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कूनो नेशनल पार्क: चीतों की देखभाल में भारत ने अफ्रीका को भी पछाड़ा, 61% पहुंचा सर्वाइवल रेट

कूनो नेशनल पार्क से एक कमाल की खबर सामने आई है, यहां चीता शावकों का सर्वाइवल रेट 61 प्रतिशत तक पहुंच गया है. खास बात यह है क‍ि ये सर्वाइवल रेट अफ्रीका की तुलना में काफी बेहतर है. 

कूनो नेशनल पार्क: चीतों की देखभाल में भारत ने अफ्रीका को भी पछाड़ा, 61% पहुंचा सर्वाइवल रेट
  • कूनो नेशनल पार्क में एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है.
  • इस मॉडल से चीता शावकों का सर्वाइवल रेट 61 फीसदी पहुंच गया है.
  • कूनो में शावकों का सर्वाइवल रेट अफ्रीका की तुलना में काफी बेहतर है.

कूनो नेशनल पार्क चीतों ही नहीं, बल्‍कि शावकों के लिए सुरक्ष‍ित ठिकाना बन गया है. कूनों में जन्‍में शावकों की जान बचाने के लिए प्रबंधन ने एक नया मॉडल विकसित किया जो सफल हो रहा. इस विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए अफ्रीकी के पारंपरिक तरीकों से अलग, चीता मां को परेशान किए बिना सैटेलाइट कॉलर, 24 घंटे सीसीटीवी और समय-समय पर साइलेंट ड्रोन कैमरों से डेन यानी शावकों की गुफा की निगरानी की जाती है. 

शावकों के जन्‍म के बाद दूर लगे कैमरों से गुफा की निगरानी की जाती है. कुछ दिन बाद जब चीता मां शिकार पर निकलती है तब उसकी गैरमौजूदगी में टीम सुरक्षित दूरी से शावकों के स्वास्थ्य की जांच करती है. जिससे शावकों का सर्वाइवल रेट 61 फीसदी तक पहुंच गया है, जो अफ्रीका के 10-40 फीसदी से काफी बेहतर है. कूनों प्रबंधन को यह सफलता 100 से अधिक ट्रैकर्स और विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए ही मिली है. 
कूनो नेशनल पार्क चीता शावकों के लिए सुरक्ष‍ित ठिकाना.

कूनो नेशनल पार्क चीता शावकों के लिए सुरक्ष‍ित ठिकाना.

पहले 3 शावकों की मौत के बाद पड़ी जरूरत 

प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, कूनो में जन्मे पहले चार में से तीन चीता शावकों की गर्मी से मौत हो गई थी. इसके बाद इस विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम को विकसित किया गया है, जो शावकों के सर्वाइवल में काफी मददगार रहा है. 

कूनो नेशनल पार्क में शावकों का सर्वाइवल रेट अफ्रीका से बेहतर.

कूनो नेशनल पार्क में शावकों का सर्वाइवल रेट अफ्रीका से बेहतर.

इंसानी गतिविधि मां को करती है परेशान 

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना रहा है कि वन्यजीवों की गुफा (डेन) के आसपास इंसानी गतिविधि उन्‍हें परेशान करती है. ऐसे में मां अपनी जगह बदल सकती है या फ‍िर शावकों को छोड़कर भी जा सकती है. इस चुनौती को ध्‍यान में रखते हुए कूनो नेशनल पार्क के प्रबंधन ने नया प्रयोग किया. 

जिससे यह साबित हुआ क‍ि तकनीक के सहारे मादा चीता को परेशान किए बिना और गुफा से पर्याप्‍त दूरी रखकर उसके शावकों की सुरक्षा व स्‍वास्‍थ्‍य की मॉनिटरिंग की जा सकती है. कूनो प्रबंधन अपने इस नए और सफल प्रयोग का आधिकारिक मैनुअल भी जारी करेगा, जिसे देश के अन्‍य राष्ट्रीय उद्यान, रिजर्व और अभयारण्य में भी लागू किया जा सकेगा. 

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कूनों में 49, पूरे प्रदेश में 52 चीते

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान 49 चीते हैं. जिनमें 15 नर और 15 मादा चीतों के साथ 19 शावक हैं. इसके अलावा प्रदेश के ही गांधी सागर अभयारण्य में साल 2025 में कूनो से तीन चीतें शिफ्ट किए गए थे. इनमें दो नर प्रभास-पावक जबकि एक मादा चीता धीरा शामिल है. सभी चीतों को मिलाकर मप्र में इनकी संख्‍या 52 हैं.

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