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कांग्रेस पर कानूनी शिकंजा: राज्यसभा गणित से लेकर उपचुनाव तक उलझी मध्यप्रदेश की सियासत

MP Congress Crisis: मध्यप्रदेश में राजेंद्र भारती, निर्मला सप्रे और मुकेश मल्होत्रा मामलों से कांग्रेस का राज्यसभा व उपचुनाव गणित उलझा. पढ़िए पूरी खबर.

कांग्रेस पर कानूनी शिकंजा: राज्यसभा गणित से लेकर उपचुनाव तक उलझी मध्यप्रदेश की सियासत
मध्यप्रदेश कांग्रेस से जुड़े कानूनी मामलों के बीच राज्यसभा चुनाव की तैयारी

MP Congress Crisis: मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों अदालतों के गलियारों और चुनावी कैलेंडर के बीच फंसी दिख रही है. अलग‑अलग कानूनी मामलों ने कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिनका सीधा असर आगामी राज्यसभा चुनाव और संभावित उपचुनावों पर पड़ सकता है. दतिया से जुड़े राजेंद्र भारती का मामला हो या बीना विधायक निर्मला सप्रे पर दलबदल का विवाद, हर केस कांग्रेस के वोटिंग गणित और रणनीति को प्रभावित करता नजर आ रहा है. विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को भी अदालत से राहत नहीं मिली है. कुल मिलाकर, कानून की धीमी प्रक्रिया और सियासी आरोप‑प्रत्यारोप के बीच कांग्रेस को अपने कदम फूंक‑फूंककर रखने पड़ रहे हैं.

राजेंद्र भारती मामला: राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका

दतिया से जुड़े राजेंद्र भारती का केस कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होता दिख रहा है. इस मामले में अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय हुई है, जबकि राज्यसभा चुनाव जून में होने हैं. ऐसे में यह साफ माना जा रहा है कि भारती राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत होती है और एक वोट का घटना भी समीकरणों को बिगाड़ सकता है. कांग्रेस खेमे में इसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहले से ही सीमित संख्या के विधायकों के सहारे गणित साधने की कोशिश में है.

MP Congress Crisis: राजेंद्र भारती, निर्मला सप्रे और मुकेश मल्होत्रा मामलों से कांग्रेस का राज्यसभा व उपचुनाव गणित उलझा

MP Congress Crisis: राजेंद्र भारती, निर्मला सप्रे और मुकेश मल्होत्रा मामलों से कांग्रेस का राज्यसभा व उपचुनाव गणित उलझा

दतिया सीट पर उपचुनाव की आहट

राजेंद्र भारती मामले से जुड़ा एक और पहलू दतिया विधानसभा सीट को लेकर है. नियमानुसार, किसी भी विधानसभा सीट के रिक्त होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना होता है. दतिया सीट 2 अप्रैल से रिक्त मानी जा रही है, ऐसे में 2 अक्टूबर से पहले उपचुनाव कराना अनिवार्य होगा. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी रणनीतिक रूप से ऐसा माहौल बना रही है, जिससे भारती को वोटिंग का अधिकार न मिल सके और दतिया में जल्द चुनाव कराया जाए. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे सुप्रीम कोर्ट का भी रुख करेंगे.

बीजेपी का पलटवार: जिम्मेदारी से बच रही कांग्रेस

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस के नेता खुद कानूनी मामलों में फंसते हैं तो उसकी जिम्मेदारी बीजेपी पर नहीं डाली जा सकती. बीजेपी नेताओं का तर्क है कि राजेंद्र भारती का मामला अदालत में है और वही तय करेगी कि आगे क्या होगा. पार्टी का कहना है कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने.

निर्मला सप्रे विवाद: दलबदल मामले में हाईकोर्ट की सख्ती

बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ा रहा है. इस केस में उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने देरी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट की तय 90 दिन की समयसीमा के बावजूद 720 दिन बीत जाने के बाद भी फैसला क्यों नहीं हो सका. महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामला अभी विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है. कोर्ट ने गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने की बात कही है और अगली सुनवाई 18 जून को तय की है.

बीना में भी बन सकते हैं उपचुनाव के हालात

यदि निर्मला सप्रे मामले में कांग्रेस के पक्ष में फैसला नहीं आता है, तो बीना विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव की स्थिति बन सकती है. इससे कांग्रेस की रणनीति और अधिक उलझ सकती है. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी इस मामले में भी चुनाव से डर रही है. उनका कहना है कि यदि विधायक ने पार्टी बदल ली है तो फिर चुनाव क्यों नहीं कराया जा रहा. वहीं, बीजेपी का कहना है कि यह फैसला निर्मला सप्रे और कांग्रेस को आपस में तय करना चाहिए.

मुकेश मल्होत्रा मामला: राज्यसभा वोटिंग पर रोक

विजयपुर से जुड़े मुकेश मल्होत्रा मामले में भी कांग्रेस को झटका लगा है. अदालत ने मल्होत्रा को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने से रोक रखा है. इस निर्णय से कांग्रेस की वोटिंग ताकत और कमजोर हो जाती है. विजयपुर सीट पर भी निगाहें लगी हैं, जहां पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है. इस मामले का असर भी आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है.

आरोप‑प्रत्यारोप तेज, बयानबाजी चरम पर

इन कानूनी मामलों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी षड्यंत्रपूर्वक कांग्रेस विधायकों के वोटिंग अधिकार खत्म कराने की कोशिश कर रही है. वहीं बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि घोटाले और कानूनी गड़बड़ियों के लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार है और हर मामले में बीजेपी को कठघरे में खड़ा करना गलत है.

डेट्स पर टिकी नजरें: 18 जून और 29 जुलाई अहम

फिलहाल मध्यप्रदेश की सियासत दो अहम तारीखों के इर्द‑गिर्द घूमती नजर आ रही है 18 जून, जब निर्मला सप्रे मामले की सुनवाई होनी है, और 29 जुलाई, जब राजेंद्र भारती केस पर अगली सुनवाई तय है. इन दोनों मामलों के फैसले यह तय करेंगे कि राज्यसभा चुनाव के बाद प्रदेश की राजनीति किस दिशा में जाती है और कहां‑कहां उपचुनाव की जमीन तैयार होती है.

कानून अपनी रफ्तार से, सियासत अपने हिसाब से

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब अदालतें 90 दिनों में फैसले की बात करती हैं, तो कई मामले 700 दिन से ज्यादा क्यों खिंच जाते हैं. कानून अपनी गति से चलता है और राजनीति अपने हिसाब से कदम बढ़ाती है, लेकिन बीच में फंसा है चुनावी गणित. मध्यप्रदेश की मौजूदा स्थिति में इतना तय है कि इन कानूनी पेचों ने न सिर्फ कांग्रेस का गणित उलझाया है, बल्कि आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है.

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