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MP में मिला सदियों पुराना खजाना : 20 फीट लंबा 'महापुराण' और 'जम्बूद्वीप' का 10 फीट का सीक्रेट नक्शा

मध्यप्रदेश में 'ज्ञान भारतम् ऐप' के तहत मिलीं सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां. टीकमगढ़ में मिला 'जम्बूद्वीप' का 10 फीट लंबा रहस्यमयी नक्शा और बुरहानपुर से सामने आया 220 साल पुराना 20 फीट लंबा हस्तलिखित 'श्रीमद्भागवत महापुराण'. जानिए कैसे इस खोज के साथ ही डिजिटल रजिस्ट्रेशन में देश में नंबर-1 बना एमपी.

MP में मिला सदियों पुराना खजाना : 20 फीट लंबा 'महापुराण' और 'जम्बूद्वीप' का 10 फीट का सीक्रेट नक्शा

क्या आपने कभी 220 साल पुराना और पूरे 20 फीट लंबा हस्तलिखित 'श्रीमद्भागवत महापुराण' देखा है. या फिर 10 फीट लंबे कपड़े पर बना प्राचीन भारत का वह रहस्यमयी नक्शा, जिसे हमारे पूर्वज 'जम्बूद्वीप' कहते थे. अगर नहीं, तो अब अपनी स्क्रीन पर यह सब देखने के लिए तैयार हो जाइए क्योंकि डिजिटल दुनिया में यह मुमकिन होने जा रहा है. दरअसल, भारत सरकार के 'ज्ञान भारतम् ऐप' की ताजा रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प खुलासा हुआ है. दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों की खोज और उनके डिजिटल पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश ने पूरे देश को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के तहत राज्य ने अब तक कुल 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों के पन्नों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर एक नया रिकॉर्ड सेट कर दिया है.

टीकमगढ़ में मिला 'जम्बूद्वीप' का रहस्यमयी नक्शा

इस अभियान के दौरान संस्कृति विभाग को जिलों से कई चौंकाने वाली और दुर्लभ चीजें मिली हैं. टीकमगढ़ जिले में छानबीन के दौरान सदियों पुराना 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का एक अत्यंत रहस्यमयी और दुर्लभ नक्शा हाथ लगा है. प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाने वाले इस नक्शे के केंद्र में एक वृत्ताकार (गोल) संरचना है, जिसके चारों तरफ बेहद बारीकी से पर्वत-मालाएं और प्राचीन क्षेत्र दिखाए गए हैं. यह नक्शा इस बात का जिंदा सबूत है कि सैकड़ों साल पहले भी हमारे पूर्वजों को भूगोल की कितनी सटीक समझ थी.

पन्ना के मंदिर से निकली 435 साल पुरानी 'रसिक प्रिया'

खोज का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. पन्ना जिले के श्री राम जानकी मंदिर से महाकवि केशव दास द्वारा रचित 'रसिक प्रिया' (1591 ई.) की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है. यह रीतिकाल का वो मशहूर ग्रंथ है, जिसमें काव्यशास्त्र और श्रृंगार रस के कठिन नियमों को राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और खूबसूरत छंदों के जरिए बेहद आसान अंदाज में समझाया गया है.इसके अलावा बुरहानपुर से 220 साल पुराना और 20 फीट लंबा हस्तलिखित 'श्रीमद्भागवत महापुराण' और दतिया में एक प्राचीन ताम्रपत्र अभिलेख (विक्रम संवत 1828) भी मिला है, जो ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के समय का है. 
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भोपाल और इंदौर रहे सबसे आगे

इस सांस्कृतिक खोज में प्रदेश के सभी जिलों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 1 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी भोपाल 24 लाख 26 हजार से ज्यादा पांडुलिपियों के पन्नों को दर्ज कराकर पहले स्थान पर है. वहीं इंदौर से करीब 4 लाख, रीवा से 2.68 लाख, बैतूल से 1 लाख और छिंदवाड़ा से 77 हजार से अधिक पांडुलिपियां इस डिजिटल ऐप पर दर्ज की जा चुकी हैं. इनमें से 12 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक वेरिफिकेशन (सत्यापन) भी पूरा हो चुका है.अपर मुख्य सचिव (संस्कृति) शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि दुनियाभर के मठों, मंदिरों और संग्रहालयों में रखी हमारी ये पांडुलिपियां सिर्फ अतीत की यादें नहीं हैं, बल्कि ज्ञान का जीवित स्रोत हैं. इनका डिजिटलीकरण कर इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही इस अभियान का असली मकसद है.

आप भी बन सकते हैं भागीदार

'ज्ञान भारतम् ऐप' की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम जनता भी जुड़ सकती है. ऐप में एक 'स्मार्ट सर्च' का ऑप्शन है, जहां कोई भी स्टूडेंट या रिसर्चर लेखक, भाषा या विषय के नाम से किसी भी प्राचीन ग्रंथ को खोज सकता है.इतना ही नहीं, अगर आपके घर, किसी स्थानीय मंदिर या संस्था के पास कोई ऐसी प्राचीन हस्तलिखित किताब, ग्रंथ या पांडुलिपि सुरक्षित रखी है, तो आप खुद इस ऐप के जरिए उसके संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए रिक्वेस्ट डाल सकते हैं. यानि आपके घर की धरोहर भी हमारी प्राचीन मेधा को जिंदा रखने में बड़ा योगदान दे सकती है.
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