Karnataka Janeu Controversy CET Exam: कर्नाटक में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान छात्रों से जनेऊ (यज्ञोपवीत) उतरवाए जाने के मामले ने एक बार फिर सियासी और सामाजिक तूल पकड़ लिया है. बेंगलुरु के मडिवाला स्थित कृपाणिधि कॉलेज में CET परीक्षा केंद्र पर हुई इस घटना के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. राज्य सरकार के निर्देश पर कॉलेज के तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए इस मामले में कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने भी जांच के आदेश दिए हैं. विपक्ष ने इसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए सरकार पर हमला बोला है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में उस समय सामने आया, जब CET परीक्षा देने आए कुछ छात्रों से परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले उनका जनेऊ (यज्ञोपवीत) हटाने को कहा गया. यह घटना 23 अप्रैल 2026 को भौतिकी (Physics) की परीक्षा के दौरान मडिवाला स्थित कृपाणिधि कॉलेज में हुई, जो परीक्षा केंद्र बनाया गया था. छात्रों का आरोप है कि केंद्र पर तैनात स्टाफ ने उन्हें बिना जनेऊ उतारे परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं करने दिया, जबकि यह धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है.
सुनिए नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा?
#WATCH | Bengaluru: Karnataka Legislative Assembly LoP & BJP leader R. Ashoka says, "... During yesterday's CET physics exam at Koramangala College, several students were forced to remove their sacred thread. We condemned the incident, calling it an attack on Hindu tradition that… pic.twitter.com/M9W2BsP9UW
— ANI (@ANI) April 24, 2026
तीन कर्मचारियों को किया गया निलंबित
विवाद सामने आते ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कृपाणिधि कॉलेज के तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया. निलंबित कर्मचारियों में कॉलेज की दो वरिष्ठ महिला कर्मचारी भी शामिल हैं. सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

Karnataka Janeu Controversy CET Exam: कर्नाटक CET जनेऊ विवाद
KEA को शक, जानबूझकर की गई हरकत
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने इस मामले में बेंगलुरु अर्बन जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है. KEA का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर साफ निर्देश थे कि किसी भी छात्र से जनेऊ या अन्य धार्मिक प्रतीक हटाने को नहीं कहा जाए. KEA ने यह भी आशंका जताई है कि यह घटना जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से की गई हो सकती है. प्राधिकरण ने वरिष्ठ स्तर की जांच और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है.
पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब कर्नाटक में जनेऊ को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो. पिछले साल भी CET परीक्षा के दौरान छात्रों ने आरोप लगाए थे कि परीक्षा केंद्रों पर उनसे पवित्र धागा उतरवाया गया. उस समय भी भारी हंगामे के बाद कांग्रेस सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया था और सख्त दिशा‑निर्देश जारी किए थे.
जनेऊ का धार्मिक महत्व
जनेऊ या यज्ञोपवीत हिंदू धर्म में एक पवित्र धागा है, जिसे विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय के पुरुष बाएं कंधे से दाहिनी भुजा के नीचे पहनते हैं. यह शिक्षा, आध्यात्मिक जीवन और जिम्मेदार वयस्क जीवन में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में परीक्षा के नाम पर इसे उतरवाना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम माना जा रहा है.
बीजेपी का सरकार पर हमला
इस ताजा मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के शासन में हिंदू धार्मिक प्रतीकों को बार‑बार निशाना बनाया जा रहा है. पार्टी ने इसे "पूर्वाग्रह से प्रेरित कार्रवाई" करार देते हुए सरकार से जवाब मांगा है.
उच्च शिक्षा मंत्री का बयान
कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि CET परीक्षा के लिए सरकारी और निजी कॉलेजों के बुनियादी ढांचे और स्टाफ का उपयोग किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी भी संस्थान का कोई कर्मचारी अनुचित या अतिशय व्यवहार करता पाया गया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने यह भी कहा कि जैसे ही मामला संज्ञान में आया, कार्रवाई शुरू कर दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे.
प्रशासन की सख्ती, रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल KEA की ओर से मांगी गई रिपोर्ट और जिला प्रशासन की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं. यह देखना अहम होगा कि जांच में यह घटना लापरवाही साबित होती है या जानबूझकर की गई कार्रवाई. जितनी तेजी से सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है, उससे साफ है कि वह इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरतना चाहती. इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है.
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