मध्य प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने चौंकाया है.दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने युवा नेता आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया है. इस फैसले के साथ ही इस सीट से प्रबल दावेदार माने जा रहे प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को तगड़ा झटका लगा है. राजनीतिक गलियारों में इस टिकट वितरण को लेकर काफी चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि नरोत्तम मिश्रा न केवल इस सीट से उपचुनाव की तैयारी कर रहे थे, बल्कि उन्होंने अपना नामांकन पत्र भी खरीद लिया था. आशुतोष तिवारी को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का करीबी बताया जा रहा है.
नरोत्तम मिश्रा को लगा बड़ा झटका
दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना बेहद अप्रत्याशित माना जा रहा है. नरोत्तम मिश्रा दतिया सीट पर पूरी तरह सक्रिय थे और बुधवार को ही उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था. स्थानीय स्तर पर यह चर्चाएं आम थीं कि वे शुक्रवार को अपना नामांकन फॉर्म दाखिल करने जा रहे हैं. लेकिन इसी बीच दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय संगठन ने अचानक आशुतोष तिवारी के नाम पर अपनी अंतिम मोहर लगा दी. पार्टी हाईकमान के इस फैसले ने दतिया में नरोत्तम मिश्रा के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है.
कौन हैं आशुतोष तिवारी ?
बीजेपी के घोषित प्रत्याशी आशुतोष तिवारी मूल रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से आते हैं. वे संघ में भोपाल और सागर संभाग के संभागीय संगठन मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. इसके साथ ही वे भाजपा की पिछली सरकार में मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था. क्षेत्र के युवाओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. साल 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में भी आशुतोष तिवारी ने दतिया से अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल सका था. इस बार पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उपचुनाव के मैदान में उतारा है.
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दिल्ली हाईकोर्ट से राजेंद्र भारती की याचिका खारिज
दतिया विधानसभा सीट पर इस राजनीतिक हलचल के बीच कानूनी मोर्चे पर भी एक बड़ी तस्वीर साफ हुई है. कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने वर्ष 1998 के दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक के एफडी फ्रॉड (घोटाला) मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें इस मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी. राजेंद्र भारती ने इसी सजा और सदस्यता रद्द होने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया. हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद उपचुनाव को लेकर बनी कानूनी अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त हो गई है और निर्वाचन आयोग की तय समय-सारिणी के अनुसार चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रहेगी.
कांग्रेस के प्रत्याशी पर टिकी नजरें, बदला चुनावी समीकरण
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती विजयी हुए थे, लेकिन उनकी सदस्यता जाने के बाद अब यहां दोबारा चुनाव हो रहे हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले और बीजेपी द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब दतिया का चुनावी दंगल पूरी तरह सज चुका है. बीजेपी ने जहां संगठन से जुड़े युवा चेहरे को उतारकर अपनी रणनीति साफ कर दी है, वहीं कांग्रेस ने अभी तक दतिया सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद अब कांग्रेस भी अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव कर सकती है और जल्द ही अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान करेगी.
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