- मध्य प्रदेश में नया मौसम तंत्र सक्रिय होने से कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बढ़ गई है.
- बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल क्षेत्रों में मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने के भी आसार बने हुए हैं.
- प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी की है.
मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है. प्रदेश में नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के बाद कई जिलों में बारिश की संभावना बन गई है. मौसम विभाग ने मंगलवार से कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है. हालांकि इस सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की है, लेकिन नए सिस्टम के असर से आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. खासकर बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के जिलों में मौसम बदलने के संकेत मिले हैं.
इन जिलों में मध्यम बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार निवाड़ी, ओरछा, टीकमगढ़, छतरपुर, खजुराहो, पन्ना, सतना, चित्रकूट, मैहर और कटनी जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश हो सकती है. इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और तेज बरसात के दौर भी देखने को मिल सकते हैं.
कई जिलों में हल्की बारिश और बिजली गिरने के आसार
प्रदेश के रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, अमरकंटक, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और दमोह सहित कई जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई है. इसके अलावा श्योपुर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, गुना, अशोकनगर, विदिशा और सागर जिले भी मौसम के प्रभाव में रह सकते हैं. इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है.
प्रदेश में अब भी बारिश का बड़ा घाटा
मानसून सीजन की शुरुआत 1 जून से हुई थी, लेकिन 5 अगस्त तक प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की है. बारिश की कमी का असर खेती-किसानी पर भी दिखाई देने लगा है. कई जिलों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके.
पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में बारिश की स्थिति ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है. जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया जिलों में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई है.
पश्चिमी हिस्से में भी सामान्य से कम बरसे बादल
प्रदेश के पश्चिमी भाग में भी हालात बहुत बेहतर नहीं हैं. भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा जैसे जिलों में भी सामान्य से कम पानी गिरा है.
नए सिस्टम से बढ़ी राहत की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदेश में सक्रिय हुए नए सिस्टम के कारण अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. यदि अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो प्रदेश में बने वर्षा घाटे में कमी आ सकती है. किसानों के साथ-साथ आम लोगों की नजरें भी अब मानसून की अगली चाल पर टिकी हुई हैं.
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