'कूली नंबर 1', 'हीरो नंबर 1' और 'बीवी नंबर 1' जैसी हिट फिल्मों के प्रोड्यूसर वासु भगनानी आज करोड़ों के मालिक हैं, लेकिन उनके लिए सफलता आसान नहीं थीं. कभी उन्होंने सड़क पर खड़े होकर साड़ियां बेचीं तो कभी दूसरे छोटे-मोटे काम किए. हाल में 'जिंगाबाद' पॉडकास्ट पर बात करते हुए, भगनानी ने अपने शुरुआती संघर्षों, बिजनेस वेंचर्स और उस पल के बारे में खुलकर बात की जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. वासु भगनानी ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया. क्या कहा उन्होंने, चलिए जानते हैं.
सड़कों पर बेचीं साड़ियां
वासु भगनानी ने कहा, "मैं फुटपाथ पर साड़ियां बेचा करता था. 13 साल की उम्र में, सड़क पर साड़ियां बेचने वाला एक लड़का यहां तक पहुंचा है, यह उसके लिए बहुत बड़ी बात है. यह उनके और उनके बच्चों के लिए हमेशा यादगार रहेगा." उस समय, उनका परिवार कोलकाता में रहता था, जहां सीमित मौके थे. उन्होंने कहा, "कलकत्ता में हम चार भाई थे, और वहां मौकों की थोड़ी कमी थी, इसलिए हमने सोचा कि एक भाई को दिल्ली चले जाना चाहिए."

यह कदम एक अहम मोड़ साबित हुआ. उन्होंने बताया, "जैसे ही मैं दिल्ली पहुंचा, मैंने प्रीत विहार में एक छोटा सा प्लॉट खरीदा, इसी तरह आनंद विहार और ऐसी ही दूसरी जगहों पर भी मैंने प्लॉट खरीदे, उन पर विला बनाए और उन्हें बेच दिया. फिर, शंकरपुर में एक इमारत है जिसे 'VIP बिल्डिंग' कहते हैं- मैंने वहीं खड़े होकर चार महीने के अंदर उसे बनवा दिया. वहीं से कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में मेरी जिंदगी की शुरुआत हुई. कलकत्ता में हमारा काम कंस्ट्रक्शन का नहीं, बल्कि साड़ियों का था."
मुंबई में किस्मत का एक नया मोड़
लेकिन असल में मुंबई ही वह जगह थी जिसने वासु के सफर को पूरी तरह से बदल दिया. उन्होंने कहा, “फिर यह सब करते हुए, हम होली के दौरान मुंबई आए और फिर कभी दिल्ली की तरफ मुड़कर नहीं देखा.” मुंबई में किस्मत किस तरह बदली इस पर उन्होंने कहा, “यह किस्मत का खेल है, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं बंबई (मुंबई) चला जाऊंगा. जब मैं होली के दौरान मुंबई आया, तो हम ओरिएंटल पैलेस नाम के एक होटल में रुके. फिर मैं यहीं रुक गया, एक प्लॉट खरीदा और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया. एक बार जब मैंने वहां शुरुआत की, तो मैंने तीन से चार सालों में 12–15 इमारतें बना दीं.”

इसके बाद और ऑडियो कैसेट बनाने का काम शुरू किया और इसके बाद फिल्मी दुनिया में कदम रखा. उनके जीवन में मोड़ तब आया जब उन्होंने गोविंदा की फिल्म आंखें देखी. उन्होंने ठान लिया कि वो उन्हें साइन करेंगे. अगले ही दिन उन्होंने गोविंदा और डेविड को साइन कर लिया. इसके बाद उन्होंने डेविड धवन और गोविंदा के साथ मिलकर कई सफल फिल्में बनाईं. इन सालों में भागनानी ने कई तरह की फिल्में बनाई हैं. 1990 के दशक की 'नंबर 1' कॉमेडी फिल्मों से लेकर हाल की फिल्में जैसे मिशन रानीगंज, गनपत और बड़े मियां छोटे मियां तक.
ओम जय जगदीश बर्बादी की वजह
फिल्म ओम जय जगदीश (2002) से एक बड़ा आर्थिक झटका लगा. यह फिल्म अनुपम खेर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी. इस फिल्म में अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और फरदीन खान जैसे कई बड़े कलाकार थे. जैसा कि उनके बेटे जैकी भागनानी ने पहले के इंटरव्यू में बताया था, इस झटके से उस समय उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था. फिर भी, भागनानी ने फिल्मों और बिजनेस के जरिए अपनी किस्मत फिर से बनाई, खासकर कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UK तक फैलाया. आज वाशु भगनानी की कुल संपत्ति 2500 करोड़ के करीब बताई जाती है.
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