- कूनो नेशनल पार्क में एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है.
- इस मॉडल से चीता शावकों का सर्वाइवल रेट 61 फीसदी पहुंच गया है.
- कूनो में शावकों का सर्वाइवल रेट अफ्रीका की तुलना में काफी बेहतर है.
कूनो नेशनल पार्क चीतों ही नहीं, बल्कि शावकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है. कूनों में जन्में शावकों की जान बचाने के लिए प्रबंधन ने एक नया मॉडल विकसित किया जो सफल हो रहा. इस विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए अफ्रीकी के पारंपरिक तरीकों से अलग, चीता मां को परेशान किए बिना सैटेलाइट कॉलर, 24 घंटे सीसीटीवी और समय-समय पर साइलेंट ड्रोन कैमरों से डेन यानी शावकों की गुफा की निगरानी की जाती है.
पहले 3 शावकों की मौत के बाद पड़ी जरूरत
प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, कूनो में जन्मे पहले चार में से तीन चीता शावकों की गर्मी से मौत हो गई थी. इसके बाद इस विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम को विकसित किया गया है, जो शावकों के सर्वाइवल में काफी मददगार रहा है.

कूनो नेशनल पार्क में शावकों का सर्वाइवल रेट अफ्रीका से बेहतर.
इंसानी गतिविधि मां को करती है परेशान
जिससे यह साबित हुआ कि तकनीक के सहारे मादा चीता को परेशान किए बिना और गुफा से पर्याप्त दूरी रखकर उसके शावकों की सुरक्षा व स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग की जा सकती है. कूनो प्रबंधन अपने इस नए और सफल प्रयोग का आधिकारिक मैनुअल भी जारी करेगा, जिसे देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यान, रिजर्व और अभयारण्य में भी लागू किया जा सकेगा.
कूनों में 49, पूरे प्रदेश में 52 चीते
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