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लापरवाही और नाकामियों की भेंट चढ़े 13 पर्यटक? बरगी डैम क्रूज हादसे का पूरा सच आना अभी बाकी!

Bargi Dam Cruise Accident: 30 अप्रैल को जब जबलपुर के बरगी डैम में संचालित क्रूज बोट पलटने से 13 लोगों की मौत हो गई. शुरुआती आकलन में खराब मौसम को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है. हालांकि सरकार ने हादसे की जांच के लिए गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है.

लापरवाही और नाकामियों की भेंट चढ़े 13 पर्यटक? बरगी डैम क्रूज हादसे का पूरा सच आना अभी बाकी!

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: बरगी डैम क्रूज़ त्रासदी अब केवल अचानक आए तूफान और एक नाव के पलटने की कहानी नहीं रह गई है. हर गुजरते दिन के साथ यह हादसा उन नाकामियों की पूरी कड़ी की तरह दिखने लगा है, जिनका सच अब सामने आना बाकी है. 30 अप्रैल को जब जबलपुर के बरगी डैम में संचालित क्रूज़ बोट पलटी, तो 13 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. मृत मां से लिपटे चार साल के बच्चे की तस्वीर ने पूरे देश को झकझोर दिया. लेकिन अब शोक के साथ तीन गंभीर सवाल मध्य प्रदेश के पर्यटन सिस्टम के सामने खड़े हैं.

जांच ठीक से शुरू होने से पहले ही हादसे की शिकार नाव को क्यों काटा गया? पर्यटकों को लेकर चल रही क्रूज़ बोट कथित तौर पर बिना बीमा के कैसे संचालित हो रही थी? और बिना पर्यावरणीय मंजूरी के यह संचालन कैसे जारी था? ये मामूली प्रक्रियात्मक चूक नहीं हैं. ये मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं. क्या बरगी क्रूज त्रासदी केवल एक हादसा थी, या एक बेहद लापरवाह सिस्टम का नतीजा?

पहली और सबसे गंभीर चूक हादसे के बाद सामने आई. जिस नाव को जांच का सबसे अहम सबूत मानकर सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, उसे कथित तौर पर आधिकारिक जांच लंबित रहते ही पूरी तरह तोड़ दिया गया. हादसे में बचे लोगों का कहना है कि इससे नाव की डिजाइन, संरचना, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित मेंटेनेंस खामियों से जुड़े अहम सुराग नष्ट हो सकते हैं.

क्रूज को काटे जाने पर कड़ी आपत्ति

हादसे में अपने परिवार के नौ सदस्यों के साथ जीवित बचे एडवोकेट रोशन आनंद ने क्रूज को काटे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि जब नाव को डैम से बाहर निकाला गया था, तब वह सही हालत में थी और उसका विस्तृत तकनीकी परीक्षण होना चाहिए था. उन्होंने कहा, 'जब जांच अभी चल रही थी, तब ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए था. अब जब सबूत नष्ट हो गए हैं, तो मामला ठहरता हुआ लग रहा है अब आगे कुछ सामने आने की संभावना कम है.'

बेटे का पहला जन्मदिन मनाने बरगी डैम गए थे रोशन आनंद

रोशन अपने परिवार के साथ बरगी डैम गए थे. उनके साथ उनका एक साल का बेटा भी था. यह सफर परिवार के लिए एक खुशी का मौका था. उनकी भाभी इजराइल से लौटी थीं और परिवार एक बच्चे का पहला जन्मदिन मनाने के लिए जुटा था,  लेकिन वह दिन डरावनी त्रासदी में बदल गया. रोशन का परिवार तो बच गया, लेकिन 13 लोग वापस नहीं लौटे.

नाव को बाहर निकाले जाने के बाद उसके साथ क्या हुआ, इस पर अधिकारियों की ओर से अलग-अलग बयान सामने आए हैं. पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि नाव को तोड़ा नहीं गया, बल्कि पानी से बाहर निकालते समय वह टूट गई. उन्होंने कहा, 'इसे तोड़ा नहीं गया. पानी से बाहर निकालते समय जहाज टूट गया.'

लेकिन बरगी सीएसपी अंजुल अयंक मिश्रा ने अलग बात कही. उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने यह जांचने के लिए नाव को काटा था कि कहीं कोई व्यक्ति अंदर फंसा तो नहीं है. उनके अनुसार, तकनीकी टीम ने जांच के लिए इंजन को अपने कब्जे में ले लिया है.

लेकिन यह सफाई हादसे में बचे लोगों को संतुष्ट नहीं कर रही है. रोशन आनंद ने सवाल उठाया है कि क्या केवल इंजन की जांच पर्याप्त है? उनका कहना है कि यह 2006 मॉडल की कैटामरन-हल क्रूज बोट थी, जो करीब 20 साल पुरानी थी. ऐसे में इसके हल, बॉडी मटीरियल, ढांचे, संतुलन, यात्री सुरक्षा तंत्र और डिजाइन सभी की जांच जरूरी थी.

