विज्ञापन

OPINION: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर मोदी सरकार ने क्या पाया, विपक्ष से तो बहुत कुछ छीन लिया

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के हाथों से वह अवसर छीन लिया है, जिससे वे राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकते थे.

OPINION: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर मोदी सरकार ने क्या पाया, विपक्ष से तो बहुत कुछ छीन लिया
  • नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 36 दिन का आंदोलन समाप्त हुआ
  • पीएम मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर विपक्ष को एकजुट होने का अवसर नहीं दिया है
  • राहुल गांधी ने पीएम आवास के बाहर धरना देकर विपक्ष के लिए एक नया राजनीतिक चेहरा बनने का प्रयास किया
नई दिल्ली:

जंतर-मंतर पर 36 दिन का आंदोलन. संसद से पीएम आवास तक प्रदर्शन. मीडिया में नैरेटिव की जंग तो पक्ष और विपक्ष में जुबानी संघर्ष. मसला सिर्फ एक था कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो. इस सबका अंत आज धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही हो गया है. कयास बहुत से थे, लेकिन इसकी चर्चा कम ही थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इतनी आसानी से इस्तीफा होगा. वजह यह कि लगातार खबरें आ रही थीं कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने पर विचार भी नहीं कर रही है. इसके बाद भी यदि प्रधान का इस्तीफा हुआ है तो यह अहम है और पीएम मोदी ने अपने ही अंदाज में एक बार फिर सभी अनुमानों से उलट चौंकाने की कोशिश की है.

इस कोशिश के साथ ही उन्होंने विपक्ष के हाथों से एक अवसर भी छीन लिया है. वह अवसर जो समूचे विपक्ष को एकजुट कर रहा था. बीते 12 सालों से चुनाव दर चुनाव हार झेलने वाली कांग्रेस और उसके चेहरे राहुल गांधी को मजबूत कर सकता था. यह आंदोलन पटना, लखनऊ, प्रयागराज, बेंगलुरु, कोलकाता समेत देश के तमाम हिस्सों में विस्तार ले रहा था. ऐसे में भाजपा के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी दल इस सेंटिमेंट का फायदा उठाकर अपनी जमीन मजबूत कर सकते थे. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर भाजपा ने यह अवसर विपक्ष से छीन लिया है. 20 जुलाई को आंदोलन के चरम का दिन था. उस दिन जिस तरह राहुल गांधी ने पीएम आवास के बाहर धरना दे दिया था, उससे वह सुर्खियां बन गए थे. पुलिस से खींचतान वाली उनकी तस्वीरें वायरल थीं और बीते एक दशक से ज्यादा के वक्त में पहला ऐसा मौका था, जब वह सड़क पर नेता बनते थे.

क्या आंदोलन बन रहा था विपक्षी दलों के लिए खाद-पानी?

ऐसा मौका उन्हें चेहरा बनाने के लिए काफी था. ऐसे में आंदोलन के उस खाद-पानी को ही सरकार ने खत्म करने की कोशिश की है, जो राहुल गांधी, अखिलेश यादव विपक्ष के कई नेताओं की राजनीति को पोषण दे सकता था. आज फिर से सीजेपी के लोगों से सरकार बात करने वाली थी. कयास तेज थे कि क्या विपक्ष इस बहाने मजबूत हो रहा है. सोमवार से फिर मॉनसून सेशन होने वाला है और सरकार नहीं चाहती कि फिर से यह मुद्दा तेज हो. ऐसे में सोमवार से पहले ही इस्तीफा ले लिया गया. यूं भी विपक्षी दल अपने स्तर पर इस मसले को लेकर इतना बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा कर पाए थे. 

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस बहाने मजबूत कर सकते थे जमीन

सरकार के लिए राहत की बात यह है कि कॉकरोच पार्टी के बैनर आंदोलन करने वालों का राजनीतिक संगठन नहीं है और विपक्षी दलों ने अपने बूते यह आंदोलन खड़ा नहीं किया था. लेकिन छात्र आंदोलन की आड़ में कांग्रेस समेत कई दलों में नई जान आ सकती थी. उसी मौके को सरकार ने धीरे से खींचने की कोशिश की है. किसान आंदोलन में भी एक साल बीतने के बाद एक चरम बिंदु तक पहुंचे आंदोलन को पीएम मोदी ने फैसला वापस लेकर अचानक ही खत्म कराया था. पीएम मोदी ने फिर उसी अंदाज में विपक्ष से लेकर आंदोलनकारियों तक सबको चौंकाया है. अब इस आंदोलन के बाद जमीनी हालात कितने बदले, यह जानने के लिए यूपी, पंजाब समेत 5 राज्यों के चुनाव तक इंतजार करना होगा. 

(डिस्क्लेमर- इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है)

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
PM Narendra Modi, Narendra Modi News, Narendra Modi News In Hindi, India News Hindi, India News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com