कई खरीद प्रक्रियाएं शक के घेरे में आईं. दस्तावेजों के अनुसार 558 शालाओं के लिए स्वच्छता और कीटाणुशोधन सामग्री की खरीद करीब 97 लाख 67 हजार 790 रुपये में की गई. इसके अलावा 19 स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर लगभग 468 करोड़ 16 लाख रुपये खर्च किए गए. वहीं 61 विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था, उपकरण और सामान्य मरम्मत सामग्री की खरीदी पर करीब 305 लाख रुपये खर्च किए जाने के दस्तावेज भी सामने आए. इन सभी मामलों में नियमों की अनदेखी और भारी वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई गई है.

कई अधिकारी नामजद, गंभीर धाराएं दर्ज

लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में सिर्फ जिला शिक्षा अधिकारी ही नहीं, बल्कि विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई. प्रकरण में जिला प्रभारी शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह, सहायक संचालक शिक्षा राजधर साकेत, जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल और सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) छविलाल सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है. इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2), 7(सी), 12 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5) व 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया है.

लोकायुक्त की छापेमारी और दस्तावेज जब्ती

विवेचना को आगे बढ़ाते हुए 15 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त रीवा की टीम सिंगरौली पहुंची. टीम ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में छापेमारी कर सामग्री क्रय से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त किए. इन दस्तावेजों के आधार पर खरीदी की प्रक्रिया, स्वीकृति आदेश, भुगतान और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है.

अब तक क्यों नहीं हुई विभागीय कार्रवाई?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला दर्ज हो चुका है, गंभीर धाराएं लग चुकी हैं और दस्तावेज भी जब्त किए जा चुके हैं, तो फिर आरोपी अधिकारी अब तक अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं? आम तौर पर ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को पद से हटाया या निलंबित किया जाता है, ताकि वे न तो सबूतों से छेड़छाड़ कर सकें और न ही गवाहों पर दबाव बना सकें. लेकिन इस प्रकरण में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है. 

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