- मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर काम बंद कर दिया है.
- भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इंटर्न्स के आंदोलन के कारण ओपीडी सेवाएं बाधित और सर्जरी स्थगित हो गई हैं.
- जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा.
मध्य प्रदेश में डॉक्टरों का आंदोलन अब बड़ा रूप लेता जा रहा है. स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स ने काम बंद कर दिया है, जिसका असर प्रदेशभर के अस्पतालों में दिखाई देने लगा है. राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में कुछ ही घंटों के भीतर हालात बिगड़ गए. ओपीडी प्रभावित हुई, मरीजों की कतारें लग गईं और कई वैकल्पिक सर्जरी भी रोकनी पड़ीं. इस बीच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) ने भी सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे प्रदेश में आंदोलन और तेज किया जाएगा.
पूरे प्रदेश में इंटर्न्स ने बंद किया काम
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत एमबीबीएस इंटर्न्स ने सोमवार से काम बंद कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे. आंदोलन का मुख्य मुद्दा स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है, जिसे लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है.
हमीदिया अस्पताल में दिखा आंदोलन का असर
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इंटर्न्स और जूनियर डॉक्टरों के काम बंद करने के कुछ ही घंटों बाद स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगीं. ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं और मरीजों को लंबी प्रतीक्षा का सामना करना पड़ा. अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि इलेक्टिव ऑपरेशन फिलहाल रोक दिए गए हैं.
JUDA ने सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार को 24 घंटे का समय दिया है. संगठन का कहना है कि यदि इस अवधि में कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर भी ओपीडी और वैकल्पिक ओटी सेवाएं बंद कर देंगे. इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर और बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.
डिप्टी सीएम के आवास पर चली बैठक
आंदोलन के बीच डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के आवास पर गांधी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की बैठक हुई. बैठक में इंटर्न्स की मांगों और अस्पताल की स्थिति पर चर्चा की. प्रबंधन ने इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने और आंदोलन के दौरान वाटर कैनन चलाने तथा छात्रों के साथ कथित सख्ती बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी.
वाटर कैनन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
एक दिन पहले गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न्स मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालना चाहते थे. इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की. जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. इस घटना के बाद आंदोलन और उग्र हो गया तथा डॉक्टरों और छात्रों में नाराजगी बढ़ गई.
गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह ने भी वाटर कैनन के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह तरीका उचित नहीं लगा. डीन के अनुसार, वे छात्रों को डिप्टी सीएम के यहां चर्चा के लिए ले जाने पहुंची थीं, लेकिन छात्रों ने वहां जाने से इनकार कर दिया और कहा कि डिप्टी सीएम स्वयं आकर उनसे बातचीत करें.
30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग
इंटर्न्स का कहना है कि वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता है, जो उनके कार्यभार और जरूरतों की तुलना में काफी कम है. वे इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं. छात्रों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड कम है और इसमें सुधार किया जाना चाहिए.
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