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प्‍यार को म‍िलेगी मंज‍िल: घर से भागी नाबाल‍िग, शेल्टर होम में बनी मां, अब प्रेमी ही बनेगा दूल्हा, बेटी को भी म‍िलेगा प‍िता का नाम

Love Story Bhopal Madhya Pradesh: भोपाल में एक अनोखी शादी होने जा रही है. दमोह की युवती ‘आरती’ (काल्पनिक नाम) शेल्टर होम में बेटी को जन्म देने के बाद अब अपने प्रेमी ‘दीपक’ (काल्पनिक नाम) से मार्च में विवाह करेगी. कोर्ट और महिला बाल विकास विभाग की प्रक्रिया के बाद दोनों का मिलन संभव हो पाया है. 

प्‍यार को म‍िलेगी मंज‍िल: घर से भागी नाबाल‍िग, शेल्टर होम में बनी मां, अब प्रेमी ही बनेगा दूल्हा, बेटी को भी म‍िलेगा प‍िता का नाम

Love Story Bhopal Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अनूठी शादी होने जा रही है. यह शादी एक ऐसी ‘आरती' (काल्पनिक नाम) की है, जो नाबालिग थी तब घर से भागी, प्रेम में पड़ी, शेल्टर होम में मां बनी, अपनों द्वारा ठुकराई गई और अब बाल‍िग होने पर वही प्रेमी दीपक (काल्पनिक नाम) उसका जीवनसाथी बनने जा रहा है. शेल्टर होम प्रशासन की पहल पर मार्च में दोनों विवाह बंधन में बंधेंगे.

Nirbhaya Shelter Home Bhopal में अजब प्रेम की गजब कहानी

आरती और दीपक की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं. तमाम मुश्किल हालात के बावजूद इनके प्रेम का धागा कमजोर नहीं पड़ा. लंबी जुदाई, पुलिस कार्रवाई और कोर्ट की प्रक्रिया के बाद अब आरती शेल्टर होम से अपने प्रेमी की दुल्हन बनकर विदा होगी. उसे उसका प्यार मिलेगा और उसकी बेटी को पिता का नाम.

एनडीटीवी से बातचीत में आरती और न‍िर्भया शेल्‍टर होम की डायरेक्टर समर खान ने इश्क और इम्तिहान की पूरी कहानी बयां की है. आरती ने बताया कि वह मध्य प्रदेश के दमोह की रहने वाली है. लॉकडाउन के दौरान दमोह के ही दीपक से उसकी जान-पहचान हुई. उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई.

घर से भागकर पहुंची पुणे

अपनी मां से क‍िसी बात को लेकर झगड़ा होने के बाद आरती ने साल 2024 घर छोड़ दिया और भागकर पुणे पहुंच गई. उसके पास दीपक भी पहुंच गया. दोनों ने मंदिर में शादी भी कर ली थी, मगर रज‍िस्‍ट्रेशन नहीं करवाया था. 

इधर, युवती के परिजनों ने थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी. करीब एक साल की तलाश के बाद पुलिस ने आरती को ढूंढ निकाला, लेकिन उस समय दीपक नहीं मिला. पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, मगर परिवार ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया. 

कोर्ट का आदेश और शेल्टर होम

मामला कोर्ट पहुंचा, जहां से युवती को भोपाल स्थित न‍िर्भया शेल्टर होम भेज दिया गया. यहां पता चला कि वह दो माह की गर्भवती है. शुरुआत में उसने बच्चे के पिता का नाम और अपनी प्रेम कहानी छुपाई. परिजनों ने शर्त रखी कि यदि वह गर्भपात करवा ले तो वे उसे अपना सकते हैं, लेकिन आरती इसके लिए तैयार नहीं हुई. उसने बच्चे को जन्म देने का निर्णय लिया.

बेटी का जन्म और फिर नया मोड़

शेल्टर होम की डायरेक्टर समर खान के मुताबिक, यहां रहने वाली लड़कियों को हर शनिवार अपने परिजनों या परिचितों से फोन पर बात करने की अनुमति होती है. आरती भी नियमित रूप से किसी से बात करती थी. इसी दौरान उसने एक बेटी को जन्म दिया. बाद में उसने शेल्टर होम प्रशासन को बताया कि वह शादी करना चाहती है.  

अखबार में विज्ञापन, आए आठ रिश्ते

शेल्टर होम प्रशासन ने पूरे मामले की जानकारी कोर्ट को दी. युवती के विवाह के लिए अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया. शादी के कुल आठ प्रस्ताव आए. आरती ने उनमें से एक युवक को चुना और प्रशासन को बताया कि वही दीपक है, जिससे वह प्रेम करती है और जो उसकी बेटी का पिता है.

पांच माह चली कानूनी प्रक्रिया

कोर्ट के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने युवक की सोशल इन्वेस्टिगेशन करवाई. लगभग पांच माह की कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 जनवरी 2026 को दोनों की सगाई कराई गई. अब मार्च में शेल्टर होम परिसर में ही विवाह होगा. दीपक अपने परिजनों के साथ बारात लेकर आएगा. शेल्टर होम से ही बारात निकलेगी और यहीं सात फेरे व विदाई की रस्में संपन्न होंगी.

“मैं उससे बहुत प्यार करती हूं”

आरती का कहना है कि वह दीपक से बहुत प्यार करती है. दीपक के परिवार वाले भी इस शादी से खुश हैं. उनकी बेटी 15 अप्रैल को एक साल की हो जाएगी. लंबे संघर्ष, सामाजिक अस्वीकार और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अब यह प्रेम कहानी नए मुकाम पर पहुंच रही है, जहां एक मां को उसका जीवनसाथी और एक बच्ची को अपने पिता का नाम मिलने जा रहा है. 

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