Cabinet Decisions: मध्यप्रदेश के पर्यटन और रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने जा रही है. नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक कार्य समिति से मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है. सीएम मोहन ने कहा- इस अहम परियोजना से उज्जैन में बाबा महाकालेश्वर, कूनो राष्ट्रीय उद्यान सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और सशक्त होगा. इससे न सिर्फ पर्यटन बल्कि लॉजिस्टिक्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में आज केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक कार्य समिति ने नागदा-मथुरा तीसरी व चौथी लाइन परियोजना को स्वीकृति दी है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 5, 2026
इस परियोजना से बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन एवं कूनो राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और… pic.twitter.com/107JrjWOpT
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नागदा-मथुरा रेल परियोजना को केंद्र की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने 5 मई 2026 को ‘पीएम गति शक्ति' कार्यक्रम के तहत नागदा–मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है. यह निर्णय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई गति
डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस परियोजना से पर्यटन के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी नई रफ्तार मिलेगी. रेल लाइनों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
6 राज्यों के 19 जिलों को लाभ
केंद्र सरकार की मंजूरी से लगभग 23 हजार 437 करोड़ रुपये की तीन मल्टी‑ट्रैकिंग परियोजनाएं पूरी होंगी. इससे मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी. व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और हर साल 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी.
लाखों लोगों और प्रमुख तीर्थ स्थलों को फायदा
इस परियोजना से करीब 83 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है. महाकालेश्वर उज्जैन, कूनो राष्ट्रीय उद्यान के साथ‑साथ राजस्थान के रणथंबोर और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा‑वृंदावन, मंत्रालयम, कासापुरम, नैमिषारण्य जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा.
औद्योगिक और कृषि परिवहन को भी सहारा
प्रस्तावित रेल परियोजनाएं कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा‑इस्पात, कंटेनर और उर्वरक जैसी वस्तुओं के परिवहन की दृष्टि से भी अहम मानी जा रही हैं. इससे औद्योगिक विकास को बल मिलेगा और राज्यों के बीच आपसी कनेक्टिविटी को मजबूत आधार मिलेगा.
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