Rare Pygmy Woodpecker Sighted in Nava Raipur Jungle Safari: छत्तीसगढ़ की राजधानी क्षेत्र नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के बॉटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है. हाल ही में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान वन्यजीव छायाकारों ने भारत के सबसे छोटे कठफोड़वे प्रजातियों में शामिल ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर को कैमरे में कैद किया. तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे इलाके में इस दुर्लभ पक्षी की उपस्थिति को जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से अहम उपलब्धि माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रहा है.
बर्ड वॉक में मिली दुर्लभ मौजूदगी
छत्तीसगढ़ वन विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार जंगल सफारी के बॉटेनिकल गार्डन में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान यह खास प्रजाति देखने को मिली. वन्यजीव छायाकारों द्वारा इस छोटे और फुर्तीले पक्षी को कैमरे में कैद किया गया, जो सामान्यतः घने जंगलों में ही पाया जाता है. इसकी मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों में उत्साह भर दिया है.

Rare Pygmy Woodpecker: भारत का सबसे छोटा कठफोड़वा
सबसे छोटे कठफोड़वों में शामिल
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में गिना जाता है. इसकी लंबाई लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर होती है, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है. इसके सिर पर भूरे रंग का मुकुट जैसा हिस्सा और शरीर पर काले-सफेद धब्बे होते हैं, जिससे इसे पहचानना आसान होता है.
फुर्ती और गतिविधियों के लिए मशहूर
यह पक्षी अपनी तेज गतिशीलता के लिए जाना जाता है. पेड़ों की छाल पर तेजी से चढ़ना-उतरना और लगातार गतिविधि में लगे रहना इसकी प्रमुख विशेषता है. इसी कारण इसे देखने का अनुभव पक्षी प्रेमियों के लिए खास बन जाता है.
पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाता है. यह अपनी नुकीली चोंच से पेड़ों की छाल के भीतर छिपे कीटों और लार्वा को खाकर पेड़ों को नुकसान से बचाता है. इसलिए इसे ‘पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक' भी कहा जाता है.
जैव विविधता का सकारात्मक संकेत
छत्तीसगढ़ वन विभाग के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस पक्षी की शहरी क्षेत्र में मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि जंगल सफारी का पारिस्थितिकी तंत्र धीरे-धीरे समृद्ध हो रहा है. सामान्यतः यह प्रजाति शांत और घने जंगलों में पाई जाती है, इसलिए इसका यहाँ दिखना संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है.
प्रकृति संरक्षण के प्रयासों को बल
यह खोज दर्शाती है कि यदि सही दिशा में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास किया जाए, तो वन्यजीवों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा सकता है. ऐसी घटनाएं भविष्य में और अधिक जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती हैं.
लोगों में बढ़ेगी जागरूकता
इस दुर्लभ पक्षी के रिकॉर्ड होने से आम लोगों में भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी. विशेषकर युवा और प्रकृति प्रेमी इस तरह के प्रयासों से प्रेरित होंगे.
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