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सक्ति वेदांता पावर प्लांट हादसा: NHRC ने लिया संज्ञान, सांसद ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग; अब तक 25 मौतें

Sakti Vedanta Power Plant Accident: छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट में 25 मजदूरों की मौत. NHRC ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज. पढ़िए पूरी खबर.

सक्ति वेदांता पावर प्लांट हादसा: NHRC ने लिया संज्ञान, सांसद ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग; अब तक 25 मौतें
वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट में 25 मजदूरों की मौत, NHRC ने लिया संज्ञान; राज्य से रिपोर्ट तलब (फाइल फोटो)

Sakti Vedanta Power Plant Accident: छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने देशभर में चिंता पैदा कर दी है. बॉयलर ट्यूब फटने से हुए इस हादसे में अब तक 13 मजदूरों की मौत और 20 अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है, जबकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या 25 तक बताए जाने के दावे भी सामने आ रहे हैं. इस गंभीर घटना का राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है. वहीं, जांजगीर‑चांपा से सांसद कमलेश जांगड़े ने केंद्र सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए श्रमिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं.

14 अप्रैल को हुआ था भीषण हादसा

यह हादसा 14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लांट में बॉयलर ट्यूब फटने के बाद अत्यधिक गर्म भाप अचानक बाहर निकली, जिसने वहां काम कर रहे मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया. देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा‑तफरी मच गई. कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कुछ की मौके पर ही मौत हो गई.

Sakti Vedanta Power Plant Accident: सक्ति वेदांता पावर प्लांट हादसा

Sakti Vedanta Power Plant Accident: सक्ति वेदांता पावर प्लांट हादसा

NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने कहा है कि यदि रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो यह पीड़ित मजदूरों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बनता है. NHRC ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

मुआवजा और घायलों की स्थिति पर मांगी रिपोर्ट

आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में विशेष रूप से यह जानकारी देने को कहा गया है कि मृतक और घायल मजदूरों को कितना मुआवजा दिया गया है और घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है. NHRC ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्ट में प्रशासन और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए.

देर से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

15 अप्रैल 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉयलर को बंद करने और ठंडा होने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. घायलों को अलग‑अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. हादसे की भयावहता को देखते हुए स्थानीय लोगों में काफी रोष देखा गया.

Sakti Vedanta Power Plant Accident: सांसद ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा पत्र

Sakti Vedanta Power Plant Accident: सांसद ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा पत्र

सांसद कमलेश जांगड़े ने केंद्र को लिखा पत्र

जांजगीर‑चांपा लोकसभा क्षेत्र से सांसद कमलेश जांगड़े ने इस मामले में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है. पत्र में सांसद ने वेदांता पावर प्लांट हादसे की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.

Sakti Vedanta Power Plant Accident: पत्र में ये लिखा है

Sakti Vedanta Power Plant Accident: पत्र में ये लिखा है

श्रमिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

सांसद जांगड़े ने पत्र में कहा कि यह हादसा श्रमिक सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी का परिणाम हो सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया. उनका कहना है कि जब 25 मजदूरों की जान चली जाती है, तब यह सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही का मामला बन जाता है.

मौतों के आंकड़ों पर भी विरोधाभास

जहां NHRC ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से 13 मौतों की पुष्टि की है, वहीं स्थानीय सूत्रों और जनप्रतिनिधियों का दावा है कि अब तक मृत मजदूरों की संख्या 25 तक पहुंच चुकी है. इस विरोधाभास ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है.

आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर

अब सबकी निगाहें NHRC की रिपोर्ट और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं. सवाल यह है कि क्या इस हादसे में जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य औद्योगिक दुर्घटनाओं की तरह फाइलों में सिमटकर रह जाएगा. श्रमिक संगठनों और आम जनता में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बना हुआ है.

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