Crime News: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. थाने में बयान देने पहुंचे एक आरोपी के अचानक गायब हो जाने और बाद में उसे खेत में रस्सियों से बंधी हालत में मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. घटना के बाद परिजनों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस पर बर्बरता और गैरकानूनी हिरासत के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले को लेकर गोरमी थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन हुआ और मुख्य सड़क पर चक्काजाम कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया. प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है.
मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार गोरमी नगर के वार्ड क्रमांक 3 निवासी गजराज जाटव और उसके दो साथियों का 11 अप्रैल को पड़ोसियों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. शुरुआत में यह विवाद केवल कहासुनी तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच लाठी‑डंडे चलने लगे. सूचना मिलने पर गोरमी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

Crime News: खेत में बंधा युवक
बयान के लिए बुलाया, फिर अचानक गायब
पुलिस ने जांच के तहत 23 अप्रैल को गजराज जाटव और उसके दो साथियों को बयान देने के लिए गोरमी थाने बुलाया. गजराज अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचा था. परिजन थाने के बाहर बैठे रहे, जबकि गजराज को अंदर बयान के लिए ले जाया गया. परिजनों का आरोप है कि दिनभर थाने में कार्रवाई चलती रही, लेकिन शाम होते‑होते गजराज अचानक गायब हो गया. उसके बाहर न निकलने पर परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने थाने में पूछताछ शुरू की.

Crime News Bhind Accused Missing from Police Station Found Tied Up in Field
रातभर तलाश, सुबह खेत में मिली बंधी हालत
गजराज के गायब होने के बाद रातभर परिजन और परिचित उसकी तलाश में जुटे रहे. आरोप है कि पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही थी. इसी बीच अगली सुबह गोरमी थाना क्षेत्र के चपरा गांव के पास एक खेत में गजराज जाटव गंभीर हालत में मिला. उसकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी और हाथ‑पैर रस्सियों से जकड़े हुए थे. शरीर पर चोट के कई निशान भी देखे गए, जिससे उसके साथ मारपीट की आशंका जताई जा रही है.
पुलिस पर मारपीट और बंधक बनाने का आरोप
घटना के सामने आते ही परिजन भड़क उठे. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बयान के बहाने गजराज को थाने बुलाया और वहां उसके साथ मारपीट की गई. आरोप है कि घाव छुपाने के लिए उसके शरीर पर पाउडर तक लगाया गया और बाद में उसे खेत में फेंक दिया गया. परिजनों का कहना है कि यह सीधी तौर पर पुलिसिया ज्यादती और मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
थाने का घेराव, सड़क पर चक्काजाम
इस घटना के बाद गजराज के परिजन और भीम आर्मी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता गोरमी थाने के बाहर जमा हो गए. देर रात से ही थाने का घेराव शुरू कर दिया गया. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने गोरमी‑पोरसा रोड पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और थाना प्रभारी आशुतोष शर्मा को तत्काल हटाने की मांग की गई.
प्रशासन हरकत में, भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया. मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून‑व्यवस्था बनाए रखी जा सके. गोहद एसडीओपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तटस्थ जांच की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही या ज्यादती सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
समझाइश के बाद खुला चक्काजाम, तनाव बरकरार
अधिकारियों की लंबी समझाइश और आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम समाप्त किया, लेकिन इलाके में अब भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है. स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है. पुलिस ने गजराज जाटव को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. थाने से आरोपी का गायब होना और बाद में उसे बंधी हालत में मिलना कई आशंकाओं को जन्म देता है. अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं. देखना होगा कि इस मामले में सच्चाई क्या सामने आती है और क्या जिम्मेदारों पर वास्तव में कार्रवाई हो पाती है या नहीं.
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