- सिंधिया संपत्ति विवाद: 40 हजार करोड़ की संपत्ति पर कानूनी लड़ाई, 14 अक्टूबर को अहम सुनवाई
- वसुंधरा राजे ने मांगी सीधी डिक्री, प्रतिमा देवी बोलीं- पहले साक्ष्य लिए जाएं
- 2015 से चल रहे विवाद में अब अदालत करेगी अगला फैसला
देश के सबसे समृद्ध राजघरानों में शुमार सिंधिया परिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद में एक अहम कानूनी मोड़ आ गया है. ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौते और उस पर दर्ज आपत्तियों को लेकर दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है. अब अदालत यह तय करेगी कि वसुंधरा राजे सिंधिया, उनकी बहनों और अन्य रिश्तेदारों द्वारा दायर समझौता आवेदन पर सीधे फैसला दिया जाए या फिर प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर पहले गवाही और साक्ष्य दर्ज किए जाएं. मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी.
अदालत में खुली सीलबंद दस्तावेजों की फाइल
बुधवार को सक्षम न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान समझौते से जुड़े सभी सीलबंद दस्तावेज खोले गए. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की पुत्री और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की ओर से अदालत में कहा गया कि उनका, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य पक्षकारों के बीच समझौता हो चुका है. इसलिए सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 3 के तहत मामले में डिक्री पारित की जानी चाहिए.

जय विलास पैलेस ग्वालियर
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वसुंधरा पक्ष ने कहा, गवाही की जरूरत नहीं
वसुंधरा राजे की ओर से दलील दी गई कि जब पक्षकारों के बीच समझौता हो चुका है तो इस स्तर पर अलग से गवाही दर्ज करने या अतिरिक्त साक्ष्य लेने की आवश्यकता नहीं है. साथ ही प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों का भी निस्तारण किया जाना चाहिए. अदालत से आग्रह किया गया कि समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निराकरण किया जाए और मुकदमे को समाप्त किया जाए.
प्रतिमा देवी ने मांगा साक्ष्य पेश करने का अवसर
दूसरी ओर पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उनकी आपत्तियों पर फैसला करने से पहले मुद्दे निर्धारित किए जाएं और उन्हें अपने पक्ष में साक्ष्य तथा गवाही पेश करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए. प्रतिमा देवी की ओर से यह भी कहा गया कि बिना साक्ष्य लिए उनकी आपत्तियों का निराकरण करना न्यायोचित नहीं होगा. दोनों पक्षों ने अपने तर्कों के समर्थन में विभिन्न न्यायालयों के पूर्व फैसले भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए.
2015 से चल रहा है संपत्ति विवाद
सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति को लेकर यह विवाद वर्ष 2015 से न्यायालय में विचाराधीन है. वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और ऊषा राजे ने परिवार की संपत्तियों में समान हिस्सेदारी का दावा किया था.
हालांकि इस समझौते पर पद्मा राजे की पुत्री प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कर दी, जिसके बाद मामला फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया.
14 अक्टूबर को होगा अहम फैसला
अब अदालत के समक्ष सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर निर्णय लेने से पहले गवाही और अन्य साक्ष्य दर्ज करना आवश्यक है या नहीं. इसी मुद्दे पर अदालत 14 अक्टूबर को विचार करेगी. न्यायालय के इस फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला सीधे समझौते के आधार पर आगे बढ़ेगा या फिर आपत्तियों की सुनवाई के लिए साक्ष्य और गवाहों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
करीब 40 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही सिंधिया परिवार की संपत्तियों से जुड़े इस बहुचर्चित विवाद पर अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत की अगली कानूनी दिशा तय होगी.
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