मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित ऐतिहासिक 'नरवर किले' से साल 2026 में हुई तोप चोरी ने एक पुराना सनसनीखेज मामला फिर खोल दिया है. दरअसल इस घटना ने 19 साल पुरानी एक बड़ी साजिश के तारों को फिर से जोड़ दिया है. अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या 2007 में इसी किले से चुराई गई दूसरी तोप का इस्तेमाल राजस्थान में हुआ था. आशंका है कि उसी तोप से करौली के पांचना बांध को उड़ाने की कोशिश की गई थी. बता दें कि 2007 में तोप से गोला दागते वक्त हुए धमाके में एक आरोपी की मौके पर ही मौत हो गई थी. अब हाल ही में 2026 में नरवर किले से दोबारा तोप चोरी हो गई है. इन दोनों घटनाओं के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीमें अलर्ट मोड पर हैं. पुलिस पुराने साक्ष्यों और धातुओं के मिलान के जरिए इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटी है.
2007 में नरवर किले की प्राचीर से गायब हुई थीं तोपें
मामला साल 2007 का है, जब नरवर किले की सुरक्षा में बड़ी सेंध लगाते हुए शातिर चोरों ने वहां रखी दो ऐतिहासिक तोपों पर हाथ साफ कर दिया था. इस दुस्साहसिक वारदात के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था. पुलिस की दौड़-धूप के बाद एक तोप तो बरामद कर ली गई और उसे नरवर थाने में लाकर खड़ा कर दिया गया, लेकिन 'दूसरी तोप' का कोई सुराग नहीं मिला. वर्षों बीत गए और मध्य प्रदेश में उस गुमशुदा तोप की खोजबीन चलती रही, लेकिन वह मानो हवा में गायब हो चुकी थी. इसी दौरान सीमा पार राजस्थान के करौली से आई एक धमाके की आवाज ने पूरे इलाके को चौकन्ना कर दिया.
राजस्थान में बड़ा धमाका: तोप फटी और साजिश नाकाम
दरअसल साल 2007 में ही राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन सिटी के अंतर्गत आने वाले गाड़वा मीणा गांव के पास से एक खौफनाक खबर आई. वहां मौजूद पांचना बांध को उड़ाने की खौफनाक कोशिश की गई थी. साजिशकर्ताओं ने बांध पर हमला करने के लिए एक तोप में बारूद भरकर गोला दागने का प्रयास किया था. हालांकि, तोप गोला छोड़ने के बजाय परखच्चे उड़ाते हुए फट गई. इस हादसे में गोला दागने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका दूसरा साथी गंभीर रूप से घायल हो गया. बांध तो तबाही से बच गया, लेकिन इस धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
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बड़ा सवाल: क्या करौली धमाके में इस्तेमाल हुई तोप वही थी
अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या राजस्थान में पांचना बांध को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की गई तोप वही थी, जो शिवपुरी के नरवर किले से चुराई गई थी. क्या बेखौफ अपराधियों ने किसी बड़े विनाश को अंजाम देने के लिए देश की ऐतिहासिक धरोहर को ही हथियार बना लिया था. क्या 2007 का वह धमाका और अब 2026 में हुई तोप चोरी की घटना किसी एक ही बड़ी साजिश की कड़ियां हैं, जिसका पार्ट-2 सामने आ रहा है. ये तमाम सवाल बड़े हैं, जिनका जवाब फिलहाल पुलिस की जांच डायरी में दर्ज हो रहा है.
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शिवपुरी से करौली तक खाकी की ग्राउंड पड़ताल जारी
यह पूरा मामला अब फाइलों की धूल झाड़कर एक बार फिर बाहर आ चुका है और जांच एजेंसियां मुस्तैद हो गई हैं. जांच की सुई अब मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से लेकर नरवर किले के उस सुनसान हिस्से और वहां से सीधे राजस्थान के करौली जिले में बसे गाड़वा मीणा गांव तक घूम रही है. पुलिस की संयुक्त टीमें पुराने गवाहों, फोरेंसिक साक्ष्यों और फटी हुई तोप के धातुओं के टुकड़ों का मिलान कर इस खूनी कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं. यह पड़ताल इस बात का जवाब तलाश रही है कि क्या 2007 की वह चोरी सिर्फ एक पुरातात्विक डकैती थी या किसी बड़े नेटवर्क द्वारा रची गई तबाही की पटकथा का हिस्सा थी?
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