- मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर दिया गया है.
- इसमें उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और वसीयत के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं.
- बेटा-बेटी को समान हक दिया गया है, जबकि हत्यारों को संपत्ति से बेदखल किया गया है.
MP ucc draft property rules: मध्य प्रदेश विधानसभा में 20 जुलाई को पेश किया गया समान नागरिक संहिता (UCC) बिल केवल विवाह और तलाक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और वसीयत के लिए भी एक समान प्रावधान किए गए हैं. बिल के कानून बनने के बाद प्रदेश में इन मामलों से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. यूसीसी ड्राफ्ट के तहत बिना वसीयत मृत्यु होने पर पति-पत्नी, बच्चों और गर्भस्थ शिशु को भी समान अधिकार मिलेगा.
संपत्ति के लिए किसी की हत्या या हत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को इससे पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा. देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों को मौखिक वसीयत की विशेष सुविधा दी जाएगी. इससे जुड़े विवादों की अपील सीधे हाईकोर्ट में की जा सकेगी. अब जानिए उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और वसीयत को लेकर एमपी यूसीसी ड्राफ्ट में किए गए 15 अहम प्रावधान क्या हैं.

MP ucc draft: मप्र विधानसभा में पेश किया गया यूसीसी बिल. (फोटो- @DrMohanYadav51)
ये हैं एमपी यूसीसी ड्राफ्ट में किए गए प्रावधान
- सबके लिए एक जैसा कानून: धर्म आधारित अलग-अलग नियमों को हटाकर उत्तराधिकार और वसीयत के लिए पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू होगी.
- पहली पसंद (पहली श्रेणी के वारिस): बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति पर सबसे पहला हक पति या पत्नी, बच्चों और उनके वंशजों का होगा.
- बराबर का अधिकार: जीवित पति या पत्नी और सभी बच्चों को संपत्ति में बिल्कुल समान हिस्सा मिलेगा.
- मृत बच्चे के परिवार का हक: यदि किसी बेटे या बेटी की मृत्यु पहले हो चुकी है, तो उसके बच्चों को वही हिस्सा मिलेगा जो उस बेटे या बेटी को जीवित रहने पर मिलता.
- गर्भस्थ शिशु का अधिकार: मृत्यु के समय जो बच्चा मां के गर्भ में आ चुका है और बाद में जीवित जन्म लेता है, उसे भी पूरा उत्तराधिकार मिलेगा.
- दूसरी श्रेणी के रिश्तेदार: यदि पहली श्रेणी (पति-पत्नी, बच्चे) में कोई उत्तराधिकारी नहीं है, तब संपत्ति दूसरी श्रेणी के रिश्तेदारों को दी जाएगी.
- सरकार के पास संपत्ति: यदि कोई भी वैध वारिस उपलब्ध नहीं होगा, तो संपत्ति सरकार के अधिकार में चली जाएगी.
- अपराधी को संपत्ति नहीं: यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या करता है या हत्या का प्रयास करता है, तो उसे उत्तराधिकार से पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा.
- बीमारी या विकलांगता पर कोई रोक नहीं: किसी भी व्यक्ति को उसकी बीमारी, मानसिक स्थिति, शारीरिक अक्षमता या विकृति के आधार पर संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
- वसीयत बनाने का अधिकार: हर वयस्क और मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति को अपनी संपत्ति की वसीयत लिखने का पूरा अधिकार होगा.
- दिव्यांगों को भी अधिकार: दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति भी वसीयत कर सकते हैं, बशर्ते वे अपने फैसले को अच्छी तरह समझते हों.
- जबरदस्ती या धोखे की वसीयत रद्द: दबाव, धमकी, धोखे, कपट या अनुचित प्रभाव में करवाई गई वसीयत कानूनी रूप से अमान्य मानी जाएगी.
- बदलाव की सुविधा: व्यक्ति अपनी वसीयत को जीवनकाल में कभी भी बदल सकता है, रद्द कर सकता है या दोबारा लागू कर सकता है.
- सैनिकों को विशेष छूट: सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों के लिए विशेषाधिकार प्राप्त वसीयत लागू रहेगी, यहाँ तक कि विशेष परिस्थितियों में वे मौखिक वसीयत भी कर सकेंगे.
- विवाद में कोर्ट का फैसला व अपील: वसीयत में अस्पष्टता होने पर अदालत व्यक्ति की वास्तविक मंशा देखकर फैसला करेगी. साथ ही, फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी.
अब केवल शब्दों से विवाह विच्छेद नहीं होगा…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 19, 2026
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित करना है।#UniformCivilCode #UCC #Cabinetdecision pic.twitter.com/YlNtEiVWKs
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