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नारायणपुर: शीतला मंदिर में 'माता पहुंचानी' की धूम, देव खेलनी और आस्था का अद्भुत संगम

माता पहुंचानी के साथ ही पूरा नारायणपुर अब मावली मेले के स्वागत के लिए तैयार हो चुका है. आधुनिकता के दौर में भी यहां के लोगों द्वारा संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेज कर रखना निश्चित रूप से प्रशंसनीय है. अब सभी की निगाहें 10 फरवरी से शुरू होने वाले ऐतिहासिक मावली मेले पर टिकी हैं.

नारायणपुर: शीतला मंदिर में 'माता पहुंचानी' की धूम, देव खेलनी और आस्था का अद्भुत संगम

Mata Pahunchani Festival 2026: नारायणपुर जिले में 24 जनवरी 2026 को माता पहुंचानी पर्व श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया. देव खेलनी के साथ विश्व प्रसिद्ध माता मावली मेले की तारीखों का ऐलान हुआ, जो 10 फरवरी से शुरू होगा. बस्तर की संस्कृति और परंपरा अपने आप में अनूठी है. इसी कड़ी में 24 जनवरी 2026 को नारायणपुर जिले में ‘माता पहुंचानी' का पर्व बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया. कुम्हारपारा स्थित शीतला माता मंदिर प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

हर साल की तरह इस बार भी जिले भर से लोग अपनी मन्नतें पूरी होने पर चढ़ावा लेकर माता के दरबार पहुंचे. इस दौरान मंदिर परिसर में ‘देव खेलनी' का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला, जहाँ आस्था और भक्ति का अनोखा संगम दिखाई दिया. इसी आयोजन के साथ विश्व प्रसिद्ध माता मावली मेले की तारीखों का शंखनाद भी हो गया. 

Mata Pahunchani Festival Mavli Fair Narayanpur

Mata Pahunchani Festival Mavli Fair Narayanpur
Photo Credit: NDTV

माता पहुंचानी की मान्यता और चढ़ावा

नारायणपुर के कुम्हारपारा स्थित शीतला माता मंदिर में उमड़ा जनसैलाब माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है. पारंपरिक माता पहुंचानी रस्म के अनुसार मान्यता है कि शीतला माता मौसमी बीमारियों जैसे चेचक (छोटी माता) और हैजा से रक्षा करती हैं. जिन श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी हुईं और जो परिवार साल भर निरोगी रहे, वे माता को धन्यवाद देने पहुंचे.

परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने फल, नवीन फसल और धन-धान्य अर्पित किए. वहीं कई श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत के अनुरूप भेड़, बकरा और मुर्गी जैसे पशु-पक्षियों का भी चढ़ावा चढ़ाया. माता के जयकारों से पूरा मंदिर प्रांगण गूंज उठा. 

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देव खेलनी: आस्था का रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण ‘देव खेलनी' रही. आसपास के गांवों से ग्रामीण अपने देवी-देवताओं के प्रतीक आंगा, डोली, डांग, खप्पर और कलश लेकर मंदिर पहुंचे. ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया. 

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पुजारियों और सिरहा-गुनिया के शरीर में दैवीय शक्ति का प्रवेश होते ही वे झूमने लगे. आस्था का यह दृश्य उस समय और भी गहन हो गया, जब पुजारी अपनी भक्ति और दैवीय शक्ति की सत्यता सिद्ध करने के लिए नंगे बदन पर लोहे के सांकल बरसाते नजर आए. यह बस्तर की आदिम संस्कृति और अटूट विश्वास का सजीव उदाहरण है. 

Mata Pahunchani Festival Mavli Fair Narayanpur

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मावली मेले की घोषणा, 10 फरवरी से होगा शुभारंभ

देव समिति के उपाध्यक्ष अर्जुन देवांगन के अनुसार माता पहुंचानी रस्म केवल एक पूजा नहीं, बल्कि नारायणपुर के ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध माता मावली मेले की शुरुआत का संकेत है. इसी दिन मेले की दैवीय घोषणा की जाती है. इस वर्ष मावली मेला आगामी 10 फरवरी 2026 से शुरू होगा.

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