बीमा कवर की व्यवस्था नहीं थी

दूसरी बड़ी चूक उतनी ही चौंकाने वाली है. जिस क्रूज बोट में टिकट खरीदकर पर्यटक सवार हुए थे, वह कथित तौर पर बीमित नहीं थी. पर्यटकों ने 200 रुपये का टिकट खरीदा था, लेकिन इस यात्रा के साथ किसी अनिवार्य बीमा कवर की व्यवस्था नहीं थी. यानी जब हादसा हुआ, तो यात्रियों और उनके परिवारों के पास तत्काल आर्थिक सुरक्षा का कोई मजबूत आधार नहीं था.

एक ऐसे राज्य में, जो पर्यटन को तेजी से बढ़ावा दे रहा है, ऐसी गतिविधियों के लिए अनिवार्य बीमा व्यवस्था का न होना गंभीर सवाल उठाता है. देश के कई राज्य इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुके हैं. केरल में इको-टूरिज्म केंद्रों पर टिकट के साथ दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है. ओडिशा, गोवा और गुजरात ने भी अलग-अलग पर्यटन गतिविधियों के लिए सुरक्षा और बीमा संबंधी मानक बनाए हैं.

सरकार ने 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की 

मध्य प्रदेश में, हालांकि, ऐसी सुरक्षा व्यवस्था के बिना ही संचालन चलता दिख रहा है. बरगी हादसे के बाद सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है. तीसरी चूक क्रूज संचालन के लिए कथित तौर पर पर्यावरणीय मंजूरी न होने से जुड़ी है. किसी डैम पर व्यावसायिक क्रूज़ संचालन सिर्फ पर्यटन गतिविधि नहीं होता. इसमें यात्री सुरक्षा, जल पारिस्थितिकी, नौवहन मानक, पर्यावरणीय सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था जैसे कई पहलू शामिल होते हैं.

Bargi Dam Cruise Accident

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सवाल इसलिए और गहरा हो जाता है, क्योंकि पर्यटन विभाग के अधिकारी खुद मान रहे हैं कि मध्य प्रदेश में क्रूज संचालन के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी मौजूद नहीं हैं. यानी दर्जनों पर्यटकों को लेकर चल रही एक क्रूज बोट ऐसे राज्य में संचालित हो रही थी, जहां नियमों की किताब ही अधूरी दिखाई देती है.

चार सदस्यीय समिति गठित

सरकार ने अब इस त्रासदी की जांच के लिए गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है. इस समिति में होमगार्ड और सिविल डिफेंस के अतिरिक्त निदेशक, जबलपुर संभागायुक्त और पर्यटन विभाग के सचिव को सदस्य बनाया गया है. समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के टर्म्स ऑफ रेफरेंस अभी तय किए जा रहे हैं.  इस प्रक्रिया में गोवा की क्रूज संचालन नीति का भी अध्ययन किया जाएगा.

Bargi Dam Cruise Accident

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क्रूज का इंजन बंद हो गया था?

प्रारंभिक जांच में संभावित यांत्रिक खराबी के संकेत भी मिले हैं. क्रूज के दो इंजनों में से एक के ठीक से काम न करने या कम क्षमता पर चलने की बात सामने आई है. हादसे में बचे रियाज हुसैन, जो करीब चार घंटे पानी में रहे, ने NDTV से कहा कि यात्रा के बीच में क्रूज का इंजन बंद हो गया था. हालांकि क्रूज पायलट महेश पटेल ने इस दावे से इनकार किया, लेकिन उन्होंने यह माना कि दूसरी मंजिल के विंडस्क्रीन पर लहरें टकरा रही थीं और बाद में उन्होंने देखा कि इंजन वाले हिस्से में पानी भर रहा था.

फिलहाल शुरुआती आकलन में खराब मौसम को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है. तेज हवा के कारण क्रूज डगमगाने लगी. ऊपरी डेक पर मौजूद यात्री घबराकर निचले डेक की ओर भागे, जिससे नाव का संतुलन बिगड़ गया. इसके बाद नाव में पानी भरने लगा और यात्री बचने की कोशिश करने लगे.

लेकिन मौसम हर सवाल का जवाब नहीं हो सकता. खराब मौसम हादसे के क्षण को समझा सकता है, लेकिन यह नहीं बता सकता कि सुरक्षा इंतजाम कमजोर क्यों थे? यह नहीं बता सकता कि यात्रियों के लिए कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? यह नहीं बता सकता कि क्रूज बिना बीमा के कैसे चल रही थी?  यह नहीं बता सकता कि स्पष्ट एसओपी क्यों नहीं थे. और यह तो बिल्कुल नहीं बता सकता कि पूरी संरचनात्मक जांच से पहले ही नाव को क्यों काट दिया गया?

पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने माना है कि जांच में लापरवाही के संकेत मिले हैं. उन्होंने कहा कि जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी, यह अंतिम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा.

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