Jal Ganga Samvardhan Abhiyan Madhya Pradesh: गुड़ी पड़वा यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन, 19 मार्च को मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Dr Mohan Yadav) इंदौर के इस्कॉन मंदिर से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान' (Jal Ganga Samvardhan Abhiyan) के तीसरे चरण का शुभारंभ कर रहे हैं. इंदौर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ-साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के आसपास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां जल संरक्षण को लेकर एक साथ काम शुरू होगा. करीब साढ़े तीन महीने तक चलने वाले इस राज्यव्यापी अभियान का समापन 30 जून को होगा. इस अभियान में कुल 18 विभाग शामिल किए गए हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह‑नोडल विभाग रहेगा.
वसुंधरा को बचाए रखने के लिए जल की हर बूंद बचाएं।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 19, 2026
आज इंदौर से प्रदेशव्यापी 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तीसरे चरण की शुरुआत करने जा रहा हूं।
इसके अंतर्गत सूखी नदियों व तालाबों के पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत, नहरों के निर्माण सहित जल संरक्षण के अन्य कार्य किए जाएंगे।… pic.twitter.com/qXfJN3FUkA
हर जिले में प्रभारी मंत्री संभालेंगे कमान
अभियान का क्रियान्वयन जिलों में संबंधित प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा. जिला स्तर पर कलेक्टर अभियान के नोडल अधिकारी होंगे. उनकी अध्यक्षता में जिला ‘जल गंगा संवर्धन अभियान समिति' कार्ययोजना तैयार करेगी और प्रगति की निगरानी करेगी. समिति में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, समन्वयक और अभियान से जुड़े सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी शामिल होंगे. इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, उद्योग जगत, कृषि‑अभियांत्रिकी शिक्षण एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत‑महात्मा और अन्य सम्मानित नागरिकों को भी समिति में शामिल किया जा सकेगा. विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे. उनके नेतृत्व में विकासखंड स्तरीय समिति अभियान से जुड़े कार्यों की निगरानी करेगी. जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले 4 से 5 सरपंच और क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा.
मध्यप्रदेश 'नदियों का मायका' है। इसलिए हम सभी के लिए जल संरक्षण जिम्मेदारी भी है और संस्कार भी।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 19, 2026
बीते दो वर्षों में हम सभी ने मिलकर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त जन-आंदोलन बना दिया है।
इस वर्ष भी उसी संकल्प और ऊर्जा के साथ अभियान को आगे बढ़ाना है। pic.twitter.com/T9ZzCsIUds
18 विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान
‘जल गंगा संवर्धन अभियान' में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म‑लघु‑मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं.
मनरेगा से लेकर वॉटरशेड तक, कामों की लंबी सूची
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत मनरेगा योजना में पहले से चल रहे 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर और 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज के अधूरे कार्यों को पूरा कराया जाएगा. इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 2.0 के तहत 2200 नए कार्यों को अमल में लाया जाएगा. वॉटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत बने चेक डैम और स्टॉप डैम की मरम्मत और नवीनीकरण भी किया जाएगा. मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना और ‘एक बगिया मां के नाम' योजना में पिछले वर्ष हुए पौधरोपण की गैप फिलिंग पर भी फोकस रहेगा. पुराने तालाबों, चेक डैम और स्टॉप डैम से जनसहयोग से गाद निकालकर वह मिट्टी किसानों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी.
2500 करोड़ के कार्य, तीसरे चरण में बड़ा लक्ष्य
अभियान के तीसरे चरण में सरकार ने जल संरक्षण और संचयन को लेकर और व्यापक लक्ष्य तय किए हैं. करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं‑बावड़ियों की मरम्मत, नहरों के निर्माण और सुधार, सूखी नदियों के पुनर्जीवन और भू‑जल रिचार्ज से जुड़े काम किए जाएंगे. इन तमाम प्रयासों का मकसद वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर जल स्रोतों को स्थायी बनाना है.
10 हजार से ज्यादा चेक डैम, रखरखाव पर खास जोर
इस वर्ष अभियान के तहत प्रदेशभर में 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम के सुचारु संधारण का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही छोटे‑बड़े बांधों के गेटों की मरम्मत और जल संरचनाओं को मजबूत करने के काम भी किए जाएंगे. इन प्रयासों से बारिश का पानी रोककर भू‑जल स्तर बढ़ाने और सिंचाई के लिए ज्यादा पानी उपलब्ध कराने की योजना है.
शहरों से जंगल तक, हर क्षेत्र में काम
नगरीय क्षेत्रों में अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरक्षण संरचनाओं का जीर्णोद्धार और नए कार्य होंगे. वन विभाग लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोल्डर चेक डैम, ब्रशवुड चेक डैम, परकोलेशन पिट और कंटूर ट्रेंच जैसे भू‑जल संवर्धन के कार्य करेगा. जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण लघु सिंचाई परियोजनाओं के तालाबों के पाल (बंड) की मरम्मत और नहरों की साफ‑सफाई पर काम करेंगे.
स्कूल‑आंगनवाड़ी में पेयजल की जांच
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच करेगा. साथ ही उनके आसपास साफ‑सफाई और स्वच्छता के कार्य भी किए जाएंगे.
सांसद‑विधायक निधि और CSR से भी जुटेगा पैसा
अभियान के लिए विभागीय योजनाओं के बजट के साथ‑साथ सांसद निधि, विधायक निधि, जनभागीदारी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का भी उपयोग किया जाएगा, ताकि जल संरक्षण के काम तय समय में पूरे किए जा सकें.
प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलेगा अभियान
‘जल गंगा संवर्धन अभियान' प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलेगा. हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में अभियान को अंजाम दिया जाएगा. जिला कलेक्टर विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और जनसहयोग के साथ मिलकर जल संचयन से जुड़े कार्यों की योजना बनाएंगे और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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