- इंदौर में शादी के सात दिन बाद पति-पत्नी अलग हो गए.
- फैमिली कोर्ट से दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया.
- युवती की शादी उसके परिवार ने जबरन करा दी थी.
शादी को सात जन्म का बंधन कहा जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में एक शादी महज 168 घंटे यानी 7 दिन ही चल सकी. आपसी सहमति के बाद कोर्ट ने नए नवेले दुल्हे और दुल्हन का तलाक मंजूर कर उन्हें शादी के रिश्ते से आजाद कर दिया.
असल में यह शादी दो दिलों का मेल नहीं, परिजनों के दबाव में जबरन उठाया गया एक कदम था. फैमिली प्रेशर में आकर एक युवती युवक से शादी करने के लिए तैयार हो गई. लेकिन शादी के बाद उसने अपने पति से साफ कह दिया कि वह उसके साथ नहीं रहना चाहती, क्योंकि वह किसी और से प्यार करती है. इसके बाद दोनों आपसी सहमति से परिवार न्यायालय पहुंचे, जहां कोर्ट ने भी उनके तलाक को मंजूरी दे दी.
साथ नहीं रहना चाहते थे पति-पत्नी

indore marriage divorce in 7 days 168 hours family court decision.
एक साल की शर्त पूरी करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
अधिवक्ता की ओर से हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14(2) के तहत आवेदन प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया गया कि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि जिस शादी का वास्तविक अस्तित्व ही न हो, उसमें पति-पत्नी को जबरदस्ती साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. दोनों का समय और जीवन प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें अलग कर देना ही उचित होगा.
सात दिन में पूरी हुई तलाक की प्रक्रिया
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क्यों आई तलाक की नौबत?
शादी के बाद ससुराल पहुंची नई नवेली दुल्हन ने पति के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया था. उसका कहना था कि परिवार वालों ने उसकी जबरन शादी कराई है. वह किसी और से प्यार करती है, पति के साथ नहीं रहना चाहती थी. यह सुनने के बाद पति ने तलाक लेने का फैसला किया, उसकी पत्नी भी इसके लिए तैयार हो गई. आपसी सहमति से कोर्ट के जरिए दोनों 7 दिन में अलग हो गए.
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