IAS Arvind Shah Controversy: जबलपुर में कैबिनेट मंत्री और एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के बीच उपजा विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर शासन स्तर तक पहुंच गया है. स्मार्ट सिटी जबलपुर के CEO अरविंद शाह पर एक महिला कर्मचारी द्वारा अभद्र व्यवहार और अपमानजनक भाषा के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पीड़िता ने शपथपत्र के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और CS (मुख्य सचिव) अनुराग जैन को शिकायत भेजी है. मंत्री राकेश सिंह के इस मामले में हस्तक्षेप के बाद सियासी और अफसरशाही हलकों में हलचल तेज हो गई है. अब सबकी निगाह इस बात पर है कि सरकार इस संवेदनशील विवाद पर क्या रुख अपनाती है.
वेतन विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
स्मार्ट सिटी जबलपुर में कार्यरत कर्मचारी दिलप्रीत भल्ला के अनुसार, उन्हें लंबे समय से वेतन नहीं मिल रहा था. इसी परेशानी को लेकर जब वह अपनी समस्या लेकर CEO अरविंद शाह के पास पहुंचीं, तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. शिकायत में आरोप है कि CEO ने उन्हें “2 कौड़ी की” जैसे शब्द कहकर अपमानित किया, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हुईं.

IAS Arvind Shah Controversy: IAS अरविंद शाह विवाद
मंत्री से संपर्क पर भड़का विवाद
दिलप्रीत भल्ला का कहना है कि जब वे अपनी समस्या लेकर कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह तक पहुंचीं, तो इस बात से CEO और नाराज़ हो गए. शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अरविंद शाह ने कथित तौर पर कहा कि “मैं अपने दम पर IAS बना हूं, किसी मंत्री की नहीं सुनता” और उन्हें जहां चाहें शिकायत करने की चुनौती दी. यही टिप्पणी इस विवाद को राजनीतिक रंग देती नजर आ रही है.
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की एंट्री
मामले में सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी सामने आई है. पीड़िता ने कमेटी के माध्यम से मंत्री तक अपनी बात पहुंचाई थी. कमेटी का आरोप है कि एक महिला कर्मचारी के साथ अभद्रता हुई है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह छावड़ा का कहना है कि विवाद एक समय पर खत्म हो गया था, लेकिन लाइन अधिकारियों द्वारा इसे फिर से तूल दिया जा रहा है.
CEO की चुप्पी और माफी का दावा
IAS अरविंद शाह ने इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान देने से इनकार किया है. उनका कहना है कि जो भी पक्ष था, वह उन्होंने एसोसिएशन के समक्ष रख दिया है. उधर, मंत्री के हस्तक्षेप के बाद माफी का मामला भी सामने आया, लेकिन उसके बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हो सका. सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान मंत्री और अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक की भी चर्चा है.
शासन स्तर पर कार्रवाई की आस
अब यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच जाने के बाद तूल पकड़ चुका है. प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि महिला कर्मचारी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिर्फ अनुशासन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक मर्यादा का भी मामला होगा. फिलहाल, सभी की नजर शासन के अगले कदम पर टिकी है कि इस मंत्री–IAS विवाद में क्या कार्रवाई होती है और किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाती है.
यह भी पढ़ें : MP के कान्हा में असम से लौटें जंगली भैंसें; CM मोहन ने बताया- क्यों खास है काजीरंगा से ऐतिहासिक ट्रांसलोकेशन?
यह भी पढ़ें : पुणे के प्रतिष्ठित ILS लॉ कॉलेज को बड़ा झटका; 6% ब्याज सहित अवैध फीस लौटाने का आदेश
यह भी पढ़ें : MP IAS Posting: ‘प्रशासन की असली पाठशाला'; 8 IAS अधिकारियों को मिली आदिवासी जिलों में पहली पदस्थापना
यह भी पढ़ें : MP में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी कब से? दिग्विजय सिंह ने CM मोहन को लिखा पत्र, MSP पर शीघ्र खरीदी की मांग
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं